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किशोरावस्था में गर्भावस्था सबसे बड़ी चिंता का विषय, रोकथाम के प्रयास जारी : पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य मंत्री मुखर्जी

कोलकाता, 17 अगस्त (आईएएनएस)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली पश्चिम बंगाल की पहली सरकार मंगलवार को सत्ता में 100 दिन पूरे करने जा रही है। इस बीच, राज्य प्रशासन में इस अवधि के दौरान नई सरकार द्वारा किए गए कार्यों को विस्तार से जनता के सामने रखने की तैयारियां जोरों पर हैं। इस बीच राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. शरदवत मुखर्जी का बयान सामने आया है।
 

कोलकाता, 17 अगस्त (आईएएनएस)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली पश्चिम बंगाल की पहली सरकार मंगलवार को सत्ता में 100 दिन पूरे करने जा रही है। इस बीच, राज्य प्रशासन में इस अवधि के दौरान नई सरकार द्वारा किए गए कार्यों को विस्तार से जनता के सामने रखने की तैयारियां जोरों पर हैं। इस बीच राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. शरदवत मुखर्जी का बयान सामने आया है।

स्वास्थ्य मंत्री मुखर्जी ने कहा कि किशोरावस्था में गर्भावस्था सबसे बड़ी चिंता का विषय है। दुर्भाग्य से बंगाल इस सूची में सबसे ऊपर है। यह एक गंभीर समस्या है। इसे रोकने के लिए हम हरसंभव प्रयास कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि कुछ प्रमुख क्षेत्र हैं, मुर्शिदाबाद उनमें से एक है। कुछ क्षेत्रों में यह समस्या एक विशेष समुदाय तक सीमित है। इसे एक दिन में रोका नहीं जा सकता, लेकिन हम हर संभव प्रयास कर रहे हैं। बाल संरक्षण नीति सहायक सिद्ध होगी।

मुखर्जी ने कहा कि हम स्थानीय सामुदायिक डॉक्टरों को लोगों से बात करने के लिए भेज रहे हैं। यह घर-घर जाकर चलाया जा रहा अभियान है। इसे जड़ से खत्म करना होगा।

वहीं, नबन्ना स्थित राज्य सचिवालय के सूत्रों ने बताया कि मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली पश्चिम बंगाल सरकार के 100 दिन पूरे होने को लेकर बताई जाने वाली उपलब्धि में राज्य के विभिन्न जिलों में पड़ोसी बांग्लादेश के साथ बिना बाड़ वाली सीमाओं पर कांटेदार बाड़ लगाने के लिए सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को भूमि सौंपने की प्रक्रिया को लगभग पूरा करना होगा।

मुख्यमंत्री के नियंत्रण वाले राज्य भूमि और भू-राजस्व विभाग द्वारा दिए गए आंकड़ों के अनुसार, नौ सीमावर्ती जिलों में बीएसएफ को 767 एकड़ से अधिक भूमि पहले ही सौंपी जा चुकी है।

जानकारी मिली है कि राज्य मंत्रिमंडल ने लगभग 362 एकड़ भूमि के हस्तांतरण को भी मंजूरी दे दी है। इसके परिणामस्वरूप, बीएसएफ को दी गई भूमि की कुल मात्रा 1,100 एकड़ से अधिक हो गई है।

इसके अतिरिक्त, सीमा सुरक्षा के लिए दार्जिलिंग, जलपाईगुड़ी और अलीपुरद्वार जिलों में सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) को 44 एकड़ से अधिक भूमि दी गई है और दार्जिलिंग में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) बटालियन मुख्यालय को 110 एकड़ भूमि दी गई है।

राज्य सचिवालय के सूत्रों ने बताया कि दूसरा प्रमुख बिंदु सेवक-रंगपो ब्रॉड गेज रेल परियोजना, पश्चिम मेदिनीपुर जिले में 100 बिस्तरों वाले ईएसआई अस्पताल और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं, सरकारी गोदामों और बिजली सबस्टेशनों के लिए छोटे भूखंडों सहित विभिन्न बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए भूमि का शीघ्र आवंटन होगा।

तीसरा प्रमुख बिंदु पहले 100 दिनों के भीतर राज्य में बंद पड़ी 16 जूट मिलों को फिर से खोलना होगा।

इसके बाद राज्य में विभिन्न परियोजनाओं के लिए रखी गई आधारशिलाओं का विवरण, उनमें किए गए निवेश का विवरण और उनसे उत्पन्न होने वाले अनुमानित रोजगार की जानकारी दी जाएगी।

--आईएएनएस

एमएस/एबीएम