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जम्मू-कश्मीर: नेशनल कॉन्फ्रेंस का जंतर-मंतर पर प्रदर्शन, मीरवाइज ने रखी शर्तें

श्रीनगर, 10 जुलाई (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर में सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस द्वारा मीरवाइज उमर फारूक को जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन में शामिल होने का निमंत्रण दिए जाने के एक दिन बाद शुक्रवार को जामिया मस्जिद में नमाज के दौरान उन्होंने उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार के सामने कुछ शर्तें रखीं।
 

श्रीनगर, 10 जुलाई (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर में सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस द्वारा मीरवाइज उमर फारूक को जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन में शामिल होने का निमंत्रण दिए जाने के एक दिन बाद शुक्रवार को जामिया मस्जिद में नमाज के दौरान उन्होंने उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार के सामने कुछ शर्तें रखीं।

जंतर-मंतर पर प्रस्तावित नेशनल कॉन्फ्रेंस के विरोध प्रदर्शन का जिक्र करते हुए मीरवाइज ने डॉ. फारूक अब्दुल्ला से निमंत्रण मिलने की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों के अधिकारों की बहाली के लिए कोई भी नेक प्रयास स्वागत योग्य है, लेकिन उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आंदोलन केवल राज्य का दर्जा बहाल करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए।

उन्होंने कहा कि इस मांग में अनुच्छेद 370 और 35ए की बहाली, संवैधानिक सुरक्षा उपायों का संरक्षण, राजनीतिक कैदियों के अधिकार, बिना मुकदमे के या जमानत मिलने के बावजूद हिरासत में लिए गए युवाओं की रिहाई और कश्मीर संघर्ष का शांतिपूर्ण समाधान भी शामिल होना चाहिए।

दरअसल, जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा (स्टेटहुड) बहाल करने की मांग को लेकर नेशनल कॉन्फ्रेंस संसद के आगामी मानसून सत्र के पहले दिन नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन करेगी। पार्टी अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने देश के 52 प्रमुख राजनीतिक नेताओं, जम्मू-कश्मीर के विभिन्न दलों के नेताओं और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों को इस प्रदर्शन में शामिल होने का निमंत्रण भेजा है।

सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस ने मीरवाइज मौलवी उमर फारूक को भी जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा दिलाने के लिए जंतर-मंतर पर प्रस्तावित अपने धरने में शामिल होने के लिए औपचारिक रूप से आमंत्रित किया है।

डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने अपने पत्र में कहा कि वह यह अपील सिर्फ नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष के रूप में नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर विधानसभा के पूर्व सदस्य और सार्वजनिक जीवन के लंबे अनुभव के आधार पर कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों के हितों और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए सभी राजनीतिक दलों को एकजुट होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 हटाने, जम्मू-कश्मीर का पुनर्गठन कर उसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटने और राज्य का दर्जा समाप्त करने का फैसला लिया गया था। उस समय संसद में केंद्र सरकार ने स्पष्ट रूप से आश्वासन दिया था कि उचित समय पर जम्मू-कश्मीर को फिर से राज्य का दर्जा दिया जाएगा। जम्मू-कश्मीर के लोगों ने इन आश्वासनों पर भरोसा किया और किसी तरह का आंदोलन करने के बजाय लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लिया। वर्ष 2024 में शांतिपूर्ण ढंग से विधानसभा चुनाव हुए और जनता ने अपना जनादेश दिया। उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व में निर्वाचित सरकार काम कर रही है, लेकिन अब तक राज्य का दर्जा बहाल नहीं किया गया है।

--आईएएनएस

एमएस/