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जंतर-मंतर विवाद पर सियासत तेज: सपा बोली-डरी हुई है सरकार, जदयू ने बताया जनहित का फैसला

नई दिल्ली, 15 अक्टूबर (आईएएनएस)। गृह मंत्रालय द्वारा जंतर-मंतर को धरना-प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने के फैसले के खिलाफ अब कानूनी लड़ाई शुरू हो गई है। इस आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है। इसे लेकर सियासी पारा भी बढ़ गया है। इस फैसले पर समाजवादी पार्टी ने केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा है जबकि जदयू इसे जनहित में बता रही है।
 

नई दिल्ली, 15 अक्टूबर (आईएएनएस)। गृह मंत्रालय द्वारा जंतर-मंतर को धरना-प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने के फैसले के खिलाफ अब कानूनी लड़ाई शुरू हो गई है। इस आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है। इसे लेकर सियासी पारा भी बढ़ गया है। इस फैसले पर समाजवादी पार्टी ने केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा है जबकि जदयू इसे जनहित में बता रही है।

लखनऊ में सपा के प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने कहा, "जंतर-मंतर को धरना-प्रदर्शन की जगह से हटाने की वजह समझिए। भारतीय जनता पार्टी की सरकार इतनी डरी हुई है कि वह अपनी संसद से 300 मीटर दूर से उठने वाले विरोध के स्वरों को भी अपने कानों तक नहीं आने देना चाहती।"

उन्होंने कहा, "जैसे आंख बंद कर लेने से अंधेरा नहीं हो जाता, वैसे ही सच्चाई को छुपाया नहीं जा सकता। भाजपा सरकार डरी हुई है, इसलिए वह चाहती है कि यहां कोई धरना-प्रदर्शन न हो। हालांकि इतिहास गवाह है कि जब-जब जनता सरकार के खिलाफ खड़ी हुई है, तब-तब बड़े बदलाव हुए हैं। यह इतिहास और भविष्य दोनों विपक्ष के हाथ में है। भाजपा सरकार की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है।"

वहीं, सत्तारूढ़ गठबंधन की सहयोगी जदयू ने इस फैसले का बचाव किया है। जदयू के प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा, "आम लोगों की कठिनाइयों को दूर करने, व्यापार और राजकीय कामकाज को सुचारू रूप से चलाने की दृष्टि से ही जंतर-मंतर को डी-नोटिफाई करने का निर्णय लिया गया है। वहां लगातार प्रदर्शनों के कारण आम नागरिकों, व्यापारियों और सरकारी कामकाज में बाधा उत्पन्न हो रही थी।"

उन्होंने न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा जताते हुए कहा, "अब चूंकि न्यायपालिका के समक्ष इसके डी-नोटिफिकेशन के सवाल पर कुछ याचिकाएं दायर की गई हैं और मामला कोर्ट में है, इसलिए न्यायालय का जो भी फैसला आएगा, वह सभी पक्षों को स्वीकार्य होगा। हमें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है।"

बता दें कि गृह मंत्रालय ने 11 अक्टूबर 2026 को एक आदेश जारी कर जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शन स्थल के रूप में डी-नोटिफाई कर दिया था। इसके साथ ही दिल्ली में प्रदर्शन के लिए तीन नए स्थानों को अधिसूचित किया गया है, जिनमें रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और पूर्वी दिल्ली का सीबीडी ग्राउंड शामिल है।

--आईएएनएस

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