जेकेएनसी में 370 को लेकर बगावत, सांसद रूहुल्लाह मेहदी ने पार्टी अध्यक्ष को पत्र लिखकर उठाए तीखे सवाल
श्रीनगर, 28 अगस्त (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस (जेकेएनसी) में अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ गई है। श्रीनगर से लोकसभा सांसद आगा सैयद रूहुल्लाह मेहदी ने पार्टी अध्यक्ष को लिखे पत्र में अनुच्छेद 370 पर पार्टी के रुख को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।
पत्र में सांसद ने पार्टी अध्यक्ष के उस प्रेस बयान का जिक्र किया है, जिसमें उन्होंने कहा था, "आप कब तक गुलाम बने रहेंगे? आपको कभी तो अपने पैरों पर खड़ा होना होगा।"
सांसद ने कहा कि इन शब्दों ने उनके दिल को छू लिया और जम्मू-कश्मीर के लोगों की निराशा को बयां किया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब वह खुद यही सवाल पूछते हैं तो पार्टी को आपत्ति क्यों होती है? वह यह मानने को तैयार नहीं हैं कि पार्टी अध्यक्ष का बयान सिर्फ 'जनता को दिखाने के लिए खोखला दिखावा' है, जबकि राजनीति कुछ और ही दिखाती है।
पत्र में सांसद ने राज्य के दर्जे की मांग को लेकर भी पार्टी को घेरा। उन्होंने कहा कि पार्टी अध्यक्ष ने कहा था, 'आप 370 चाहते हैं, लेकिन दिल्ली से भीख मांगते हैं।' सच यह है कि हम अनुच्छेद 370 के लिए भीख नहीं मांग रहे, हम राज्य का दर्जा मांग रहे हैं, जिसे खुद सुप्रीम कोर्ट ने माना है और भाजपा ने अपने 2024 के विधानसभा चुनाव घोषणापत्र में वादा किया था।
सांसद ने लिखा कि राज्य के दर्जे को अपनी राजनीतिक सीमा मानने से हम अगस्त 2019 के संवैधानिक हमले को सही ठहरा रहे हैं। इससे यह संकेत जा रहा है कि जम्मू-कश्मीर के लिए भाजपा का राजनीतिक समाधान हमें स्वीकार्य है। राज्य के दर्जे तक सीमित हो जाना, अनुच्छेद 370 और 35ए को बहाल करने के उन बड़े वादों के बिल्कुल उलट है, जिनके दम पर पार्टी सत्ता में आई थी।
उन्होंने सवाल किया कि जब 2024 का घोषणापत्र तैयार हुआ था, तब भी भाजपा सत्ता में थी, तो घोषणापत्र में अनुच्छेद 370 को बहाल करने की बात क्यों शामिल की गई? क्या ऐसे वादे किए गए थे जिन्हें पूरा करने का कभी इरादा ही नहीं था?
सांसद ने इसे बड़ी नैतिक विफलता करार देते हुए कहा कि व्यक्तिगत रूप से वह इस झूठ का हिस्सा नहीं बनना चाहते और शायद इसीलिए वह आलोचना के सुनियोजित अभियान का निशाना बन गए हैं। जम्मू-कश्मीर की लगभग 65 प्रतिशत आबादी युवा है, उनका भविष्य अनिश्चित है, न नौकरियां हैं, न अवसर। जमीन हड़पे जाने के लिए तैयार है, संसाधनों का फायदा दूसरों को मिल रहा है, धार्मिक अधिकारों और भाषा पर दबाव है। चुने हुए प्रतिनिधियों का काम इस गिरावट के खिलाफ लड़ना है, न कि आकांक्षाओं को भाजपा की मर्जी के हिसाब से ढालना।
उन्होंने पार्टी अध्यक्ष के उस बयान पर भी आपत्ति जताई, जिसमें उनसे इस्तीफा मांगा गया और कहा गया कि जेकेएनसी से पहले वह कौन थे। सांसद ने कहा कि वह शहादत की एक लंबी परंपरा के वारिस हैं, एक शहीद के गर्वित बेटे हैं। उन्हें जेकेएनसी का हिस्सा बनने के लिए पूछना नहीं पड़ा, बल्कि अध्यक्ष ने खुद उन्हें बुलाया था। उन्होंने कहा कि इस्तीफा जरूर आएगा, लेकिन उससे पहले जवाबदेही तय होनी चाहिए।
--आईएएनएस
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