झारखंड की शराब नीति में घूसखोरी को लेकर बाबूलाल मरांडी ने सीएम हेमंत सोरेन से पूछे सवाल
रांची, 30 सितंबर (आईएएनएस)। झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने राज्य की शराब नीति में कथित घूस के मामले को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर जारी बयान में दावा किया कि झारखंड की शराब नीति में संशोधन कराने के लिए छत्तीसगढ़ के कारोबारी अनवर ढेबर की ओर से तत्कालीन प्रधान सचिव विनय कुमार चौबे को कथित तौर पर 50 करोड़ रुपये दिए गए थे जबकि अरुणपति त्रिपाठी को झारखंड स्टेट बेवरेजेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (जेएसबीसीएल) का सलाहकार नियुक्त कराने के लिए पांच करोड़ रुपये के कथित भुगतान की बात जांच में सामने आई है।
बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री सोरेन से सवाल किया कि क्या यह सब संयोग था या झारखंड में शराब नीति बदलने के पीछे कोई सुनियोजित योजना थी। उन्होंने कहा कि हेमंत सोरेन के छत्तीसगढ़ दौरे के दौरान अनवर ढेबर द्वारा उनकी मेजबानी किए जाने का भी उन्होंने अपने बयान में उल्लेख किया है। भाजपा नेता ने दावा किया कि छत्तीसगढ़ मॉडल को झारखंड में लागू कराने और अरुणपति त्रिपाठी को जेएसबीसीएल का सलाहकार नियुक्त कराने की प्रक्रिया के दौरान कथित तौर पर रकम का लेन-देन हुआ।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि पांच करोड़ रुपये का कथित भुगतान हुआ, फाइलें चलीं और कैबिनेट से संबंधित फैसला हुआ, तो मुख्यमंत्री कार्यालय को इसकी जानकारी थी या नहीं। हालांकि, बाबूलाल मरांडी के इन राजनीतिक आरोपों को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन या उनके कार्यालय की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है। मरांडी ने अपने बयान में यह भी दावा किया कि उन्होंने शराब नीति में बदलाव और उससे जुड़े कथित घोटाले की आशंका को लेकर पहले ही मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर आगाह किया था।
उन्होंने कहा कि टेंडर जारी होने से पहले उन्होंने सरकार को उन लोगों के बारे में भी जानकारी दी थी, जिन्हें कथित तौर पर काम दिए जाने की आशंका थी। उन्होंने झारखंड के अधिकारियों की उस टीम का भी जिक्र किया, जिसे छत्तीसगढ़ की शराब नीति का अध्ययन करने रायपुर भेजे जाने का दावा किया गया था। मरांडी ने आरोप लगाया कि टीम ने महज 24 घंटे में रिपोर्ट तैयार कर छत्तीसगढ़ मॉडल को झारखंड में लागू करने की अनुशंसा कर दी। इस बीच, झारखंड हाईकोर्ट के अप्रैल 2026 के एक आदेश में एसीबी की जांच से जुड़े दस्तावेजों के हवाले से अरुणपति त्रिपाठी पर जनवरी 2022 में तत्कालीन उत्पाद सचिव विनय कुमार चौबे को पांच करोड़ रुपये कथित तौर पर देने के आरोपों का उल्लेख है।
अदालत के रिकॉर्ड में कई गवाहों के बयानों का भी उल्लेख किया गया है, जिनमें इस कथित भुगतान और त्रिपाठी की जेएसबीसीएल में सलाहकार के रूप में नियुक्ति से संबंधित दावे दर्ज हैं। हाल में सामने आई एसीबी जांच संबंधी रिपोर्टों में भी झारखंड की उत्पाद नीति में बदलाव के लिए कथित तौर पर 55 करोड़ रुपये की डील का उल्लेख किया गया है। इसमें पांच करोड़ रुपये अरुणपति त्रिपाठी की सलाहकार के रूप में नियुक्ति और शेष रकम को नीति में बदलाव से जोड़ा गया है।
ये आरोप जांच के दौरान सामने आए बयानों और सामग्री पर आधारित हैं तथा मामले का अंतिम न्यायिक निष्कर्ष अभी बाकी है। मरांडी ने अपने बयान के अंत में मुख्यमंत्री से पूछा कि झारखंड में लागू की गई शराब नीति का उद्देश्य क्या था और कथित लेन-देन तथा नीतिगत फैसलों के लिए जिम्मेदारी किसकी है। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में कानून की प्रक्रिया के तहत वास्तविक तथ्यों को सामने आना चाहिए।
--आईएएनएस
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