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जैविक खाद में आत्मनिर्भर बनाने के लिए सूरत के किसान का यज्ञ : 'धनजीवामृत' का औद्योगिक स्तर पर उत्पादन किया शुरू

सूरत, 29 अप्रैल (आईएएनएस)। समग्र राज्य में हाल में गर्मी का पारा 44 डिग्री से ऊपर जा रहा है। ऐसे समय में सूरत के मांगरोलिया गांव में कमलेश पटेल के खेत में 20 से अधिक मजदूर खरीफ मौसम से पहले प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों के लिए ‘धनजीवामृत’ बनाने में व्यस्त हैं।
 
जैविक खाद में आत्मनिर्भर बनाने के लिए सूरत के किसान का यज्ञ : 'धनजीवामृत' का औद्योगिक स्तर पर उत्पादन किया शुरू

सूरत, 29 अप्रैल (आईएएनएस)। समग्र राज्य में हाल में गर्मी का पारा 44 डिग्री से ऊपर जा रहा है। ऐसे समय में सूरत के मांगरोलिया गांव में कमलेश पटेल के खेत में 20 से अधिक मजदूर खरीफ मौसम से पहले प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों के लिए ‘धनजीवामृत’ बनाने में व्यस्त हैं।

सूरत जिले की पलसाणा तहसील के अंभेटी गांव के किसान कमलेश पटेल प्राकृतिक खेती करते हैं। इतना ही नहीं वे देश में रासायनिक खाद का आयात कम हो तथा उसके सुदृढ़ विकल्प के रूप में धनजीवामृत लाखों किसानों तक पहुंचे, इस संकल्प के साथ बड़े पैमाने पर धनजीवामृत तैयार कर रहे हैं। कृषि विभाग द्वारा प्राकृतिक खेती का प्रचार करने के लिए किसानों को प्रशिक्षण दिया जाता है तथा मास्टर ट्रेनर तैयार किए जाते हैं। कमलेश पटेल भी मास्टर ट्रेनर हैं तथा अनेक किसानों को प्राकृतिक खेती करने की प्रेरणा देते हैं।

राज्य में हाल में 8 लाख से अधिक किसानों ने रासायनिक खाद को त्याग कर संपूर्ण प्राकृतिक खेती की ओर मुड़े हैं। साढ़े पांच हेक्टेयर से अधिक जमीन में प्राकृतिक हो रही है। प्राकृतिक खेती का दायरा बढ़ने से रासायनिक खाद के विकल्प के रूप में जीवामृत तथा धनजीवामृत का उपयोग होता है और उसकी मांग लगातार बढ़ रही है।

आगामी 1 मई को सूरत में आयोजित होने वाली वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस (वीजीआरसी) के पहले दिन ‘रासायनिक खाद में आत्मनिर्भरता खाद क्षेत्र में आयात के विकल्प की रणनीतियां’ विषय पर चर्चा होगी। कमलेश पटेल इस चर्चा में सहभागी होंगे।

वर्ष 2017 से प्राकृतिक खेती कर रहे कमलेश पटेल ने धनजीवामृत का औद्योगिक स्तर पर उत्पादन शुरू किया है। वे प्रतिदिन 1000 बैग (एक बैग का वजन 40 किलो) तैयार करते हैं और समग्र राज्य तथा राज्य से बाहर उसकी बिक्री करते हैं। उन्होंने चालू वर्ष में दैनिक 2000 बैग तैयार करने का लक्ष्य रखा है।

गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन में राज्य में प्राकृतिक खेती का विस्तार हो रहा है। गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत राज्य के गांव-गांव जा रहे हैं और किसानों को प्राकृतिक खेती की ओर मोड़ रहे हैं। इन तमाम प्रयासों के फलस्वरूप किसान रासायनिक खादों का उपयोग बंद कर उसके विकल्प के रूप में जीवामृत व धनजीवामृत का जैविक खाद के रूप में उपयोग कर प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। ये खाद जमीन में सुधार लाते हैं, खेत में सूक्ष्म जीवों की वृद्धि करते हैं, जमीन के पोषक तत्वों में वृद्धि करते हैं और उत्पादन बढ़ाते हैं।

कमलेश पटेल ने कहा, “अधिक से अधिक किसान प्राकृतिक खेती की ओर मुड़ रहे हैं। उन्हें जीवामृत व धनजीवामृत की जरूरत पड़ती है। गत वर्ष हमने 50,000 थैलियां (40 किलो की एक थैली) बेची थीं और इस वर्ष एक लाख धनजीवामृत की थैली का उत्पादन करने की योजना है।”

साल 2016 में कमलेश पटेल ने सुभाष पालेकर द्वारा आयोजित तीन दिवसीय ‘जीरो बजट प्राकृतिक खेती’ संबंधी सेमिनार में भाग लिया था तथा वे उनसे बहुत प्रभावित हुए और उसी क्षण उन्होंने रासायनिक खाद को त्याग दिया तथा प्राकृतिक खेती का मार्ग अपनाया।

वर्ष 2017 में कमलेश पटेल को गन्ने की खेती में प्राकृतिक खेती से उत्तम परिणाम प्राप्त हुए। गन्ने का प्रति बीघा उत्पादन 45 टन हुआ। यह चमत्कार देखकर गांव के किसानों ने भी इस पद्धति को अपनाने की तैयारी दर्शाई, लेकिन उनके पास जीवामृत व धनजीवामृत नहीं था। वे इन्हें बनाने के झंझट में पड़ना नहीं चाहते थे। इसलिए किसानों ने कमलेश पटेल को इन दोनों उर्वरकों का बड़े पैमाने पर उत्पादन करने की प्रेरणा दी और कमलेश पटेल ने जीवामत तथा धनजीवामृत का बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू किया। गुजरात सरकार ने उनकी आर्थिक सहायता भी की। हाल में कमलेश पटेल दैनिक औसत 40,000 किलो धनजीवामृत तथा 1,000 लीटर जीवामृत तैयार कर बेचते हैं। वे धनजीवामृत 6 रुपए प्रति किलो तथा जीवामृत 5 रुपए प्रति लीटर की दर से बेचते हैं।

राज्य सरकार के कृषि विभाग द्वारा जीवामृत बनाने के लिए उन्हें बायो रिसोर्स सेंटर (बीआरसी) के लिए सब्सिडी दी जाती है। कृषि विभाग ने धनजीवामृत बनाने के लिए भी आर्थिक सहायता की है।

--आईएएनएस

एसके/