झारखंड में ‘महिला किसान खुशहाली योजना’ की तैयारी, उत्पादों को बेहतर बाजार देने और आय बढ़ाने पर फोकस
रांची, 3 सितंबर (आईएएनएस)। झारखंड में महिला किसानों को खेती से बेहतर आय दिलाने और उन्हें बाजार से जोड़ने के लिए नई ‘महिला किसान खुशहाली योजना’ तैयार की जा रही है। योजना के तहत महिला किसानों की कृषि संबंधी क्षमता बढ़ाने, खेती से जुड़े फैसलों में उनकी भागीदारी बढ़ाने, उत्पादों का वैल्यू एडिशन करने और बेहतर बाजार उपलब्ध कराने पर फोकस रहेगा।
योजना को अंतिम रूप देने से पहले गुरुवार को रांची के होटल रेडिसन ब्लू में राज्यस्तरीय स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें राज्यभर से महिला किसान, कृषि क्षेत्र में काम करने वाले संस्थानों के प्रतिनिधि, एफपीओ, बैंकिंग संस्थान, कृषि वैज्ञानिक और विभागीय अधिकारी शामिल हुए।
योजना के ड्राफ्ट और इसके संभावित लाभों पर चर्चा के साथ महिला किसानों और स्टेकहोल्डर्स से सुझाव लिए गए। कार्यक्रम में योजना के कॉन्सेप्ट और ड्राफ्ट का प्रेजेंटेशन दिया गया। इसके बाद योजना के ऑब्जेक्टिव, स्कोप और इंटीग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम (आईएफएस) मॉडल समेत विभिन्न पहलुओं पर ओपन हाउस डिस्कशन हुआ। मिले सुझावों को योजना के अंतिम स्वरूप में शामिल करने की तैयारी है।
कृषि विभाग के अनुसार, योजना का मुख्य उद्देश्य कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका को केवल खेती तक सीमित रखने के बजाय उन्हें उत्पादन, निर्णय, बाजार और आय बढ़ाने की पूरी प्रक्रिया से जोड़ना है। इसके तहत महिला किसानों की क्षमता विकास के साथ उनके कृषि उत्पादों को बेहतर बाजार दिलाने और वैल्यू एडिशन के जरिए आय बढ़ाने के विकल्प तैयार किए जाएंगे।
योजना में पारंपरिक खेती के साथ एकीकृत खेती की संभावनाओं पर भी जोर दिया जा रहा है। आईएफएस मॉडल के तहत फसल उत्पादन के साथ पशुपालन, बागवानी, मुर्गी पालन, मछली पालन जैसी गतिविधियों को जोड़कर किसानों की आय के कई स्रोत विकसित करने पर विचार किया जा रहा है। इससे खेती में जोखिम कम करने और सालभर आय के अवसर बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
कार्यक्रम में जेएसएलपीएस की ओर से बताया गया कि राज्य में करीब 3.2 लाख स्वयं सहायता समूहों से लगभग 32 लाख महिलाएं जुड़ी हैं। ये महिलाएं अलग-अलग आजीविका गतिविधियों के जरिए अपनी आय बढ़ा रही हैं। कृषि विभाग की नई योजना को इन गतिविधियों के साथ जोड़कर महिला किसानों को आगे बढ़ाने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।
कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कार्यक्रम में कहा कि स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन को महज औपचारिकता नहीं माना जाना चाहिए। योजना को जमीनी जरूरतों के अनुरूप बनाने के लिए इसमें शामिल महिला किसानों और विशेषज्ञों के सुझावों को महत्व दिया जाना चाहिए।
कार्यक्रम में कृषि निदेशक विद्यानंद शर्मा पंकज, उद्यान निदेशक प्रवीण केरकेट्टा, मृदा संरक्षण निदेशक विकास कुमार, जेएसएलपीएस के सीईओ अनन्य मित्तल, पशुपालन निदेशक रोबिन टोप्पो के अलावा नाबार्ड, लीड बैंक, आईसीएआर, बिरसा कृषि विश्वविद्यालय, कृषि विज्ञान केंद्र और एफपीओ के प्रतिनिधि मौजूद थे।
--आईएएनएस
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