Aapka Rajasthan

केंद्रीय राज्यमंत्री सुरेश गोपी ने किया ऐतिहासिक तवांग मठ का दौरा, बोले- पूरे नॉर्थ ईस्ट को देवभूमि कहना चाहिए

तवांग, 30 अक्टूबर (आईएएनएस)। अरुणाचल प्रदेश के तवांग में आयोजित 14वें अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन मार्ट (आईटीएम) के अवसर पर केंद्रीय पर्यटन और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी और मेघालय के पर्यटन मंत्री टिमोथी डी. शिरा ने ऐतिहासिक तवांग मठ का दौरा किया। दोनों नेताओं ने मठ में पूजा-अर्चना की और बौद्ध धर्म की समृद्ध विरासत को करीब से जाना।
 

तवांग, 30 अक्टूबर (आईएएनएस)। अरुणाचल प्रदेश के तवांग में आयोजित 14वें अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन मार्ट (आईटीएम) के अवसर पर केंद्रीय पर्यटन और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी और मेघालय के पर्यटन मंत्री टिमोथी डी. शिरा ने ऐतिहासिक तवांग मठ का दौरा किया। दोनों नेताओं ने मठ में पूजा-अर्चना की और बौद्ध धर्म की समृद्ध विरासत को करीब से जाना।

इस दौरान केंद्रीय राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने नॉर्थ ईस्ट की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्ता पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर का हर दौरा एक नया अनुभव देता है।

सुरेश गोपी ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "जब भी आप नॉर्थ ईस्ट आते हैं, तो आपको एक बिल्कुल नया अनुभव मिलता है। मैं बहुत ही धार्मिक व्यक्ति हूं। मैं ईश्वर से डरता नहीं हूं, बल्कि उनसे प्रेम करता हूं।"

उन्होंने कहा, "अगर हम ईश्वर को प्रकृति के तत्वों से जोड़कर देखें, तो हमें समझना होगा कि प्रकृति ही जीवन का आधार है। वे तत्व जो हमारे और हमारी आने वाली पीढ़ियों के जीवन और विकास में सहायक हैं, उनकी रक्षा करना जरूरी है। प्रकृति मां हमारा सहारा है। लेकिन विकास के कुछ कार्य प्रकृति के मूल स्वरूप और उसकी संरचना में दखल देते हैं, जिससे उसे नुकसान पहुंचता है। प्रकृति इसका जवाब भी देती है, भूस्खलन जैसी आपदाओं के रूप में।"

सुरेश गोपी ने कहा, "यह एक ऐसी मान्यता है जो हमें विश्वास दिलाती है कि हम सुरक्षित रहेंगे। कुछ लोग इसे 'ईश्वर का डर' कहते हैं, ताकि आप कोई गलत काम न करें। लेकिन ईश्वर के करीब जाने के लिए आपको उनसे प्रेम करना होगा। तब आपके कार्य और आपके विचार, सब कुछ इसी बात पर केंद्रित हो जाएंगे कि कैसे ईश्वर के हृदय के सबसे करीब पहुंचा जाए।"

तवांग मठ का यह दौरा उनके लिए एक नया आध्यात्मिक अनुभव है। उन्होंने कहा, "किसी मठ में जाता हूं, तो मुझे एक नया अनुभव मिलता है। यह एक ऐसा आध्यात्मिक जुड़ाव है, जो सीधे आपके दिल में उतर जाता है और हर बार आपकी आत्मा को शुद्ध कर देता है। मंदिरों में जाना तो आम बात है, लेकिन ऐसे पवित्र स्थलों पर विराजमान ईश्वर आपको एक अलग आध्यात्मिक जुड़ाव देते हैं, जिससे स्वतः ही शुद्धि हो जाती है। ऐसा ही अनुभव मुझे यहां भी हुआ है।"

पूर्वोत्तर की तारीफ करते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री ने कहा कि पूरे नॉर्थ ईस्ट को 'देवभूमि' कहा जाना चाहिए, क्योंकि भगवान ने इसे बहुत आशीर्वाद दिया है। यहां के लोग बहुत अच्छे हैं। अगर आपने पहले इनके बारे में कुछ गलत बातें सुनी या पढ़ी हैं, तो एक बार नॉर्थ ईस्ट के लोगों के साथ एक-दो दिन बिताकर देखिए। आपको उन्हें जानने का नया अवसर मिलेगा और आप समझ जाएंगे कि वे कितने सच्चे और वफादार भारतीय हैं।

वहीं, मेघालय के पर्यटन मंत्री टिमोथी डी. शिरा ने तवांग मठ की भव्यता की सराहना की। उन्होंने कहा, "यह इस इलाके के सबसे बड़े मठों में से एक है, इसलिए मुझे इसे देखने में विशेष दिलचस्पी थी। मैंने लद्दाख और सिक्किम में भी कुछ मठ देखे हैं। लोगों ने बताया कि यह इस क्षेत्र के सबसे बड़े मठों में से एक है, तो मैं यहां आया। यह वाकई बहुत बढ़िया और काफी प्रभावशाली है।"

उन्होंने मठ की विशेषताओं का जिक्र करते हुए कहा, "यहां 500 से भी ज्यादा भिक्षु पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ रहते हैं। यह जगह पर्यटकों को बहुत आकर्षित करती है। जो भी लोग तवांग घूमने आते हैं, वे इस मठ के दर्शन के लिए जरूर आते हैं।"

--आईएएनएस

पीआईएम/एबीएम