'जो देवी सभी प्राणियों में शक्ति रूप में विद्यमान हैं, उन्हें बारंबार नमस्कार है', पीएम मोदी ने की स्कंदमाता की स्तुति
नई दिल्ली, 15 अक्टूबर (आईएएनएस)। नवरात्रि के पांचवें दिन के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सुभाषित साझा कर देवी की स्तुति की गई। उन्होंने संस्कृत श्लोक साझा कर स्कंदमाता को नमन किया।
प्रधानमंत्री की ओर से संस्कृत श्लोक, "या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः" साझा किया गया, जिसका हिंदी भावार्थ है कि जो देवी सभी प्राणियों में शक्ति रूप में विद्यमान हैं, उन्हें बारंबार नमस्कार है।
पीएम मोदी की ओर से साझा किया गया यह संस्कृत श्लोक दुर्गा सप्तशती (देवी महात्म्य) के अध्याय पांच से लिया गया है। जब देवी ने विभिन्न रूपों में प्रकट होकर संसार की रक्षा की, तब सभी देवताओं ने उनकी शक्ति और विभिन्न रूपों को नमन करते हुए इस स्तोत्र का गान किया।
देवताओं ने देवी से कहा, ''हे देवी! आप इस संपूर्ण सृष्टि के सभी जीव-जंतुओं और प्राणियों के भीतर ऊर्जा, सामर्थ्य और शक्ति के रूप में विराजमान हैं। आपको मेरा बार-बार प्रणाम है।''
गुरुवार को नवरात्रि का पांचवां दिन है, इस दिन स्कंदमाता की आराधना की जाती है। देवी को भगवान स्कंद (कार्तिकेय) की माता होने के कारण इन्हें स्कंदमाता कहा जाता है। मां का वाहन शेर है। देवी स्कंदमाता कमल के आसन पर विराजमान रहती हैं, इसलिए इन्हें पद्मासना देवी भी कहा जाता है। मां की चार भुजाएं हैं। गोद में भगवान स्कंद (बाल रूप में कार्तिकेय) बैठे होते हैं। मां के दो हाथों में कमल का पुष्प है, एक हाथ में वरमुद्रा या अभयमुद्रा है।
स्कंदमाता को पीला रंग अत्यंत प्रिय है। मां भोग में केले का प्रसाद और पीले फूल अर्पित करने से प्रसन्न होती हैं। स्कंदमाता देवी की आराधना से विशुद्ध चक्र जाग्रत होता है। स्कंदमाता देवी की उपासना करने से सुख, शांति, संतान सुख, और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान शिव की पत्नी के रूप में देवी ने कार्तिकेय को जन्म दिया था। कार्तिकेय का दूसरा नाम स्कंद है, इसलिए देवी को स्कंदमाता कहा जाता है।
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