खड़गे के बयान और प्रियंका कक्कड़ के आरोपों पर भाजपा का पलटवार, विपक्ष को बताया अवसरवादी
नई दिल्ली, 4 अक्टूबर (आईएएनएस)। भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की टिप्पणी, तिरुवनंतपुरम नगर निगम चुनावों में भाजपा की जीत और कांग्रेस में शामिल होने के बाद प्रियंका कक्कड़ द्वारा लगाए गए आरोपों पर प्रतिक्रियाएं दीं।
कांग्रेस नेता प्रियंका कक्कड़ द्वारा आम आदमी पार्टी पर लगाए गए आरोपों पर भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने कहा, "इसे ही राजनीतिक अवसरवादिता कहते हैं। कुछ समय पहले तक यही प्रियंका कक्कड़ टीवी चैनलों पर आकर अरविंद केजरीवाल की तारीफ करती थीं। अब कांग्रेस में शामिल होकर वह अरविंद केजरीवाल के खिलाफ बोल रही हैं।"
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के पीएम मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर दिए गए बयान को लेकर खंडेलवाल ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत के दौरान कहा, "मुझे लगता है कि उम्र का असर अब उनके दिमाग पर पड़ रहा है और मल्लिकार्जुन खड़गे अपना मानसिक संतुलन खो चुके हैं। जब विपक्ष का इतना वरिष्ठ नेता इस तरह की निराधार टिप्पणी करता है तो यह स्पष्ट रूप से उनकी अंतर्निहित निराशा को दर्शाता है। वे इस तरह की बातें बिना किसी आधार के कांग्रेस पार्टी के भीतर मिलने वाले अनादर से उपजे गुस्से के कारण कह रहे हैं। यह देश लोकतंत्र पर चलता है और यहां लोकतंत्र प्रभावी ढंग से कार्य कर रहा है। मल्लिकार्जुन खड़गे का बयान कांग्रेस पार्टी की वर्तमान स्थिति और दिशा दोनों को दर्शाता है।"
प्रवीण खंडेलवाल ने सुधांशु त्रिवेदी के उस बयान का समर्थन किया जिसमें उन्होंने तिरुवनंतपुरम नगर निगम चुनावों में भाजपा की जीत का जिक्र किया है। इसमें सुधांशु त्रिवेदी ने कहा है कि क्या राज्य द्वारा कराए गए नगर निगम चुनावों में भी वोट चोरी हुई है। खंडेलवाल ने कहा कि यह कोई नई बात नहीं है, सुधांशु ने जो उदाहरण दिए हैं वे ठीक हैं।
खंडेलवाल ने कहा कि जब-जब चुनाव हुए और जहां विपक्षी दल जीतते हैं, वहां ईवीएम की चोरी नहीं होती और चुनाव आयोग सही तरीके से काम करता है। जहां विपक्ष हार जाता है, वहां ईवीएम में खराबी हो जाती है और चुनाव आयोग पर सवाल खड़ा हो जाता है। यह राजनीतिक अवसरवादिता है। देश में लोकतंत्र मजबूत से काम कर रहा है। मजबूत लोकतंत्र को बिना आधार के चुनौती देने का काम विपक्ष के लोग कर रहे हैं, जिनके पास कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं बचा है।
--आईएएनएस
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