झूला देवी मंदिर: नवरात्रि में उमड़ती है श्रद्धालुओं की भीड़, सीएम पुष्कर सिंह धामी ने साझा किया महत्व
अल्मोड़ा, 28 फरवरी (आईएएनएस)। देवभूमि उत्तराखंड का इतिहास काफी पुराना रहा है। यहां कई ऐतिहासिक व धार्मिक स्थल सदियों से लोगों की आस्था का केंद्र बने हुए हैं। इन्हीं में से एक मंदिर है, जिसका नाम झूला देवी मंदिर है। यह मंदिर अपनी लोककथाओं व परंपराओं के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है।
जनपद अल्मोड़ा के रानीखेत में स्थित यह मंदिर सदियों पुराना माना जाता है। शनिवार को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मंदिर का वीडियो पोस्ट किया।
उन्होंने मंदिर के महत्व पर प्रकाश डालते हुए लिखा, "जनपद अल्मोड़ा के रानीखेत में स्थित झूला देवी मंदिर अनेकों श्रद्धालुओं की अटूट श्रद्धा और विश्वास का केंद्र है। मां दुर्गा को समर्पित इस पावन स्थल की विशेष पहचान यहां अर्पित की जाने वाली असंख्य घंटियों से है। कहा जाता है कि जब भी भक्त की मनोकामना पूर्ण होती है, वह कृतज्ञता स्वरूप यहां घंटी चढ़ाकर मां का आभार व्यक्त करते हैं।
सीएम धामी ने आगे लिखा, "नवरात्रि के पावन अवसर पर यहां विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। रानीखेत आगमन पर मां झूला देवी का आशीर्वाद अवश्य प्राप्त करें।"
झूला देवी मंदिर न सिर्फ धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर का भी प्रतीक है। मंदिर से जुड़ी एक लोककथा काफी प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि मंदिर के बनने से पहले वहां पर जंगली जानवरों का आतंक ज्यादा था, जिसको देखते हुए वहां के एक चरवाहे के सपने में मां दुर्गा ने दर्शन देकर खुद को जमीन से बाहर निकालने का निर्देश दिया था ताकि वह जंगली जानवरों से ग्रामीणों की रक्षा कर सकें।
ग्रामीणों ने बताए गए स्थान से मूर्ति निकाली और मंदिर की स्थापना की। मान्यता है कि इसके बाद इलाके में जंगली जानवरों का आतंक समाप्त हो गया, जिससे लोगों की आस्था और भी गहरी हो गई।
यह मंदिर रानीखेत से लगभग 7 किलोमीटर की दूरी पर स्थित एक शांत और आध्यात्मिक स्थान पर है, जिसके पास ही एक राम मंदिर भी है।
भक्तों के लिए मंदिर का भ्रमण करने का सबसे अच्छा समय मार्च से जून (वसंत ऋतु) है, लेकिन नवरात्रि के दौरान यहां विशेष उत्सव मनाया जाता है, जो देखने लायक होता है।
--आईएएनएस
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