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खौफनाक दौर को याद करते हुए भी परमाणु हमलों के ज‍िम्‍मेदारों को नाम न लेना जापान के ल‍िए शर्म की बात: दिमित्री मेदवेदेव

नई दिल्ली, 6 अगस्त (आईएएनएस)। रूस की सुरक्षा परिषद के उपाध्यक्ष दिमित्री मेदवेदेव ने परमाणु बम हमले की बरसी के मौके पर जापान की आलोचना की। उन्होंने कहा कि आज जापान हिरोशिमा और नागासाकी पर हुए परमाणु हमले की 81वीं बरसी मना रहा है, लेकिन कितनी शर्म की बात है कि उस खौफनाक दौर को याद करते हुए भी किसी ने एक बार भी इसके पीछे के जिम्मेदारों का नाम तक नहीं लिया।
 

नई दिल्ली, 6 अगस्त (आईएएनएस)। रूस की सुरक्षा परिषद के उपाध्यक्ष दिमित्री मेदवेदेव ने परमाणु बम हमले की बरसी के मौके पर जापान की आलोचना की। उन्‍होंने कहा क‍ि आज जापान हिरोशिमा और नागासाकी पर हुए परमाणु हमले की 81वीं बरसी मना रहा है, लेक‍िन क‍ितनी शर्म की बात है क‍ि उस खौफनाक दौर को याद करते हुए भी क‍िसी ने एक बार भी इसके पीछे के ज‍िम्‍मेदारों का नाम तक नहीं ल‍िया।

रूस की सुरक्षा परिषद के उपाध्यक्ष दिमित्री मेदवेदेव ने सोशल मीड‍िया प्‍लेटफॉर्म 'एक्‍स' पोस्‍ट में ल‍िखा, ''हिरोशिमा और नागासाकी पर हुए परमाणु बम हमलों को याद करते समय जापान के प्रधानमंत्री या किसी अन्य जापानी अधिकारी ने एक बार भी यह बताने की जहमत नहीं उठाई कि ये हमले किसने किए थे। यह वाकई शर्म की बात है।''

उन्‍होंने कहा क‍ि जापान अमेरिका पर बहुत ज्‍यादा निर्भर है, और किसी समय वह एक 'रोनिन' की तरह हो जाएगा, यानी ऐसा व्यक्ति जो अपने संरक्षक या सहारे के बिना रह जाए।

81 साल पहले दूसरे विश्व युद्ध के दौरान आज ही के द‍िन जापान के शहर हिरोशिमा में अमेरिका ने परमाणु बम बरसाया था। गुरुवार को जापान ने बरसी पर उस खौफनाक दौर को याद किया गया। इसी समय, 6 अगस्त 1945 को, अमेरिकी बमवर्षक विमान से गिराया गया परमाणु बम हिरोशिमा के ऊपर फटा था। इस हमले में वर्ष 1945 के अंत तक लगभग 1.4 लाख लोगों की मौत हो गई थी।

हिरोशिमा पर हमले के तीन दिन बाद अमेरिका ने नागासाकी पर दूसरा परमाणु बम गिराया था, जिससे हजारों लोगों की जान गई और व्यापक तबाही हुई।

हिरोशिमा के पीस मेमोरियल पार्क में आयोजित वार्षिक श्रद्धांजलि समारोह में मेयर काजुमी मात्सुई ने 'पीस डिक्लेरेशन' जारी करते हुए परमाणु हथियारों के विनाशकारी परिणामों पर चिंता जताई।

उन्होंने कहा कि परमाणु हथियारों की क्रूरता को कमतर आंकना और अपने हितों के लिए बल प्रयोग को स्वीकार करना हिंसा और प्रतिशोध के ऐसे दुष्चक्र को जन्म दे सकता है, जो अंततः दुनिया को फिर किसी हिरोशिमा या नागासाकी जैसी त्रासदी की ओर धकेल सकता है।

मात्सुई ने कहा कि जैसे-जैसे परमाणु हमले के जीवित बचे लोगों (हिबाकुशा) की संख्या घट रही है, नई पीढ़ी को आगे आकर परमाणु हथियारों के पूर्ण उन्मूलन के लिए व्यापक जनसमर्थन तैयार करना होगा।

--आईएएनएस

एवाई/डीकेपी