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जौहर प्रथा अच्छी नहीं थी, यूसीसी सभी धर्मों पर समान रूप से लागू हो : मौलाना मोहसिन तकवी

नई दिल्ली, 4 सितंबर (आईएएनएस)। शिया धर्मगुरु मौलाना सैयद मोहसिन तकवी ने जौहर की प्रथा का विरोध करते हुए कहा कि ऐसी परंपराओं को आलोचनात्मक रूप से देखा जाना चाहिए और यूसीसी के तहत कानून सभी समुदायों पर समान रूप से लागू होने चाहिए।
 

नई दिल्‍ली, 4 सितंबर (आईएएनएस)। शिया धर्मगुरु मौलाना सैयद मोहसिन तकवी ने जौहर की प्रथा का विरोध करते हुए कहा कि ऐसी परंपराओं को आलोचनात्मक रूप से देखा जाना चाहिए और यूसीसी के तहत कानून सभी समुदायों पर समान रूप से लागू होने चाहिए।

एक्ट्रेस स्वरा भास्कर के जौहर को लेकर महिला विरोधी बयान पर शिया धर्मगुरु सैयद मोहसिन तकवी ने आईएएनएस से बातचीत के दौरान कहा कि जहां तक ​​हमारी सोच के अनुसार जौहर की प्रथा का सवाल है, जब हम इस्लामी नजरिए से सोचते हैं, तो जौहर की यह परंपरा हमारी नजर में भी अच्छी बात नहीं थी। इंसान को परिस्थितियों का सामना बहादुरी और हिम्मत के साथ करना चाहिए; हम भी यही कहेंगे। लेकिन असली मुद्दा यह है कि आज भारत में ऐसी चीज कहां हो रही है? यह कहां हो रहा है?

उन्‍होंने कहा कि भारत की आबादी का कितना प्रतिशत मुसलमान है? और आज, जब हर तरफ हिंदुत्व की इतनी बातें हो रही हैं, और कई मौकों पर मुसलमानों के अधिकारों को कुचला जा रहा है और उनकी आवाज को उभरने नहीं दिया जा रहा है, तो ऐसी स्थिति में जौहर की गुंजाइश कहां है? ये सिर्फ विचार और गलतफहमियां हैं; इसके अलावा, मुझे नहीं लगता कि कहीं भी जौहर का कोई सवाल उठता है।

उत्तराखंड वक्फ बोर्ड द्वारा निकाहनामे से दूसरी, तीसरी और चौथी शादी के कॉलम हटाने पर शिया धर्मगुरु मौलाना सैयद मोहसिन तकवी ने कहा, "भारत में सभी धर्मों के लोग आमतौर पर एक ही शादी करते हैं। जहां तक ​​दूसरी शादी का सवाल है, तो यह सिर्फ मुसलमानों में ही नहीं, बल्कि हिंदुओं सहित अन्य धर्मों में भी होती है। इसलिए, अगर कोई कानून बनाया जाता है, तो वह सभी के लिए समान होना चाहिए। जब ​​आप यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) की बात करते हैं, लेकिन कार्रवाई सिर्फ मुसलमानों के खिलाफ होती है, तो यह यूसीसी के मूल सिद्धांत के ही खिलाफ है। ऐसा नहीं है कि हम दूसरी शादी को पुरजोर समर्थन या बढ़ावा देते हैं, लेकिन कभी-कभी ऐसी परिस्थितियां होती हैं, जब किसी व्यक्ति को ऐसा करना पड़ता है। ज्यादातर लोग गलत तरीके से ऐसा करते हैं, लेकिन कभी-कभी इसके पीछे वाजिब कारण भी होते हैं।"

उन्‍होंने कहा कि यूसीसी में निकाह के नियमों में बदलाव से मुस्लिम पर्सनल लॉ में छेड़छाड़ हुई है। इस्‍लाम में दूसरी शादी की अनुमति है, हालांकि यह अनिवार्य नहीं है और न ही दूसरी शादी के लिए उकसाया गया है। दूसरी शादी के लिए भी शर्तें हैं कि दोनो पत्‍नी को बराबरी की नजर से देखें और भेदभाव न हो। सबसे बड़ी बात है कि इस मसले को हल करके देश की कौन सी समस्‍या का समाधान निकलेगा, भारत क्‍या हासिल कर लेगा। देश के अन्‍य मुद्दों पर ध्‍यान न देकर यूसीसी लागू करने से किसी बड़ी समस्‍या का समाधान निकलेगा? देश की प्रमुख समस्‍याओं से जनता का ध्‍यान हटाने के लिए इस तरह के काम किए जा रहे हैं।

--आईएएनएस

एएसएच/एबीएम