कोलकाता : एसआरएफटीआई ने छात्रों की सुरक्षा को लेकर लगे आरोपों को बताया निराधार, संस्थान ने दी सफाई
कोलकाता, 31 अक्टूबर (आईएएनएस)। सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट (एसआरएफटीआई) ने छात्रों की सुरक्षा संबंधी चिंताओं की अनदेखी करने के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें पूरी तरह झूठा और भ्रामक बताया है। संस्थान के रजिस्ट्रार द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि प्रशासन ने छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और उनकी शिकायतों के समाधान के लिए लगातार कदम उठाए हैं।
रजिस्ट्रार ने स्पष्ट किया कि 27 सितंबर को आयोजित कार्यक्रम की अनुमति वर्तमान कुलपति के कार्यभार संभालने से पहले ही दी जा चुकी थी। घटना के बाद कुलपति कैंपस पहुंचे और उन्होंने तुरंत छात्रों तथा संबंधित अधिकारियों के साथ बातचीत शुरू की।
बयान के अनुसार, कुलपति स्वयं दो बार छात्र प्रतिनिधियों और फिल्म विभाग के डीन के साथ कोलकाता पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से मिले। पहली बैठक पुलिस कार्यालय में और दूसरी संस्थान परिसर में आयोजित की गई। इन बैठकों में छात्रों की सुरक्षा संबंधी चिंताओं पर चर्चा की गई। इसके अलावा छात्रों की साइबर सुरक्षा संबंधी शिकायतों को समझने और समाधान की प्रक्रिया बताने के लिए साइबर सेल अधिकारियों से भी उनकी सीधी बातचीत कराई गई।
संस्थान ने बताया कि स्थानीय पुलिस ने छात्रों को संयम बरतने और किसी भी ऐसी गतिविधि से बचने की सलाह दी थी, जिससे तनाव बढ़ सकता हो। इसके बावजूद 27 सितंबर से 4 अक्टूबर के बीच कुछ छात्र समूहों ने संस्थान की अनुमति के बिना परिसर के अंदर और बाहर एकजुटता मार्च और सभाएं आयोजित कीं। इन कार्यक्रमों में राजनीतिक वक्ताओं की मौजूदगी और राजनीतिक नारेबाजी भी हुई।
प्रबंधन के मुताबिक बाद की घटनाओं के बाद पुलिस प्रशासन के साथ लगातार समन्वय बनाए रखा गया और कैंपस के भीतर तथा बाहर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई। घायल छात्रों को चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई। साथ ही भावनात्मक तनाव से गुजर रहे छात्रों को मनोवैज्ञानिक सहायता देने के लिए पेशेवर संस्थाओं से भी संपर्क किया गया।
संस्थान ने बताया कि 27 सितंबर और 4 अक्टूबर की घटनाओं के संबंध में स्थानीय पुलिस में एफआईआर भी दर्ज कराई गई है और पुलिस कानून के अनुसार कार्रवाई कर रही है।
रजिस्ट्रार के अनुसार, संस्थान परिसर में तोड़फोड़, भड़काऊ लेखन और बिना अनुमति विभिन्न स्थानों पर कब्जा करने जैसे मामलों में नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गई है। वहीं डीन काउंसिल की सिफारिश पर छह छात्रों को कथित अनुशासनहीनता के मामलों में निष्कासित किया गया है। इन पर अधिकारियों को धमकाने, अभद्र व्यवहार करने और डराने-धमकाने जैसे आरोप हैं। संस्थान का दावा है कि एक छात्र ने कुलपति के साथ शारीरिक दुर्व्यवहार भी किया था।
बयान में यह भी कहा गया कि कैंपस और आवासीय क्षेत्रों में 27 अक्टूबर को बिना अनुमति निकाले गए मशाल मार्च समेत कई घटनाओं में तोड़फोड़, धमकी और अधिकारियों को डराने की शिकायतों के बाद पुलिस की सहायता मांगी गई। संस्थान का कहना है कि ऐसी गतिविधियां छात्रों, कर्मचारियों, स्थानीय निवासियों और संस्थान की संपत्ति के लिए गंभीर जोखिम पैदा करती हैं।
संस्थान ने दोहराया कि वह छात्रों की वास्तविक शिकायतों के समाधान के लिए संवाद का पक्षधर है, लेकिन इसके साथ संस्थागत अनुशासन और आपसी जिम्मेदारी का पालन भी जरूरी है। हिंसा, धमकी, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना और शैक्षणिक गतिविधियों में बाधा उत्पन्न करना किसी भी स्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता।
वहीं कुलपति ने अपने बयान में कहा कि संस्थान के शिक्षक लगातार छात्रों से संवाद कर उनकी वास्तविक शिकायतों और चिंताओं को समझने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि बातचीत और आपसी समझ के जरिए स्थिति का जल्द समाधान निकलेगा और शैक्षणिक गतिविधियां सामान्य हो सकेंगी।
--आईएएनएस
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