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कर्नाटक: हाई कोर्ट ने बिदादी टाउनशिप के लिए जमीन अधिग्रहण को चुनौती देने वाली पीआईएल खारिज की

बेंगलुरु, 20 जुलाई (आईएएनएस)। कर्नाटक हाईकोर्ट ने बिदादी टाउनशिप परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण को चुनौती देने वाली पीआईएल खारिज कर दी है। कांग्रेस सरकार और मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार को बड़ी राहत मिली है।
 

बेंगलुरु, 20 जुलाई (आईएएनएस)। कर्नाटक हाईकोर्ट ने बिदादी टाउनशिप परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण को चुनौती देने वाली पीआईएल खारिज कर दी है। कांग्रेस सरकार और मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार को बड़ी राहत मिली है।

कर्नाटक हाई कोर्ट ने बिदादी में 'ग्रेटर बेंगलुरु इंटीग्रेटेड टाउनशिप प्रोजेक्ट' के लिए 516 एकड़ कृषि भूमि के अधिग्रहण को चुनौती देने वाली एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई की। केबी राजेश की ओर से दायर इस याचिका पर चीफ जस्टिस विभु बखरू और जस्टिस केएस हेमलेखा की डिवीजन बेंच में सुनवाई हुई।

सुनवाई के दौरान, बेंच ने कहा कि अधिग्रहण की प्रक्रिया अलग हो सकती है और बेहतर मुआवजा देने के लिए किसी खास कानून का इस्तेमाल किया गया हो सकता है। बेंच ने गौर किया कि राज्य का दावा था कि मुआवजा 2013 के भूमि अधिग्रहण अधिनियम के प्रावधानों के तहत दिया जा रहा था और याचिकाकर्ता से कानून के किसी खास उल्लंघन के बारे में बताने को कहा।

खुद पेश होते हुए, राजेश ने तर्क दिया कि सरकार रियल एस्टेट डेवलपमेंट के लिए 9,400 एकड़ से ज्यादा जमीन का इस्तेमाल कर रही है, जबकि किसान खेती करना चाहते हैं। उन्होंने आगे कहा कि किसान लगभग 500 दिनों से इस प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे हैं और तर्क दिया कि प्रोजेक्ट के लिए कम से कम 80 प्रतिशत जमीन मालिकों की सहमति जरूरी है।

बेंच ने दोहराया कि वह प्रोजेक्ट के गुण-दोष की जांच नहीं करेगी और याचिकाकर्ता को अधिग्रहण प्रक्रिया में किसी कानूनी खामी की पहचान करने का निर्देश दिया। जब याचिकाकर्ता ने 2028 के बाद सरकार में संभावित बदलाव का जिक्र करना शुरू किया, तो कोर्ट ने उन्हें रोकते हुए कहा कि यह राजनीतिक चर्चा का मंच नहीं है और उनसे फिर से किसी कानूनी उल्लंघन को साबित करने को कहा।

इसके बाद हाई कोर्ट ने बिदादी इंटीग्रेटेड टाउनशिप प्रोजेक्ट के लिए जारी भूमि अधिग्रहण नोटिफिकेशन को चुनौती देने वाली पीआईएल खारिज कर दी।

बता दें कि 15 जुलाई को कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने प्रस्तावित बिदादी टाउनशिप परियोजना (बीटीपी) को लेकर स्पष्ट किया था कि किसानों की जमीन किसी भी हालत में जबरन अधिग्रहित नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा था कि सरकार अगले दो से तीन महीनों में परियोजना के कानूनी और अन्य पहलुओं की समीक्षा के लिए एक विशेषज्ञ समिति गठित करेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा था कि बिदादी टाउनशिप उनका "ड्रीम प्रोजेक्ट" नहीं है और न ही इसकी शुरुआत उन्होंने की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक विरोधी किसानों को गुमराह कर रहे हैं और उनके खिलाफ साजिश रच रहे हैं। उन्होंने कहा था, "मैं किसी जल्दबाजी में नहीं हूं। यह फैसला किसानों पर छोड़ता हूं। किसानों और मेरे बीच भरोसे का रिश्ता है। समिति किसानों की आपत्तियां सुनेगी, कानूनी पहलुओं की जांच करेगी और उसकी रिपोर्ट आने के बाद ही सरकार आगे का फैसला करेगी।"

--आईएएनएस

एसडी/पीएम