कर्णम मल्लेश्वरी: ओलंपिक में भारत के लिए पदक जीतने वाली पहली महिला एथलीट
नई दिल्ली, 31 मई (आईएएनएस)। कर्णम मल्लेश्वरी भारत की प्रसिद्ध भारोत्तोलक रही हैं। अपनी प्रतिभा और क्षमता का दमदार प्रदर्शन करते हुए अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश के लिए पदक जीते हैं। वह ओलंपिक में देश के लिए पदक जीतने वाली पहली महिला एथलीट हैं।
कर्णम मल्लेश्वरी का जन्म 1 जून 1975 को वूसवानीपेटा, जिला-श्रीकाकुलम, आंध्र प्रदेश में हुआ था। मल्लेश्वरी ने अपने करियर की शुरुआत 12 साल की उम्र में की थी। उनका प्रशिक्षण नीलमशेट्टी अप्पन्ना के मार्गदर्शन में शुरू हुआ था। बेहतर प्रशिक्षण के लिए मल्लेश्वरी कुछ समय बाद दिल्ली आ गई थीं। दिल्ली आने के बाद वह भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के संपर्क में आईं। 1990 में वह राष्ट्रीय शिविर में शामिल हुईं और यहीं से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी सफलता का दौर शुरू हुआ।
मल्लेश्वरी की उपलब्धियों पर गौर करें तो विश्व चैंपियनशिप 1994 और 1995 में 54 किग्रा में उन्होंने स्वर्ण पदक और 1993 औप 1996 में हुए विश्व चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता था। 1994 और 1998 में हुए एशियन गेम्स में मल्लेश्वरी ने रजत पदक जीता था। उन्हें सबसे बड़ी और ऐतिहासिक सफलता 2000 में सिडनी ओलंपिक में मिली। 69 किग्रा भार वर्ग में उन्होंने कांस्य पदक जीता था। इस पदक के साथ ओलंपिक में पदक जीतने वाली वह पहली भारतीय महिला एथलीट बनीं, साथ भारत के लिए भारोत्तोलन में पदक जीतने वाली पहली (महिला या पुरुष) एथलीट बनीं।
2004 के ओलंपिक में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद उन्होंने संन्यास ले लिया था।
कर्णम मल्लेश्वरी को भारोत्तोलन में उनके यादगार योगदान के लिए 1994 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उन्हें 1999 में पद्मश्री पुरस्कार और 1999 में ही खेल रत्न पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था। जून 2021 में, उन्हें दिल्ली सरकार द्वारा स्थापित खेल विश्वविद्यालय का कुलपति नियुक्त किया गया था।
मल्लेश्वरी का कठिन परिश्रम और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मिली सफलता खेल के क्षेत्र में करियर बनाने का सपना देख रहे खिलाड़ियों, खासकर महिलाओं के लिए प्रेरणा है।
--आईएएनएस
पीएके
