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झारखंड: गढ़वा के जंगल में मृत पाया गया हाथी, चार दिनों में दूसरी घटना

गढ़वा, 5 अक्टूबर (आईएएनएस)। गढ़वा जिले के रंका थाना क्षेत्र में जंगल से सटे इलाके में सोमवार को एक जंगली हाथी का शव बरामद किया गया। हाथी की मौत कैसे हुई है? इसका पता नहीं चल पाया है। वन विभाग ने हाथी का शव बरामद करने के बाद जांच शुरू की है।
 

गढ़वा, 5 अक्टूबर (आईएएनएस)। गढ़वा जिले के रंका थाना क्षेत्र में जंगल से सटे इलाके में सोमवार को एक जंगली हाथी का शव बरामद किया गया। हाथी की मौत कैसे हुई है? इसका पता नहीं चल पाया है। वन विभाग ने हाथी का शव बरामद करने के बाद जांच शुरू की है।

झारखंड में चार दिनों के भीतर हाथी के मृत पाए जाने की यह दूसरी घटना है। गढ़वा दक्षिणी वन प्रमंडल पदाधिकारी एबिन बेनी अब्राहम ने बताया कि सोमवार सुबह करीब आठ बजे विभाग को पिपरादादर टोला में जंगल के किनारे हाथी के मृत पड़े होने की सूचना मिली थी। इसके बाद अधिकारियों और कर्मचारियों की टीम को तत्काल घटनास्थल पर भेजा गया। उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हाथी की मौत के वास्तविक कारण का पता चल सकेगा। फिलहाल किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।

वन विभाग के अधिकारी ललन कुमार ने स्थानीय लोगों से भी पूछताछ की है। विश्रामपुर पंचायत क्षेत्र में हाथी की मौत का यह पहला मामला नहीं है। वर्ष 2019 में नया टोला इलाके में एक जंगली हाथी की करंट की चपेट में आने से मौत हुई थी। अगस्त 2023 में भौंरी गांव में जंगल के किनारे एक शावक हाथी भी मृत मिला था। तीन दिन पूर्व पश्चिमी सिंहभूम जिले के जगन्नाथपुर थाना क्षेत्र के भनगांव में एक हथिनी मृत मिली थी। उसके दोनों दांत भी गायब पाए गए थे। वन विभाग ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मौत के कारणों की जांच शुरू की थी।

जगन्नाथपुर और आसपास के क्षेत्रों में पिछले एक वर्ष में करीब सात हाथियों की मौत की घटनाएं सामने आने की बात कही गई है। झारखंड के दूसरे वन क्षेत्रों में भी हाथियों की मौत के मामले सामने आते रहे हैं। सितंबर में लातेहार में एक हाथी की कथित तौर पर अवैध रूप से लगाए गए बिजली के तार की चपेट में आने से मौत हुई थी।

मई में गिरिडीह के धोबरी वन क्षेत्र में एक कम उम्र के हाथी की झाड़ियों और लताओं में फंसने के बाद मौत हो गई थी। पश्चिमी सिंहभूम के टोंटो क्षेत्र में जनवरी में एक हाथी की दूसरे हाथी के साथ संघर्ष में लगी चोटों के कारण मौत हुई थी। राज्य के कई इलाकों में हाथियों के जंगल से निकलकर गांवों और खेतों तक पहुंचने से मानव-हाथी संघर्ष की स्थिति भी बनती रही है। ग्रामीणों ने हाथी गलियारों को सुरक्षित करने, बिजली के तारों की नियमित निगरानी और हाथियों की आवाजाही की समय रहते सूचना देने की व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है।

--आईएएनएस

एसएनसी/डीकेपी