केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से की मुलाकात
नई दिल्ली, 28 अक्टूबर (आईएएनएस)। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने बुधवार को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की।
राष्ट्रपति भवन की ओर से एक्स पोस्ट पर बताया गया कि केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। इस बीच, हरियाणा के परिवहन मंत्री अनिल विज ने बुधवार को बताया कि गृह मंत्री अमित शाह 5 नवंबर को अंबाला छावनी में ‘आजादी की पहली लड़ाई का शहीद स्मारक’ का उद्घाटन करेंगे। इसके बाद वह गांधी ग्राउंड में एक जनसभा को संबोधित करेंगे।
अनिल विज ने बताया कि इस शहीद स्मारक का निर्माण लगभग 800 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है। स्मारक को 6 नवंबर से आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने प्रदेश के स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों के विद्यार्थियों को स्मारक का दौरा कराने के निर्देश दिए हैं, ताकि उन्हें बताया जा सके कि 1857 में स्वतंत्रता संग्राम की शुरुआत मेरठ से पहले अंबाला में हुई थी।
विज ने लोगों से अंबाला छावनी के गांधी ग्राउंड में आयोजित होने वाली जनसभा में बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह राष्ट्रीय स्तर के शहीद स्मारक के उद्घाटन का अवसर है और इसमें शामिल होना शहीदों को सम्मान देने का महत्वपूर्ण मौका है। विज अंबाला क्लब में भाजपा पदाधिकारियों की बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक की अध्यक्षता प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अर्चना गुप्ता ने की। इसमें शहीद स्मारक के उद्घाटन कार्यक्रम की तैयारियों की समीक्षा की गई।
हरियाणा के मंत्री ने कहा कि वह पिछले 25 से 30 वर्षों से शहीद स्मारक के निर्माण के लिए प्रयास कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इतिहास की पुस्तकों में स्वतंत्रता संग्राम में कांग्रेस की भूमिका पर जोर दिया जाता रहा है, लेकिन जब उन्होंने इतिहास का अध्ययन किया तो पाया कि 1857 में कांग्रेस की स्थापना से पहले ही देशभर में सशस्त्र स्वतंत्रता संघर्ष शुरू हो चुका था और इसकी शुरुआत अंबाला में हुई थी।
विज के मुताबिक, दस्तावेजों में उल्लेख है कि 1857 में सुबह 9 बजे अंबाला छावनी में 60वीं और 5वीं नेटिव इन्फैंट्री रेजिमेंट ने स्वतंत्रता संग्राम का बिगुल बजाया था। यह मेरठ में विद्रोह शुरू होने से 10 घंटे पहले की घटना थी। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद इतिहास में उन वीरों को वह स्थान नहीं मिला, जिन्हें पेड़ों से बांधकर गोली मार दी गई या जिन पर तेल निकालने वाली घानियां चलाई गईं। उन्होंने इसे दुखद बताते हुए कहा कि 1857 के शहीद भी देश की आजादी के लिए संघर्ष करने वाले भारत माता के सपूत थे।
विज ने कहा कि स्वतंत्रता के लिए अपने घर से एक कदम भी बाहर निकलने वाले प्रत्येक व्यक्ति को श्रद्धांजलि दी जानी चाहिए, चाहे वह कांग्रेस का सदस्य रहा हो या नहीं। उन्होंने कहा कि 1857 का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम देशभर में लड़ा गया, लेकिन इस संघर्ष को दर्शाने वाला कोई स्मारक नहीं बनाया गया था। उन्होंने कई बार विधानसभा में इस स्मारक के निर्माण की मांग उठाई और इसका आधिकारिक रिकॉर्ड भी मौजूद है।
विज ने दावा किया कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में भी उन्होंने स्मारक निर्माण के लिए दबाव बनाया, लेकिन उस समय इसे नहीं बनाया गया। वर्ष 2014 में भाजपा सरकार बनने के बाद राष्ट्रीय स्तर के इस स्मारक के निर्माण को मंजूरी दी गई। उन्होंने बताया कि स्मारक में स्वतंत्रता संग्राम का पूरा इतिहास प्रदर्शित किया जाएगा। हरियाणा, बिहार, पंजाब और देश के अन्य हिस्सों में 1857 के दौरान जहां-जहां लड़ाइयां हुईं, उन स्थानों और घटनाओं को आधुनिक तकनीक के माध्यम से दिखाया जाएगा।
--आईएएनएस
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