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जयशंकर ने की पी4एम समिट की अध्यक्षता, कहा- वर्ल्ड ऑर्डर दबाव में, बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करना जरूरी

नई दिल्ली, 22 सितंबर (आईएएनएस)। संयुक्त राष्ट्र महासभा के हाई-लेवल सेशन के लिए न्यूयार्क पहुंचे विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा के साथ ‘पार्टनर्स फॉर मल्टीलेटरलिज्म, इंटरनेशनल लॉ, पीस एंड प्रॉस्पेरिटी (पी4एम)’ शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता की।
 

नई द‍िल्‍ली, 22 सितंबर (आईएएनएस)। संयुक्त राष्ट्र महासभा के हाई-लेवल सेशन के ल‍िए न्‍यूयार्क पहुंचे विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा के साथ ‘पार्टनर्स फॉर मल्टीलेटरलिज्म, इंटरनेशनल लॉ, पीस एंड प्रॉस्पेरिटी (पी4एम)’ शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता की।

सोशल मीड‍िया प्‍लेटफॉर्म 'एक्‍स' पोस्‍ट में ल‍िखा, “यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा के साथ ‘पार्टनर्स फॉर मल्टीलेटरलिज्म, इंटरनेशनल लॉ, पीस एंड प्रॉस्पेरिटी (पी4एम)’ शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता करके खुशी हुई।''

व‍िदेश मंत्रालय के अनुसार, सम्‍मेलन को संबोध‍ित करते हुए व‍िदेश मंत्री जयशंकर ने भारत को को-स्पॉन्सर के तौर पर इसमें शामिल करने पर खुशी जाह‍िर की। साथ ही प्रेसिडेंट एंटोनियो कोस्टा का आभार व्‍यक्‍त क‍िया।

मंत्री जयशंकर ने कहा क‍ि हम ऐसे समय में मिल रहे हैं, जब दुनिया की मौजूदा व्यवस्था दबाव में है। पिछले कुछ दशकों में दुनिया में ताकत का संतुलन धीरे-धीरे बदलता रहा है। यह एक ऐसा बड़ा बदलाव था, जिसकी लंबे समय से उम्मीद की जा रही थी। लेकिन अब बहुत ज्यादा प्रतिस्पर्धा, भू-राजनीतिक तनाव और वास्तविक संघर्षों ने इस बदलाव को बिल्कुल अलग रूप दे दिया है।

अगर इसे ऐसे ही बढ़ने दिया गया, तो इससे अंतरराष्ट्रीय सहयोग की मूल भावना पर ही सवाल खड़े हो सकते हैं। यही वजह है कि इस समय बहुपक्षीय सहयोग को मजबूती से आगे बढ़ाना बेहद जरूरी है।

उन्‍होंने कहा क‍ि यहां सिर्फ शब्दों या बयानों की बात नहीं है, बल्कि कई ऐसे मुद्दे दांव पर हैं जिनका वास्तविक असर पूरी दुनिया पर पड़ता है।

शांति और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा का भविष्य, जलवायु के लिए कार्रवाई और जलवायु न्याय, नई तकनीक, विकास के लिए वित्तीय मदद, आतंकवाद का मुकाबला, सप्लाई चेन को मजबूत बनाना, आपदाओं से निपटने की क्षमता बढ़ाना और महामारियों के लिए तैयारी, ये सभी इस बात पर निर्भर करते हैं कि हम आपस में मिलकर काम करने के लिए कितने तैयार हैं।

उन्‍होंने कहा क‍ि हमें यह समझना होगा कि हमने अब तक जो भी हासिल किया है, वह सामूहिक कोशिशों से ही संभव हुआ है। इससे हमें यही सीख मिलती है कि जो अच्छा हासिल किया गया है, उसे बचाकर रखा जाए और साथ ही उसे और बेहतर बनाने की कोशिश की जाए।

व‍िदेश मंत्री ने कहा क‍ि इस लक्ष्य को कई अलग-अलग कोशिशों और पहलों को मिलाकर हासिल किया जा सकता है। जहां मौजूदा संघर्षों की बात है, वहां व्यापक शांति के लिए कोशिश जारी रखते हुए संघर्ष से जुड़े खास मुद्दों पर भी अलग से काम किया जा सकता है।

फ्यूल, फूड, फर्टिलाइजर और फाइनेंस से जुड़े ‘4-एफ संकट’ को अपने हाल पर नहीं छोड़ा जा सकता। जहां नई क्षमताएं और नई चिंताएं सामने आ रही हैं, वहां उनके लिए स्पष्ट नियम, ढांचे और जरूरी सुरक्षा व्यवस्था बनाने की मजबूत जरूरत है।

उन्‍होंने कहा क‍ि जहां किसी अहम सप्लाई या रास्ते पर किसी एक का ज्यादा नियंत्रण होने या उसमें रुकावट आने का खतरा हो, वहां जोखिम कम करने और विकल्प बढ़ाने को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। जहां कोई अहम मुद्दा हो या किसी कदम के पक्ष में मजबूत वजह हो, वहां एक जैसी सोच रखने वाले देशों को साथ आने का भरोसा होना चाहिए। बहुपक्षीय सहयोग तभी बेहतर तरीके से आगे बढ़ सकता है, जब अंतरराष्ट्रीय कानून, नियमों और तय मानकों का पूरी गंभीरता से पालन किया जाए।

मंत्री ने कहा क‍ि बहुपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए सिर्फ उसका समर्थन करना ही काफी नहीं है, बल्कि उसे असल में लागू करने के तरीके को भी मजबूत करना होगा। इसलिए बहुपक्षीय व्यवस्था में सुधार बेहद जरूरी है।

उन्‍होंने कहा क‍ि चर्चाओं में ज्यादा भागीदारी और फैसले लेने की प्रक्रिया में ज्यादा पारदर्शिता लंबे समय से जरूरी है। इससे संयुक्त राष्ट्र की व्यवस्था में वह उम्मीद और सकारात्मक सोच पैदा हो सकती है, जिसकी इस समय साफ तौर पर जरूरत है। साथ ही, इससे मिलकर काम करने का हमारा इरादा भी और मजबूत होगा।

बैठक के दौरान व‍िदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अन्‍य देश के नेताओं से भी मुलाकात की और भारत के द्विपक्षीय संबंध मजबूत करने पर चर्चा की।

जयशंकर ने सोशल मीड‍िया 'एक्‍स' पोस्‍ट पर ल‍िखा, ''यूएनजीए-81 सत्र के दौरान मोल्दोवा के विदेश मंत्री मिहाई पोपसोई के साथ अच्छी बैठक हुई। हमने भारत और मोल्दोवा के बीच राजनीतिक, आर्थिक और शिक्षा के क्षेत्र में बढ़ते संबंधों और हुई प्रगति पर चर्चा की। साथ ही, यूक्रेन संघर्ष को लेकर भी एक-दूसरे के विचार साझा किए।''

एक अन्‍य पोस्‍ट पर ल‍िखा, ''हाल ही में यूक्रेन की मेरी यात्रा के बाद, वहां के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा से एक बार फिर मिलने का मौका मिला, जिसका मैंने स्वागत किया। हमारी बातचीत पिछले कुछ हफ्तों में हुए घटनाक्रम पर केंद्रित रही।''

--आईएएनएस

एवाई/एएस