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कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर राष्ट्रीय मंथन, गिग वर्कर्स और डिजिटल उत्पीड़न को पॉश कानून के दायरे में लाने पर जोर

नई दिल्ली, 18 जुलाई (आईएएनएस)। राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, प्रतिषेध और प्रतितोष) अधिनियम, 2013 (पॉश एक्ट) के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन किया। 17-18 जुलाई को विज्ञान भवन में आयोजित इस कार्यक्रम में नीति निर्माताओं, न्यायपालिका, कानूनी विशेषज्ञों, उद्योग जगत, मानव संसाधन (एचआर) विशेषज्ञों, आंतरिक शिकायत समितियों (आईसी), स्थानीय समितियों (एलसी), शिक्षाविदों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
 

नई दिल्ली, 18 जुलाई (आईएएनएस)। राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, प्रतिषेध और प्रतितोष) अधिनियम, 2013 (पॉश एक्ट) के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन किया। 17-18 जुलाई को विज्ञान भवन में आयोजित इस कार्यक्रम में नीति निर्माताओं, न्यायपालिका, कानूनी विशेषज्ञों, उद्योग जगत, मानव संसाधन (एचआर) विशेषज्ञों, आंतरिक शिकायत समितियों (आईसी), स्थानीय समितियों (एलसी), शिक्षाविदों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम के पहले दिन 17 जुलाई को राष्ट्रीय जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया, जबकि 18 जुलाई को राष्ट्रीय परामर्श (नेशनल कंसल्टेशन) का आयोजन हुआ। इसका उद्देश्य पॉश अधिनियम को बदलते कार्यस्थलों और नई चुनौतियों के अनुरूप अधिक प्रभावी बनाना था।

राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने कहा कि पॉश अधिनियम केवल एक कानूनी व्यवस्था नहीं, बल्कि कामकाजी महिलाओं को यह भरोसा दिलाने वाला कानून है कि उनकी गरिमा, अधिकार और आकांक्षाओं की रक्षा की जाएगी।

उन्होंने कहा कि आज कार्यस्थलों की प्रकृति तेजी से बदल रही है। हाइब्रिड वर्क मॉडल, वर्क फ्रॉम होम, डिजिटल संचार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते उपयोग को देखते हुए संस्थागत व्यवस्था, कार्यालयी नीतियों और कानूनी ढांचे को भी समय के साथ विकसित करना होगा। उन्होंने कहा कि जागरूकता, रोकथाम और संस्थागत संवेदनशीलता ही सुरक्षित कार्यस्थल की सबसे मजबूत नींव हैं।

राष्ट्रीय परामर्श के दौरान कई उभरते हुए मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। इनमें गिग वर्कर्स, प्लेटफॉर्म वर्कर्स, घर से काम करने वाले कर्मचारियों और संविदा कर्मियों को पॉश कानून के तहत अधिक प्रभावी सुरक्षा देने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

इसके अलावा ई-मेल, प्रोफेशनल मैसेजिंग प्लेटफॉर्म, वर्चुअल मीटिंग, सोशल मीडिया और एआई से तैयार की गई आपत्तिजनक सामग्री के माध्यम से होने वाले यौन उत्पीड़न से निपटने के लिए कानून और संस्थागत व्यवस्था को मजबूत बनाने पर भी विचार किया गया।

बैठक में आंतरिक शिकायत समितियों (आईसी) की स्वतंत्रता और प्रभावशीलता बढ़ाने, बाहरी सदस्यों की भूमिका और वित्तीय सहयोग, को-वर्किंग स्पेस, स्पोर्ट्स अकादमी, आवासीय सोसायटी और साझा कार्यालयों में पॉश कानून के बेहतर क्रियान्वयन पर भी विस्तृत चर्चा हुई।

इसके साथ ही जवाबदेही, निगरानी व्यवस्था, शिकायतों के समयबद्ध निस्तारण और बदलते कार्यस्थलों के अनुरूप कानून में आवश्यक सुधारों पर भी सुझाव दिए गए।

कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी और राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर मौजूद रहीं।

इस दौरान आयोग ने "पॉश एक्ट के तहत आंतरिक समितियों (आईसी) और स्थानीय समितियों (एलसी) के लिए जांच प्रक्रिया" विषय पर एक विस्तृत हैंडबुक भी जारी की। इसका उद्देश्य कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की शिकायतों की निष्पक्ष, पारदर्शी, समयबद्ध और कानूनी रूप से सही जांच सुनिश्चित करने के लिए व्यावहारिक मार्गदर्शन उपलब्ध कराना है।

राष्ट्रीय महिला आयोग ने बताया कि इस राष्ट्रीय परामर्श, देशभर में आयोजित क्षेत्रीय बैठकों और विभिन्न हितधारकों से प्राप्त सुझावों को एक व्यापक सिफारिश रिपोर्ट के रूप में तैयार किया जाएगा। यह रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपी जाएगी, ताकि पॉश अधिनियम और उससे जुड़े नियमों के क्रियान्वयन को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके तथा देशभर में महिलाओं के लिए सुरक्षित, सम्मानजनक और समावेशी कार्यस्थल सुनिश्चित किए जा सकें।

--आईएएनएस

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