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कभी दो वक्त की रोटी के लिए करती थीं जद्दोजहद, आज दूसरी महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रहीं बनासकांठा की गीताबेन

बनासकांठा, 11 अक्टूबर (आईएएनएस)। सरकार की विभिन्न योजनाएं आज महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। ऐसी ही एक मिसाल देखने को मिली है बनासकांठा के डीसा में, जहां कभी दो वक्त के खाने के लिए भी संघर्ष करने वाली गीता बेन माली आज अपना खुद का व्यवसाय चला रही हैं और दूसरी महिलाओं को भी रोजगार के अवसर दे रही हैं।
 

बनासकांठा, 11 अक्टूबर (आईएएनएस)। सरकार की विभिन्न योजनाएं आज महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। ऐसी ही एक मिसाल देखने को मिली है बनासकांठा के डीसा में, जहां कभी दो वक्त के खाने के लिए भी संघर्ष करने वाली गीता बेन माली आज अपना खुद का व्यवसाय चला रही हैं और दूसरी महिलाओं को भी रोजगार के अवसर दे रही हैं।

सखी मंडल के माध्यम से मिले एक लाख रुपए के ऋण ने गीता बेन की जिंदगी बदल दी। उन्होंने इस राशि से कंप्यूटर खरीदा और ऑनलाइन काम के साथ सीएससी सेंटर शुरू किया। आज वह अपने पैरों पर खड़ी हैं और सम्मान के साथ अपना जीवन-निर्वाह कर रही हैं।

डीसा में रहने वाली गीता बेन माली के लिए एक समय ऐसा था, जब परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब थी। दो वक्त का खाना मिलना भी मुश्किल था और आर्थिक परेशानियों के बीच जीवन गुजारना पड़ रहा था, लेकिन सरकार की योजनाओं ने गीता बेन की जिंदगी को नई दिशा दी। सखी मंडल के माध्यम से उन्हें एक लाख रुपए का ऋण मिला। इस राशि का उपयोग करते हुए उन्होंने कंप्यूटर खरीदा और ऑनलाइन बिजनेस शुरू किया।

इसके बाद गीता बेन ने सीएससी सेंटर भी शुरू किया। आज इसी काम के जरिए वह आत्मनिर्भर बनी हैं और अपने परिवार का बेहतर तरीके से पालन-पोषण कर रही हैं। खास बात यह है कि गीता बेन अब सिर्फ खुद ही आत्मनिर्भर नहीं बनीं, बल्कि अपने काम के जरिए दूसरी महिलाओं को भी योजनाओं और सेवाओं का लाभ दिलाने में मदद कर रही हैं।

बनासकांठा (गुजरात) की रहने वाली लाभार्थी गीताबेन माली ने अपनी सफलता की कहानी साझा करते हुए कहा कि पहले उनकी आर्थिक स्थिति बेहद खराब थी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की योजनाओं से उन्हें सहारा मिला और सखी मंडल से जुड़ने का अवसर प्राप्त हुआ।

गीताबेन ने बताया, "मैं 10 महिलाओं के साथ सखी मंडल चलाती हूं। इस समूह से मुझे अच्छी आमदनी हुई और मैं आत्मनिर्भर बनी। अपनी कमाई से मैंने कंप्यूटर सहित अन्य जरूरी संसाधन जुटाए और सीएससी सेंटर शुरू किया। साथ ही हॉर्स ऑनलाइन का काम भी कर रही हूं।"

उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर बनने के बाद उन्होंने कई अन्य महिलाओं को भी सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाया है, जिनमें विधवा सहायता योजना भी शामिल है, जिससे कई महिलाएं अपने पैरों पर खड़ी हो सकी हैं।

प्रधानमंत्री मोदी का आभार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा, "मोदी है तो मुमकिन है। हम खुद भी योजनाओं का लाभ ले रहे हैं और दूसरों को भी दिला रहे हैं।"

उन्होंने कहा कि पहले उनकी आर्थिक स्थिति बेहद खराब थी, कई बार दो वक्त का खाना भी नसीब नहीं होता था। योजना से जुड़ने के बाद उनकी जिंदगी बदल गई।

उन्होंने बताया, "सखी मंडल से जुड़ने के बाद मुझे बिना ब्याज के लोन मिला। उस पैसे से मैंने अपना काम शुरू किया और आज मुझे अच्छी आमदनी हो रही है। अब मेरा घर अच्छे से चल रहा है और मुझे घर के खर्च के लिए किसी से पैसे लेने की जरूरत नहीं पड़ती। मैं अपना खर्च खुद उठा रही हूं।"

उन्होंने कहा कि अब वह खुद आत्मनिर्भर बनने के साथ-साथ दूसरी महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बना रही हैं और उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ दिला रही हैं।

गीताबेन ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने महिलाओं के लिए बहुत अच्छा काम किया है। उनकी वजह से आज कोई भी बहन-बेटी ऐसी नहीं है जो आत्मनिर्भर न हो, सभी अपने पैरों पर खड़ी हो रही हैं।

उन्होंने बताया कि मोदी सरकार ने महिलाओं के लिए कई योजनाओं का लाभ दिया है, जिसमें विधवा सहायता योजना और पीएम विश्वकर्मा योजना शामिल है। पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत एक लाख रुपये तक का लोन दिया जाता है, जिससे कई महिलाएं आत्मनिर्भर बनी हैं और उन्हें घर में किसी से पैसे लेने की जरूरत नहीं पड़ती। गीताबेन ने कहा, "हम पीएम मोदी का दिल से धन्यवाद करते हैं, वो हमारे परिवार का हिस्सा हैं।"

--आईएएनएस

केके/वीसी