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‘कबड्डी-कबड्डी’: एशियन बीच गेम्स में कबड्डी का नया अध्याय

बीजिंग, 25 अप्रैल (आईएएनएस)। सान्या के सुनहरे तटों पर खेल भावना, संघर्ष और सपनों की एक जीवंत कहानी आकार ले रही है। छठवें एशियन बीच गेम्स के दौरान भारतीय पुरुष और महिला कबड्डी टीमों के साथ हुई मेरी बातचीत केवल एक इंटरव्यू नहीं, बल्कि उन भावनाओं की यात्रा थी जो हर खिलाड़ी अपने भीतर लिए मैदान में उतरता है। यह एक ऐसा अनुभव बन गई, जिसमें खेल के साथ-साथ संस्कृति, संवाद और अंतरराष्ट्रीय दोस्ती की झलक भी साफ दिखाई दी।
 
‘कबड्डी-कबड्डी’: एशियन बीच गेम्स में कबड्डी का नया अध्याय

बीजिंग, 25 अप्रैल (आईएएनएस)। सान्या के सुनहरे तटों पर खेल भावना, संघर्ष और सपनों की एक जीवंत कहानी आकार ले रही है। छठवें एशियन बीच गेम्स के दौरान भारतीय पुरुष और महिला कबड्डी टीमों के साथ हुई मेरी बातचीत केवल एक इंटरव्यू नहीं, बल्कि उन भावनाओं की यात्रा थी जो हर खिलाड़ी अपने भीतर लिए मैदान में उतरता है। यह एक ऐसा अनुभव बन गई, जिसमें खेल के साथ-साथ संस्कृति, संवाद और अंतरराष्ट्रीय दोस्ती की झलक भी साफ दिखाई दी।

भारतीय पुरुष टीम के कोच राकेश कुमार ने बताया कि बीच कबड्डी पारंपरिक कबड्डी से अलग है—यहां जमीन नहीं, बल्कि रेत पर संतुलन, ताकत और रणनीति का खेल होता है।

खिलाड़ी जितेंद्र यादव ने बताया कि रेत पर खेलना जितना रोमांचक है, उतना ही चुनौतीपूर्ण भी। हर कदम धंसता है, हर दौड़ में अतिरिक्त ताकत लगती है, और हर रेड में संतुलन बनाए रखना एक कला बन जाती है।

भारतीय पुरुष टीम के एक अन्य खिलाड़ी भानु प्रताप तोमर ने बताया कि सान्या के समुद्री तट पर खेलना उनके लिए एक नया अनुभव है। लहरों की आवाज़, हल्की नमी और नरम रेत- ये सब मिलकर खेल को और चुनौतीपूर्ण बना देते हैं।

टीम के रेडर यथार्थ देशवाल ने कहा कि “यहां सिर्फ ताकत नहीं, दिमाग और धैर्य भी उतना ही जरूरी है। रेत पर हर सेकंड आपको परखता है।”पुरुष टीम में अनुभव और युवा जोश का संतुलन साफ दिखा।

खिलाड़ी ब्रिजेंद्र चौधरी ने अपने पिछले अंतरराष्ट्रीय अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि एशियन स्तर पर प्रतिस्पर्धा अब पहले से कहीं ज्यादा कड़ी हो चुकी है। ईरान, पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसी टीमें लगातार मजबूत हो रही हैं, लेकिन भारतीय टीम का आत्मविश्वास भी उतना ही मजबूत है।

कोच ने कहा, “हमने तैयारी में कोई कसर नहीं छोड़ी है। खिलाड़ियों की फिटनेस, रणनीति और मानसिक मजबूती तीनों पर बराबर ध्यान दिया गया है।” खिलाड़ी नीरज नरवाल ने मुस्कुराते हुए कहा, “यहां हर कदम धंसता है, लेकिन यही हमें और मजबूत बनाता है। सान्या का माहौल हमें ऊर्जा देता है।”

यहां का सुव्यवस्थित आयोजन और खिलाड़ियों के लिए की गई सुविधाएं उनके प्रदर्शन को बेहतर बनाने में मदद कर रही हैं।

खिलाड़ी जय भगवान ने सान्या के बारे में बात करते हुए सिर्फ खेल की नहीं, बल्कि यहां के वातावरण, लोगों और संस्कृति की भी सराहना की। उन्होंने बताया कि स्थानीय लोगों का व्यवहार बेहद दोस्ताना है और आयोजन की व्यवस्थाएं उच्च स्तर की हैं। भारतीय महिला कबड्डी टीम के साथ बातचीत एक अलग ही ऊर्जा से भरी हुई थी। इन युवा खिलाड़ियों की आंखों में सिर्फ जीत का सपना नहीं, बल्कि देश के लिए कुछ कर दिखाने का जुनून साफ झलकता है।

खिलाड़ी निकिता चौहान ने कहा, “हम सिर्फ मेडल के लिए नहीं खेलते, हम उन लड़कियों के लिए भी खेलते हैं जो हमें देखकर सपने देखती हैं।”

महिला टीम की कोच तेजस्विनी बाई ने बताया कि बीच कबड्डी में उनकी रणनीति तेज़ी और टीमवर्क पर आधारित है। उनकी फुर्ती और समन्वय उन्हें एक मजबूत दावेदार बनाते हैं। दोनों टीमों ने माना कि मौसम, रेत और अंतरराष्ट्रीय दबाव जैसी चुनौतियां हर मैच को कठिन बनाती हैं। लेकिन यही चुनौतियां उन्हें और मजबूत बनाती हैं। खिलाड़ियों के अनुसार, सबसे बड़ी ताकत टीम का एकजुट रहना और हर परिस्थिति में सकारात्मक बने रहना है। भारतीय महिला कबड्डी टीम की ऊर्जा और आत्मविश्वास इस पूरे अनुभव को और खास बना देते हैं।

मनप्रीत कौर ने बताया कि सान्या में खेलते हुए उन्हें न सिर्फ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुद को साबित करने का मौका मिल रहा है, बल्कि वे एक नई संस्कृति को भी करीब से देख पा रही हैं।

सिमरन कम्बोज ने भावुक होकर कहा, “हम सिर्फ मेडल के लिए नहीं खेलते, बल्कि यहां जो अनुभव मिल रहा है, वो हमारे जीवन का हिस्सा बन जाएगा।" खिलाड़ी रितु श्योराण ने कहा, “हमें यहां बिल्कुल घर जैसा महसूस हो रहा है। लोग बहुत सहयोगी हैं और हर चीज़ बहुत व्यवस्थित है।”

जब मैंने उनसे पूछा कि उनके लिए यह टूर्नामेंट क्या मायने रखता है, तो जवाब एक जैसा था। “देश के लिए पदक जीतना।” उनकी आवाज़ में गर्व था, और आंखों में वह चमक, जो किसी भी बड़े सपने की पहचान होती है।

सान्या के इन तटों पर लहरों की आवाज़ के बीच भारतीय कबड्डी टीमों की तैयारी और आत्मविश्वास एक नई कहानी लिखने को तैयार हैं। यह सिर्फ खेल नहीं, बल्कि समर्पण, संघर्ष, और देशभक्ति का संगम है। इन खिलाड़ियों से मिलकर यह महसूस हुआ कि जीत सिर्फ मेडल में नहीं होती, बल्कि उस सफर में होती है जो खिलाड़ी हर दिन तय करता है—खुद को बेहतर बनाने के लिए और देश का नाम ऊंचा करने के लिए।

(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

--आईएएनएस

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