केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में कहा- 'प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मुकदमों को लेकर अपने वादे पर गंभीर सरकार'
नई दिल्ली, 3 अगस्त (आईएएनएस)। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में स्पष्ट किया है कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को लेकर वह अपने वादे पर गंभीर है। हालांकि, कोर्ट में यह भी बताया गया कि कुछ लोग चाहते हैं कि यह मामला कभी खत्म न हो।
नीट परीक्षा लीक विरोधी प्रदर्शनों में शामिल छात्रों पर पुलिस कार्रवाई से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए। उन्होंने अदालत में कहा, "मुझे सरकार की ओर से यह कहने के निर्देश मिले हैं कि वह अपने वादे को पूरा करने के लिए गंभीर है।"
तुषार मेहता ने कहा, "मुकदमों का क्या करना है, इस बारे में गलतफहमी थी। सरकार इस पर गंभीरता से विचार कर रही है। मेरी वकील वृंदा ग्रोवर से बात हुई है। हम इस पर काम कर रहे हैं। अगर विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाले लोग सरकार से संपर्क कर सकें, तो इसका मतलब निकाला जा सकता है। हम जांच कर रहे हैं।"
वकील वृंदा ग्रोवर ने पटना में दर्ज एफआईआर का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें 152 लोगों के नाम हैं और 5,000 अज्ञात के नाम हैं। किसी को भी पकड़ा जा सकता है। हमें राज्य के साथ मिलकर एक मैकेनिज्म बनाना होगा और इसे रद्द भी किया जा सकता है।
इस पर एसजी तुषार मेहता ने कहा कि जिनका क्रिमिनल रिकॉर्ड रहा है, उन्हें छोड़कर बाकी सबका ध्यान रखा जा सकता है। यह एफआईआर छात्रों के सिर पर लटकी नहीं रह सकती।
याचिकाकर्ता के वकील हरिहरन ने सवाल उठाया कि प्रदर्शन के दौरान बड़े पैमाने पर फेशियल सर्विलांस किया गया। किसी से कोई सहमति नहीं ली गई थी। इससे प्राइवेसी के अधिकार का उल्लंघन हुआ। यह गैर-कानूनी है।
इस पर सीजेआई ने कहा कि यह गलतफहमी नहीं होनी चाहिए कि ज्यादती करने वाले पुलिस अधिकारी या प्रदर्शनकारियों के बीच आने वाले किसी आपराधिक तत्व को बख्शा जाएगा। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट 18 अगस्त को अगली सुनवाई करेगा।
--आईएएनएस
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