झारखंड: आईएफएस अधिकारी राजीव लोचन बख्शी पर वित्तीय गड़बड़ी के आरोप, बाबूलाल मरांडी ने की एसआईटी जांच की मांग
रांची, 20 जुलाई (आईएएनएस)। झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर झारखंड कैडर के भारतीय वन सेवा (आईएफएस) अधिकारी राजीव लोचन बख्शी के खिलाफ कथित करोड़ों रुपए के गबन मामले में उच्चस्तरीय एसआईटी जांच की मांग की है।
उन्होंने मामले में तत्काल प्राथमिकी दर्ज करने, पूरे प्रकरण की फॉरेंसिक ऑडिट कराने और जांच पूरी होने तक बख्शी को मौजूदा पदों से हटाने की मांग भी की है।
मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में मरांडी ने आरोप लगाया कि राजीव लोचन बख्शी ने वर्ष 2013 से 2018 के बीच रांची वन प्रमंडल के डीएफओ पद पर रहते हुए अपने पद का दुरुपयोग किया और राज्य को करोड़ों रुपए का नुकसान पहुंचाया। उन्होंने कहा कि इस मामले में प्रधान महालेखाकार (एजी) की ऑडिट रिपोर्ट में कई वित्तीय अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है। मरांडी ने बताया कि इस संबंध में वह पहले राज्यपाल और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) को भी जानकारी दे चुके हैं।
मरांडी के मुताबिक, ऑडिट रिपोर्ट में अप्रैल 2016 से मार्च 2019 के बीच 95 मस्टर रोल की जांच के दौरान करीब 1.03 करोड़ रुपए के कथित फर्जी भुगतान का मामला सामने आया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई भुगतानों में मजदूरों के हस्ताक्षर या अंगूठे के निशान नहीं थे और रिकॉर्ड में व्हाइटनर व इरेजर का इस्तेमाल कर बदलाव किए गए।
उन्होंने पत्र में यह भी आरोप लगाया कि वर्ष 2013-14 में ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के प्रस्तावों को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर नियमों से बचने की कोशिश की गई। इसके अलावा 7.35 हेक्टेयर वन भूमि के उपयोग की अनुमति देने से राज्य को करीब 46 लाख रुपए की संभावित क्षति होने का दावा किया गया है।
नेता प्रतिपक्ष ने कैंपा मद के 8.53 करोड़ रुपए के अग्रिम भुगतान का हिसाब नहीं मिलने और 1.80 करोड़ रुपए की सामग्री खरीद से जुड़े वाउचर ऑडिट के दौरान उपलब्ध नहीं कराए जाने का भी आरोप लगाया। उनका कहना है कि सामग्री खरीद के दस्तावेज नहीं मिलने से संबंधित मजदूरी भुगतान भी संदेह के दायरे में आता है।
मरांडी ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि पूरे मामले की एसआईटी जांच कराई जाए, स्वतंत्र फॉरेंसिक ऑडिट कराया जाए, राजीव लोचन बख्शी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए और जांच पूरी होने तक उन्हें महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारियों से अलग रखा जाए। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के इस मामले में सरकार को राज्यहित में निष्पक्ष कार्रवाई करनी चाहिए।
--आईएएनएस
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