खुजली से लेकर नींद की परेशानी तक, दवाओं के इन साइड इफेक्ट्स को न करें नजरअंदाज
नई दिल्ली, 6 नवंबर (आईएएनएस)। बीमारी होने पर हम अक्सर डॉक्टर की सलाह से दवाएं लेते हैं, ताकि जल्द से जल्द स्वस्थ हो सकें। दवाएं कई बीमारियों को ठीक करने और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से बचाने में अहम भूमिका निभाती हैं। लेकिन कुछ दवाओं के साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं? कई बार दवा लेने के बाद शरीर में ऐसे बदलाव दिखाई देने लगते हैं, जिन्हें हम सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।
त्वचा पर खुजली या लाल चकत्ते पड़ना, सिरदर्द, पेट खराब होना, आंखों में जलन और रात में नींद न आना भी दवाओं के संभावित साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं। इसलिए जरूरी है कि दवा लेने के बाद शरीर में होने वाले बदलावों पर ध्यान दिया जाए और किसी भी परेशानी के बारे में डॉक्टर को बताया जाए।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने 2 से 8 नवंबर 2026 तक चलने वाले मेडसेफ्टी वीक के तहत लोगों को दवाओं के साइड इफेक्ट्स पहचानने और उनकी रिपोर्ट करने के लिए जागरूक किया है। इस साल की मुहिम का मुख्य संदेश है कि दवाओं के साइड इफेक्ट्स को नजरअंदाज न करें, बल्कि उनकी जानकारी संबंधित स्वास्थ्य विशेषज्ञों को दें। इस अभियान का उद्देश्य मरीजों, उनकी देखभाल करने वालों और स्वास्थ्यकर्मियों को दवाओं से होने वाली संभावित परेशानियों के प्रति जागरूक करना है।
डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, दवाओं के साइड इफेक्ट्स हमेशा एक जैसे नहीं होते। कुछ लोगों को दवा लेने के बाद त्वचा पर खुजली, लाल चकत्ते, सिरदर्द या पेट खराब होने जैसी परेशानियां हो सकती हैं। वहीं, कुछ लोगों की नींद, मूड और रोजमर्रा की गतिविधियों पर भी इसका असर पड़ सकता है। कई बार आंखों में जलन या शरीर में ऐसी परेशानी महसूस होती है, जिसका पहले कोई अनुभव नहीं रहा हो।
हर साइड इफेक्ट दवा शुरू करने के तुरंत बाद दिखाई दे, ऐसा जरूरी नहीं है। कुछ समस्याएं दवा शुरू करने के कुछ समय बाद सामने आती हैं, जबकि कुछ लंबे समय तक दवा लेने, उसकी खुराक बदलने या एक साथ कई दवाएं लेने के कारण भी हो सकती हैं। यहां तक कि कुछ मामलों में इलाज बंद करने के बाद भी लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
किसी भी दवा को बाजार में आने से पहले कई तरह की जांच और परीक्षण से गुजरना पड़ता है। इसके बावजूद दवा के सभी संभावित साइड इफेक्ट्स का पता पहले ही चल जाए, यह जरूरी नहीं है। इसलिए दवा के इस्तेमाल के बाद भी उसकी सुरक्षा पर लगातार नजर रखना जरूरी होता है।
जब मरीज या डॉक्टर किसी दवा से होने वाली परेशानी की रिपोर्ट करते हैं, तो इन जानकारियों का वैज्ञानिक तरीके से विश्लेषण किया जाता है। इससे दवा के संभावित जोखिमों को समझने, नए साइड इफेक्ट्स की पहचान करने और जरूरत पड़ने पर मरीजों की सुरक्षा के लिए उचित कदम उठाने में मदद मिलती है।
--आईएएनएस
पीआईएम/एएस
