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कैसे हुई फ्रेंडशिप डे की शुरुआत? जानिए इसके पीछे का दिलचस्प इतिहास

नई दिल्ली, 1 अगस्त (आईएएनएस)। जिंदगी में अगर एक सच्चा दोस्त मिल जाए, तो जैसे सब कुछ आसान हो जाता है। वह आपकी खुशी में सबसे ज्यादा खुश होता है और मुश्किल समय में बिना किसी स्वार्थ के आपके साथ खड़ा रहता है। इसी खूबसूरत रिश्ते का जश्न मनाने के लिए हर साल फ्रेंडशिप डे मनाया जाता है। इस खास दिन की शुरुआत और भारत में इसे अगस्त के पहले रविवार को मनाए जाने के पीछे भी एक दिलचस्प कहानी है।
 

नई दिल्ली, 1 अगस्त (आईएएनएस)। जिंदगी में अगर एक सच्चा दोस्त मिल जाए, तो जैसे सब कुछ आसान हो जाता है। वह आपकी खुशी में सबसे ज्यादा खुश होता है और मुश्किल समय में बिना किसी स्वार्थ के आपके साथ खड़ा रहता है। इसी खूबसूरत रिश्ते का जश्न मनाने के लिए हर साल फ्रेंडशिप डे मनाया जाता है। इस खास दिन की शुरुआत और भारत में इसे अगस्त के पहले रविवार को मनाए जाने के पीछे भी एक दिलचस्प कहानी है।

फ्रेंडशिप डे की शुरुआत का विचार सबसे पहले साल 1930 में अमेरिका में सामने आया। ग्रीटिंग कार्ड बनाने वाली मशहूर कंपनी हॉलमार्क के संस्थापक जॉयस हॉल ने सुझाव दिया कि दोस्तों के नाम भी एक खास दिन होना चाहिए। उनका मानना था कि इस दिन लोग अपने दोस्तों को ग्रीटिंग कार्ड, शुभकामनाएं और छोटे-छोटे उपहार देकर अपने रिश्ते को और मजबूत बना सकते हैं। हालांकि उस समय यह विचार ज्यादा लोकप्रिय नहीं हो पाया और धीरे-धीरे लोगों की नजरों से ओझल हो गया।

इसके बाद साल 1958 में दक्षिण अमेरिकी देश पराग्वे में इस सोच को नई दिशा मिली। डॉक्टर रेमन आर्टेमियो ब्राचो अपने दोस्तों के साथ भोजन कर रहे थे। बातचीत के दौरान उन्होंने एक ऐसा दिन मनाने का विचार रखा, जो केवल दोस्तों के लिए हो और दुनिया में भाईचारे, प्रेम और शांति का संदेश दे। इसी विचार से वर्ल्ड फ्रेंडशिप क्रूसेड नामक संस्था की शुरुआत हुई। इस संगठन ने दोस्ती को पूरी दुनिया में बढ़ावा देने का अभियान शुरू किया और 30 जुलाई को फ्रेंडशिप डे के रूप में मनाने की परंपरा शुरू हुई।

दोस्ती के इसी महत्व को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र महासभा ने साल 2011 में आधिकारिक तौर पर 30 जुलाई को इंटरनेशनल फ्रेंडशिप डे घोषित किया। इसका उद्देश्य सिर्फ दोस्तों का जश्न मनाना नहीं था, बल्कि अलग-अलग देशों, संस्कृतियों और समुदायों के बीच शांति, सहयोग और आपसी समझ को बढ़ावा देना भी था।

हालांकि, भारत समेत कुछ देशों में यह अगस्त के पहले रविवार को मनाया जाता है। इसके पीछे कोई खास कारण नहीं है, लेकिन रविवार को ज्यादातर लोगों की छुट्टी होती है, ऐसे में भारत में लोग इसे अगस्त के पहले रविवार को मनाने लगे। इसमें किसी सरकारी आदेश की भूमिका नहीं थी, बल्कि फिल्मों, टीवी, ग्रीटिंग कार्ड कंपनियों और बाद में सोशल मीडिया ने इसे लोगों के बीच इतना लोकप्रिय बना दिया कि यही तारीख चलन में आ गई। इसलिए आज भी भारत में अधिकतर लोग अगस्त के पहले रविवार को ही फ्रेंडशिप डे मनाते हैं।

आज के दौर में फ्रेंडशिप डे खासकर युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय है। स्कूल, कॉलेज और ऑफिस में दोस्त एक-दूसरे को रंग-बिरंगे फ्रेंडशिप बैंड बांधते हैं, चॉकलेट, गिफ्ट और ग्रीटिंग कार्ड देते हैं। सोशल मीडिया पर लोग अपने सबसे अच्छे दोस्तों के साथ तस्वीरें और वीडियो शेयर कर उन्हें खास महसूस कराते हैं। कई लोग इस दिन पुराने दोस्तों से दोबारा संपर्क भी करते हैं और बीते खूबसूरत पलों को याद करते हैं।

--आईएएनएस

पीआईएम/एएस