झारखंड : विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन जेपीएससी-जेएसएससी मुद्दे पर हंगामा, कार्यवाही बाधित
रांची, 7 अगस्त (आईएएनएस)। झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन की पहली पाली हंगामे, तीखी नोकझोंक और सियासी खींचतान की भेंट चढ़ गई। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायकों ने राज्य में जेपीएससी और जेएसएससी की विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में हुई कथित गड़बड़ियों व धांधली को लेकर सदन के अंदर और बाहर जोरदार प्रदर्शन किया।
कार्यवाही शुरू होते ही नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी अपनी सीट पर खड़े होकर इस संवेदनशील मुद्दे पर तत्काल चर्चा कराने, परीक्षाओं को रद्द करने और पूरे मामले की उच्च न्यायालय की निगरानी में सीबीआई से जांच कराने की मांग करने लगे।
मरांडी ने कहा कि सहायक आचार्य, सीजीएल, उत्पाद सिपाही, पीजीटी शिक्षक नियुक्ति और 11वीं से 14वीं जेपीएससी जैसी लगभग सभी हालिया परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई है। सूबे के अभ्यर्थी भारी बारिश के बीच सड़कों पर बैठने को मजबूर हैं और राज्य की बदनामी हो रही है। मांग पूरी न होने पर भाजपा और विपक्षी दलों के विधायक वेल में उतर आए और सरकार विरोधी नारेबाजी करने लगे।
विपक्ष के इस रवैये पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि प्रथम अनुपूरक बजट पेश किया जाना अत्यंत महत्वपूर्ण है और कार्यमंत्रणा की बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा कराने पर सहमति बनी थी। उन्होंने कहा कि विधिवत वाद-विवाद के दौरान विपक्ष को अपनी बात रखने का पूरा मौका मिलेगा, इसलिए सदन को बाधित करना अनुचित है।
वहीं, कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने विपक्ष पर पलटवार करते हुए कहा कि सरकार छात्रों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सीआईडी जांच में अब तक 20 से अधिक आरोपी जेल भेजे जा चुके हैं, तो नेता प्रतिपक्ष को सीआईडी पर भरोसा क्यों नहीं है?
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि आज सीबीआई की विश्वसनीयता पर सवाल हैं और विपक्ष को पहली से तीसरी जेपीएससी की नियुक्तियों पर भी अपनी बात रखनी चाहिए। हंगामे के बीच विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) ने तंज कसते हुए पूछा कि आज सदन में नीट का मुद्दा उठेगा या जेपीएससी का? उन्होंने कहा कि सत्र में राज्य की कृषि और किसानों की समस्याओं पर भी गंभीर चर्चा होनी चाहिए।
इसी दौरान मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने नेता प्रतिपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें सार्वजनिक रूप से यह बताना चाहिए कि झारखंड गठन के शुरुआती दौर में पहली और दूसरी जेपीएससी परीक्षाओं के जरिए उनके अपने कितने रिश्तेदार और करीबी नौकरियां पा चुके हैं। सदन में बढ़ते शोर-शराबे और लगातार नारेबाजी को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने कार्यवाही को दोपहर 12:30 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया।
--आईएएनएस
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