'जम्मू-कश्मीर से शांति, विकास और पर्यटन को डिरेल करने की कोशिश', नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रदर्शन पर एनडीए नेताओं का जवाब
नई दिल्ली, 10 जुलाई (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर नेशनल कॉन्फ्रेंस विरोध प्रदर्शन की तैयारी कर रही है। इस पर एनडीए के नेताओं ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि बहुत मुश्किल से प्रधानमंत्री मोदी ने यहां शांति, विकास और पर्यटन को पटरी पर लौटाया है, लेकिन ये दल जानबूझकर इसे डिरेल करना चाहते हैं।
भाजपा के राज्यसभा सांसद तरुण चुघ ने कहा, "यह सिर्फ ध्यान भटकाने और अपनी अक्षमता, नाकामियों और अनुभवहीनता को छिपाने की कोशिश है। यह उनके घोषणापत्र में किए गए अधूरे वादों पर पर्दा डालने की भी कोशिश है। गुपकार गैंग एक पुराने एजेंडे को फिर से जिंदा करने की कोशिश कर रहा है। अब्दुल्ला को अपना घोषणापत्र निकालकर खुद देखना चाहिए, एक भी वादा पूरा नहीं किया गया है।"
तरुण चुघ ने कहा, "जम्मू-कश्मीर को दशकों तक अलगाववादी राजनीति की आग में झोंकने वाली नेशनल कॉन्फ्रेंस आज लोकतंत्र का पाठ पढ़ाने का प्रयास कर रही है। जनवरी 1990 में जम्मू-कश्मीर को दहकते शोलों पर फेंक दिया था। एक लाख 60 हजार कश्मीरी पंडित कश्मीर से पलायन करके आ गए थे। ये दल आज जम्मू-कश्मीर में शांति, विकास और पर्यटन के इस नए दौर को नजर लगाना चाहते हैं। बहुत मुश्किल से प्रधानमंत्री मोदी ने यहां शांति, विकास और पर्यटन को पटरी पर लौटाया है, लेकिन ये दल जानबूझकर इसे डिरेल करना चाहते हैं।"
जदयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा, "अनुच्छेद 370 हटने और संसद से इसकी मंजूरी मिलने के बाद, जम्मू-कश्मीर विकास के नए रास्ते खुलने के साथ ही एक नए दौर में प्रवेश कर चुका है। मुझे उनके (फारूक अब्दुल्ला) पत्र के संदर्भ के बारे में जानकारी नहीं है। हालांकि, विकास ही असली आधार है और वहां के लोगों को इसका एहसास हो रहा है। आतंकवाद के खिलाफ हमारी लड़ाई में हमारे सैनिक लगातार सर्वोच्च बलिदान दे रहे हैं और पूरा देश मजबूती से उनके साथ खड़ा है।"
फारूक अब्दुल्ला ने 52 नेताओं को पत्र लिखा है। धरना देने का उनका खुद का निर्णय है। राज्य का मुख्यमंत्री धरना देने जा रहा है। एक समय अरविंद केजरीवाल ने जेल से ही सरकार चला दी। यह नए-नए प्रयोग हो रहे हैं।
जदयू प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने कहा, "कश्मीर में आज हालात बदल गए हैं। जो क्षेत्र अब केंद्र शासित प्रदेश है, उसने कई मामलों में काफी तरक्की की है। राज्य का दर्जा बहाल करने की उनकी मांग लोकतांत्रिक है और हर राजनीतिक दल को ऐसी मांगें उठाने का अधिकार है। केंद्र सरकार परिस्थितियों के हिसाब से समय-समय पर फैसले लेती है, इसलिए सभी दलों के नेताओं को धैर्य रखना चाहिए।"
भाजपा प्रवक्ता आरपी सिंह ने कहा, "कश्मीर के नेता यहां विरोध प्रदर्शन करने आ रहे हैं और यह उनका लोकतांत्रिक अधिकार है। लेकिन अभी जम्मू-कश्मीर में हालात ऐसे नहीं हैं कि राज्य का दर्जा दिया जा सके। सरकार प्रतिबद्ध है। जब सही समय आएगा, तो राज्य का दर्जा बहाल कर दिया जाएगा।"
बिहार सरकार में मंत्री दिलीप जायसवाल ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रदर्शन पर कहा, "फारूक अब्दुल्ला जैसे नेताओं ने आर्टिकल 370 और कश्मीर के अंदर 'दो विधान, दो निशान, दो प्रधान' की परंपरा, अलगाववादी ताकत और पत्थरबाजी का माहौल बनाकर रखा। आज जम्मू-कश्मीर का माहौल बहुत अच्छा है। युवाओं के हाथ में पत्थर नहीं, किताब और पेंसिल हैं। जिस दिन कश्मीर का माहौल इस देश की विचारधारा के साथ पूर्ण रूप से समावेशित हो जाएगा, उस दिन पूर्ण राज्य का दर्जा मिल जाएगा।"
--आईएएनएस
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