जनसुराज के डिजिटल कम्युनिकेशन मैनेजर की मौत पर उठे कई सवाल, परिजनों ने सीबीआई जांच की मांग की
रांची, 28 अक्टूबर (आईएएनएस)। चर्चित चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी के डिजिटल कम्युनिकेशन मैनेजर देवपालिक गुप्ता की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। 31 वर्षीय देवपालिक 26 अक्टूबर को रांची से पटना जा रही जनशताब्दी एक्सप्रेस में सफर के दौरान अचानक लापता हो गए थे, और 27 अक्टूबर को उनका शव रांची-मुरी रेलखंड में जोन्हा के पास झाड़ियों से बरामद किया गया।
घटना की सूचना पाकर रांची पहुंचे देवपालिक के बड़े भाई, मित्रों और परिजनों ने पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग की है। परिजनों ने इस बात पर भी गहरा दुख जताया कि घटना के 36 घंटे बीत जाने के बाद भी जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर या पार्टी के किसी वरिष्ठ नेता ने परिवार से फोन पर भी संपर्क नहीं साधा। बुधवार दोपहर रांची के रिम्स में शव का पोस्टमार्टम होने के बाद परिजन पार्थिव शरीर को लेकर उत्तर प्रदेश के कुशीनगर स्थित अपने पैतृक गांव के लिए रवाना हो गए।
पुलिस की शुरुआती जांच में चलती ट्रेन से गिरने की आशंका जताई जा रही है, लेकिन वे कैसे गिरे, किसी ने उन्हें गिरते हुए क्यों नहीं देखा, उनका मोबाइल फोन अचानक बंद कैसे हुआ और लापता होने की सूचना के बाद तलाशी में देरी क्यों हुई—इन बुनियादी सवालों के जवाब अब तक सामने नहीं आ सके हैं।
देवपालिक के साथ यात्रा कर रहे दो सहकर्मियों के अनुसार, 26 अक्टूबर को दोपहर करीब 2:25 बजे ट्रेन रांची स्टेशन से रवाना हुई थी। देवपालिक सी-2 कोच में सीट नंबर 50 पर बैठे थे। ट्रेन खुलने के करीब 10 मिनट बाद वे पेंट्री कार से खाना लाने की बात कहकर उठे थे, जिसके बाद वापस नहीं लौटे। बोगियों में खोजबीन और मोबाइल पर संपर्क के असफल प्रयासों के बाद रेल पुलिस को सूचना दी गई।
देवपालिक के भाई के मुताबिक, सहकर्मियों ने उसी शाम उनके लापता होने की जानकारी दी थी। अगले दिन अनगड़ा थाना क्षेत्र के जारवाडीह के पास रेलवे लाइन किनारे उनका शव मिला। इस घटना में सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि ट्रेन से लापता होने के बाद देवपालिक के साथ क्या हुआ। क्या किसी यात्री या रेलकर्मी ने उन्हें गिरते हुए देखा था? शव मिलने के स्थान और ट्रेन के रूट का क्या संबंध है? उनके मोबाइल की अंतिम लोकेशन और कॉल रिकॉर्ड्स भी अहम कड़ियां जोड़ सकते हैं।
देवपालिक के सहकर्मियों ने आरोप लगाया है कि बोकारो और मुरी में रेलवे पुलिस के बीच क्षेत्राधिकार की खींचतान के कारण एफआईआर दर्ज होने में करीब छह घंटे का समय बर्बाद हुआ। फिलहाल, पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट, घटनास्थल के फॉरेंसिक साक्ष्यों, देवपालिक के साथ यात्रा करने वाले साथियों के बयान, मोबाइल के तकनीकी रिकॉर्ड आदि की जांच में जुटी है।
--आईएएनएस
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