कलकत्ता हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग के तबादलों को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की
कोलकाता, 31 मार्च (आईएएनएस)। आईएएस व आईपीएस अधिकारियों के तबादलों के संबंध में चुनाव आयोग के निर्देश को चुनौती देने वाली कल्याण बनर्जी द्वारा द्वारा दायर जनहित याचिका (पीआईएल) खारिज कर दी गई है। साथ ही, मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने ओसीसी और आईसी के तबादलों से संबंधित याचिका को भी खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों के तबादलों के संबंध में चुनाव आयोग की शक्ति पर कोई विवाद नहीं है।
दरअसल, चुनाव आयोग ने 294 सदस्यीय पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के कार्यक्रम की घोषणा के तुरंत बाद राज्य के मुख्य सचिव, गृह सचिव और डीजीपी सहित कई महत्वपूर्ण अधिकारियों के स्थानांतरण का आदेश दिया था। याचिकाकर्ता ने इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। याचिका में इन तबादलों को रद्द करने की मांग करते हुए तर्क दिया गया कि इतने बड़े स्तर पर अधिकारियों को हटाना राज्य के सुचारू शासन व्यवस्था के लिए नुकसानदेह है।
याचिकाकर्ता का तर्क था कि भले ही आदर्श आचार संहिता लागू होने के बाद चुनाव आयोग के पास कुछ शक्तियां होती हैं लेकिन प्रदेश की शीर्ष नौकरशाही और पुलिस नेतृत्व को अचानक हटाना अनुचित था। इन कदमों से राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था पर बुरा असर पड़ सकता है।
वहीं, चुनाव आयोग का तर्क था कि स्वतंत्र व निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने और प्रशासनिक मशीनरी की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए ही ऐसे तबादले किए जाते हैं। मामले की सुनवाई के बाद मुख्य न्यायाधीश सुजय पॉल की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने याचिका में कोई ठोस आधार नहीं पाया। याचिका खारिज करते हुए कोर्ट ने स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव संपन्न कराने के चुनाव आयोग के संवैधानिक जनादेश को मान्यता दी। कोर्ट ने माना कि संभावित पक्षपात या प्रभाव को रोकने के लिए अधिकारियों के तबादले का अधिकार आयोग के पास है।
सूत्रों के मुताबिक, टीएमसी सांसद और अधिवक्ता कल्याण बनर्जी अब कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने के लिए सर्वोच्च न्यायालय का रुख कर सकते हैं।
--आईएएनएस
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