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कैसा रहा माइक्रोग्रैविटी में बाल कटवाने का अनुभव? शुभांशु शुक्ला ने बताया स्पेस का रोचक किस्सा

नई दिल्ली, 23 मई (आईएएनएस)। भारतीय वायुसेना के पायलट और गगनयान मिशन के लिए चुने गए चार भारतीयों में शामिल रहे ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) की यात्रा करने वाले पहले भारतीय ग्रुप कैप्टन भी हैं। वह स्पेस से जुड़े अनोखे अनुभवों को अक्सर साझा करते रहते हैं। इंस्टाग्राम पर एक दिलचस्प पोस्ट किया है, जिसमें वह स्पेस में माइक्रोग्रैविटी (शून्य गुरुत्वाकर्षण) में बाल कटवाने का अपना रोचक अनुभव बताते नजर आए।
 
कैसा रहा माइक्रोग्रैविटी में बाल कटवाने का अनुभव? शुभांशु शुक्ला ने बताया स्पेस का रोचक किस्सा

नई दिल्ली, 23 मई (आईएएनएस)। भारतीय वायुसेना के पायलट और गगनयान मिशन के लिए चुने गए चार भारतीयों में शामिल रहे ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) की यात्रा करने वाले पहले भारतीय ग्रुप कैप्टन भी हैं। वह स्पेस से जुड़े अनोखे अनुभवों को अक्सर साझा करते रहते हैं। इंस्टाग्राम पर एक दिलचस्प पोस्ट किया है, जिसमें वह स्पेस में माइक्रोग्रैविटी (शून्य गुरुत्वाकर्षण) में बाल कटवाने का अपना रोचक अनुभव बताते नजर आए।

साल 2025 में 18 दिन के सफल मिशन के बाद भारत लौट चुके शुभांशु भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी (इसरो) के मानव मिशन के प्रमुख चेहरों में से एक हैं। उन्होंने बताया कि स्पेस स्टेशन पर बाल कटवाना एक रोचक लेकिन चुनौतीपूर्ण अनुभव था। शुभांशु ने बताया कि क्वारंटाइन में जाने से पहले उन्होंने पृथ्वी पर बाल कटवा लिए थे। उनका मानना था कि 14 दिन के क्वारंटाइन और 14 दिन के मिशन के दौरान बाल ठीक रहेंगे, लेकिन मिशन की अवधि बढ़ गई। फिर 28 दिन की योजना 32 दिन के क्वारंटाइन में बदल गई और उसके बाद स्पेस में भी 18 दिन का समय और लग गया। आखिरकार बाल इतने बढ़ गए कि हेयरकट जरूरी हो गया।

स्पेस में हेयरकट कैसे हुआ? इसकी जानकारी देते हुए शुभांशु शुक्ला ने बताया कि अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा की एस्ट्रोनॉट निकोल एयर्स, जिन्हें वेपर के नाम से जाना जाता है ने उनकी मदद की। निकोल एक अनुभवी फाइटर पायलट, वॉलीबॉल प्लेयर और अब एक बेहतरीन स्पेस बार्बर भी साबित हुईं। उन्होंने बेहद आत्मविश्वास के साथ बाल काटने का काम संभाला।

उन्होंने बताया कि माइक्रोग्रैविटी में बाल काटना आसान नहीं होता क्योंकि कटे हुए बाल हवा में तैरने लगते हैं। इसलिए खास तरह के क्लिपर इस्तेमाल किए जाते हैं, जिनमें वैक्यूम सिस्टम लगा होता है जो बालों को तुरंत अंदर खींच लेता है। शुभांशु ने खुद असिस्टेंट का रोल निभाया और वैक्यूम चलाकर हर कटे बाल को पकड़ लिया। उन्होंने इसे इंटरनेशनल टीम वर्क का बेहतरीन उदाहरण भी बताया।

शुभांशु शुक्ला ने बताया कि यह अनुभव न सिर्फ रोचक है बल्कि अंतरिक्ष में रोजमर्रा की जिंदगी कितनी अलग और चुनौतीपूर्ण होती है, यह भी दिखाता है। इसका नतीजा भी काफी अच्छा निकला। 400 किलोमीटर ऊपर पृथ्वी की कक्षा में तैरते हुए एक परफेक्ट हेयरकट हो गया। उन्होंने इसे अपने बकेट लिस्ट का ऐसा आइटम बताया जिसके बारे में उन्हें पहले कभी पता नहीं था।

--आईएएनएस

एमटी/डीकेपी