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झारखंड: पलामू में 33 फर्जी जन्म प्रमाण पत्र जारी करने के मामले का पर्दाफाश, एफआईआर दर्ज

मेदिनीनगर, 14 सितंबर (आईएएनएस)। पलामू सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. विजय कुमार के डिजिटल सिग्नेचर का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल कर 33 जन्म प्रमाण पत्र जारी किए जाने का मामला सामने आया है। प्रमाण पत्र जारी होने के बाद उनका वितरण भी कर दिया गया था। मामला सामने आने के बाद सभी 33 प्रमाण पत्रों को रद्द कर दिया गया है। अस्पताल प्रबंधन की शिकायत पर मेदिनीनगर टाउन थाना में प्राथमिकी दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
 

मेदिनीनगर, 14 सितंबर (आईएएनएस)। पलामू सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. विजय कुमार के डिजिटल सिग्नेचर का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल कर 33 जन्म प्रमाण पत्र जारी किए जाने का मामला सामने आया है। प्रमाण पत्र जारी होने के बाद उनका वितरण भी कर दिया गया था। मामला सामने आने के बाद सभी 33 प्रमाण पत्रों को रद्द कर दिया गया है। अस्पताल प्रबंधन की शिकायत पर मेदिनीनगर टाउन थाना में प्राथमिकी दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

प्राथमिकी के अनुसार, सदर अस्पताल में जन्म प्रमाण पत्र बनाने के लिए कंप्यूटर ऑपरेटर अमित कुमार को जिम्मेदारी दी गई है। काम का दबाव अधिक होने के कारण बिश्रामपुर निवासी शिवनारायण साव को भी पोर्टल की आईडी उपलब्ध कराई गई थी। शिवनारायण साव के कार्यकाल और पोर्टल पर किए गए कार्यों की जांच के दौरान उपाधीक्षक के डिजिटल सिग्नेचर के कथित दुरुपयोग का मामला सामने आया। अब पुलिस के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि डिजिटल सिग्नेचर का वास्तविक इस्तेमाल किस व्यक्ति ने किया।

जांच में पोर्टल लॉगिन, सिस्टम रिकॉर्ड, डिजिटल सिग्नेचर के इस्तेमाल और प्रमाण पत्र जारी करने की पूरी प्रक्रिया की तकनीकी जांच अहम होगी। पुलिस यह भी पता लगाएगी कि जारी किए गए प्रमाण पत्रों के लिए आवेदन किसने किए और उन्हें किस स्तर से स्वीकृति मिली। पलामू में जन्म प्रमाण पत्र से जुड़े फर्जीवाड़े का यह पहला मामला नहीं है। इसी वर्ष मई में गढ़वा के मेराल प्रखंड में एक ऑनलाइन सेंटर से फर्जी जन्म प्रमाण पत्र जारी किए जाने का मामला सामने आया था। जांच में सेंटर संचालक की भूमिका सामने आई थी और मेदिनीनगर से जुड़े एक व्यक्ति का नाम भी सामने आया था।

वहीं, पिछले वर्ष जुलाई में मेदिनीनगर कचहरी परिसर में संचालित ऑनलाइन सेंटर से बड़ी संख्या में फर्जी प्रमाण पत्र बरामद किए गए थे। इन प्रमाण पत्रों पर अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षर होने की बात सामने आई थी। पुलिस ने सेंटर संचालक को गिरफ्तार कर सेंटर सील कर दिया था। सितंबर 2025 में मेदिनीनगर निगम के एक कंप्यूटर ऑपरेटर पर जन्म प्रमाण पत्र जारी करने के नाम पर अवैध वसूली का आरोप भी लगा था।

जांच में सरकारी शुल्क से कई गुना अधिक राशि लिए जाने की बात सामने आई थी और ऑपरेटर को हटा दिया गया था। मौजूदा मामले में पुलिस की जांच से यह स्पष्ट होगा कि 33 प्रमाण पत्र किस प्रक्रिया के तहत जारी हुए और डिजिटल सिग्नेचर का इस्तेमाल किसने किया। पुलिस सभी संबंधित तकनीकी रिकॉर्ड और दस्तावेजों की जांच कर रही है।

--आईएएनएस

एसएनसी/पीएम