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जसवंत सिंह खालड़ा के संघर्ष को दर्शाती है 'पंजाब 95', इतिहास को जानना जरूरी: कुलवंत सिंह मन्नन

अमृतसर, 5 जुलाई (आईएएनएस)। अभिनेता दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'पंजाब 95' अब ओटीटी प्लेटफॉर्म पर 'सतलुज' नाम से रिलीज हो चुकी है। इस बीच शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने लोगों से फिल्म को देखने की अपील की है। उन्होंने बताया कि यह फिल्म मशहूर सिख मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन, उनके संघर्ष और उनके द्वारा उठाए गए गंभीर मुद्दों पर आधारित है।
 

अमृतसर, 5 जुलाई (आईएएनएस)। अभिनेता दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'पंजाब 95' अब ओटीटी प्लेटफॉर्म पर 'सतलुज' नाम से रिलीज हो चुकी है। इस बीच शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने लोगों से फिल्म को देखने की अपील की है। उन्होंने बताया कि यह फिल्म मशहूर सिख मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन, उनके संघर्ष और उनके द्वारा उठाए गए गंभीर मुद्दों पर आधारित है।

आईएएनएस से बात करते हुए एसजीपीसी के मुख्य सचिव कुलवंत सिंह मन्नन ने कहा, ''फिल्म को साल 2022 में सेंसर बोर्ड के पास भेजा गया था और इसमें दिलजीत दोसांझ ने जसवंत सिंह खालड़ा की भूमिका निभाई है। यह फिल्म उस समय के पंजाब की परिस्थितियों को दिखाने का प्रयास करती है, जब राज्य एक कठिन दौर से गुजर रहा था। उन्होंने कथित फर्जी पुलिस मुठभेड़ों और लापता लोगों के मामलों को उजागर करने के लिए लंबा संघर्ष किया था, और यह फिल्म उसी संघर्ष को पर्दे पर लाने का प्रयास है।''

एसजीपीसी के मुख्य सचिव ने कहा, ''उस दौर में कई ऐसे मामले सामने आए थे, जिनमें लोगों को बिना कानूनी प्रक्रिया के गायब कर दिया जाता था या उनकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो जाती थी। जसवंत सिंह खालड़ा ने इन घटनाओं के खिलाफ आवाज उठाई और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। फिल्म में इन्हीं घटनाओं और उनके संघर्ष को विस्तार से दिखाया गया है।''

उन्होंने कहा, ''यह फिल्म नई पीढ़ी के लिए एक महत्वपूर्ण माध्यम हो सकती है, जिससे वे पंजाब के इतिहास और उस दौर की वास्तविक परिस्थितियों को समझ सकें। मेरी युवाओं से अपील है कि वे यह फिल्म जरूर देखें, ताकि उन्हें अपने इतिहास और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी मिल सके।''

उन्होंने सेंसर बोर्ड की ओर से सुझाए गए बदलावों और आपत्तियों को लेकर भी प्रतिक्रिया दी। मन्नन ने कहा, ''यदि फिल्म में किसी स्तर पर आवश्यक सुधार किए गए हैं, तो उनका स्वागत किया जाना चाहिए। समाज और इतिहास से जुड़े विषयों पर आधारित फिल्मों को खुले मन से देखना चाहिए, क्योंकि ये फिल्में केवल कहानी नहीं होतीं, बल्कि अतीत की सच्चाइयों को सामने लाने का प्रयास होती हैं।''

गौरतलब है कि यह फिल्म लंबे समय तक सेंसर बोर्ड की आपत्तियों और कट्स को लेकर विवादों में रही। पहले इसका नाम 'पंजाब 95' था, जिसे बाद में बदलकर 'सतलुज' किया गया। इस दौरान फिल्म की रिलीज भी कई बार टलती रही।

फिल्म में दिलजीत दोसांझ के साथ अर्जुन रामपाल, सुविंदर विक्की, जगजीत संधू और गीतिका विद्या ओहल्यान जैसे कलाकार अहम भूमिकाओं में हैं।

--आईएएनएस

पीके/एएस