कभी किसी को अपने सपनों की सीमा तय करने की अनुमति न दें: उपराष्ट्रपति
इटानगर, 9 सितंबर (आईएएनएस)। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने बुधवार को इटानगर के चिंपू स्थित डोनी-पोलो मिशन स्कूल का दौरा किया और विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों से बातचीत की। उन्होंने संस्थान के विभिन्न गतिविधि क्षेत्रों का भ्रमण किया और विद्यार्थियों को संबोधित किया।
इस अवसर पर बोलते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि संस्थान के उनके दौरे ने उन्हें गहन भावना और देशभक्ति से भर दिया, विशेष रूप से छात्रों द्वारा वंदे मातरम गाते हुए सुनने के बाद। उन्होंने कहा कि गीत को इतनी निष्ठा से गाया गया था कि वे छात्रों के दिल से निकली देशभक्ति को महसूस कर सकते थे।
अरुणाचल प्रदेश सरकार, डोनी-पोलो मिशन, प्रबंधन, शिक्षकों, पुनर्वास पेशेवरों और कर्मचारियों की सराहना करते हुए सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि मुख्यमंत्री पेमा खांडू के नेतृत्व में राज्य सरकार की उपलब्धियां समाज के हर वर्ग को कवर करती हैं।
छात्रों को संबोधित करते हुए सीपी राधाकृष्णन ने उनसे आग्रह किया कि वे कभी भी किसी को अपने सपनों की सीमा तय न करने दें। उन्होंने कहा, "प्रत्येक व्यक्ति अद्वितीय है। प्रत्येक व्यक्ति में प्रतिभा होती है," और उन्हें बड़े सपने देखने, खुद पर विश्वास करने और कड़ी मेहनत करने के लिए प्रोत्साहित किया। श्रीकांत बोला की प्रेरणादायक यात्रा का जिक्र करते हुए उन्होंने छात्रों से उन लोगों से प्रेरणा लेने का आग्रह किया जिन्होंने चुनौतियों पर विजय प्राप्त की है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि डोनी-पोलो मिशन स्कूल जैसे संस्थान न केवल शिक्षा प्रदान करते हैं, बल्कि आशा, सम्मान, अवसर, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता भी प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे संस्थान 2047 तक समावेशी विकसित भारत के निर्माण में सार्थक योगदान देते हैं।
प्रौद्योगिकी की परिवर्तनकारी क्षमता पर जोर देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल उपकरण और सहायक प्रौद्योगिकियां बाधाओं को दूर करने और शिक्षा को अधिक सुलभ और व्यक्तिगत बनाने में मदद कर सकती हैं। उन्होंने मिशन द्वारा एआई-सक्षम शिक्षण सामग्री और छात्रों के लिए समग्र समर्थन की दिशा में की गई पहलों की सराहना की।
उपराष्ट्रपति ने विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के पालन-पोषण में असाधारण धैर्य, करुणा और प्रतिबद्धता के लिए शिक्षकों और कर्मचारियों की भी प्रशंसा की। उन्होंने अपने बच्चों को समर्थन और प्रोत्साहन देने में माता-पिता द्वारा निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका को स्वीकार किया।
सीपी राधाकृष्णन ने अपने संबोधन का समापन करते हुए कहा, "आज आपने मुझे बहुत कुछ सिखाया है," छात्रों से मिली प्रेरणा और उनके दृढ़ संकल्प के लिए अपनी प्रशंसा व्यक्त करते हुए।
उपराष्ट्रपति के साथ अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) कैवल्य त्रिविक्रम परनाइक, मुख्यमंत्री पेमा खांडू, उप मुख्यमंत्री चोवना मीन, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता एवं जनजातीय मामलों के मंत्री कोंटो जिनी, राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, डोनी-पोलो मिशन और उसके प्रबंधन के प्रतिनिधि, शिक्षक, पुनर्वास पेशेवर, संस्था के कर्मचारी और छात्र भी उपस्थित थे।
उपराष्ट्रपति ने इटानगर स्थित जेएन राज्य संग्रहालय का दौरा किया और अरुणाचल प्रदेश और उत्तर-पूर्वी भारत की समृद्ध जातीय विरासत के संरक्षण और प्रदर्शन में इसकी भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे संस्थान पीढ़ियों के बीच महत्वपूर्ण सेतु का काम करते हैं और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा तथा स्वदेशी परंपराओं के प्रति गौरव को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने अरुणाचल प्रदेश की अमूल्य विरासत के संरक्षण और प्रचार-प्रसार में संग्रहालय से जुड़े सभी लोगों के समर्पित प्रयासों की प्रशंसा की।
--आईएएनएस
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