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जगन्नाथ रथ यात्रा में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब, भगवान के रंग में रंगे भक्त

पुरी, 18 जुलाई (आईएएनएस)। ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा 16 जुलाई से शुरू होकर 24 जुलाई तक चलेगी। आषाढ़ शुक्ल द्वितीया से शुरू हुए इस नौ दिवसीय उत्सव में भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा विशाल रथों पर विराजमान होकर नगर भ्रमण पर निकले। इस दौरान लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए उमड़े और भक्ति में भाव-विभोर नजर आए। कई श्रद्धालुओं ने आईएएनएस से बातचीत में अपनी आस्था और अनुभव बयां किए।
 

पुरी, 18 जुलाई (आईएएनएस)। ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा 16 जुलाई से शुरू होकर 24 जुलाई तक चलेगी। आषाढ़ शुक्ल द्वितीया से शुरू हुए इस नौ दिवसीय उत्सव में भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा विशाल रथों पर विराजमान होकर नगर भ्रमण पर निकले। इस दौरान लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए उमड़े और भक्ति में भाव-विभोर नजर आए। कई श्रद्धालुओं ने आईएएनएस से बातचीत में अपनी आस्था और अनुभव बयां किए।

हंगरी की श्रद्धालु राधिका लीला देवी ने कहा, "यहां श्रद्धालुओं को देखकर मेरे रोंगटे खड़े हो जाते हैं। उनके चेहरों पर अलग-अलग भाव दिखाई देते हैं। कोई रो रहा है तो कोई मुस्कुरा रहा है। अभी मैंने एक महिला को भगवान को चावल का भोग लगाते देखा। यहां सभी की भक्ति देखकर मैं भावुक हो जाती हूं। मेरी आंखों में सिर्फ इसलिए आंसू नहीं आते कि मैं भगवान से प्रेम करती हूं, बल्कि इसलिए भी कि मैं उनसे बार-बार पूछती हूं, 'मुझे आपके लिए ऐसा गहरा प्रेम कब महसूस होगा?' भगवान सबसे शक्तिशाली चुंबक की तरह हैं। उनसे अधिक शक्तिशाली कुछ भी नहीं है।"

उन्होंने कहा, "भगवान ने पूरी दुनिया को अपनी ओर आकर्षित कर रखा है। आप देख सकते हैं कि यहां लोगों को किसी भी प्रकार की चिंता नहीं है। सभी भगवान की भक्ति में लीन हैं। यहां हर किसी का भगवान के प्रति गहरा जुड़ाव दिखाई देता है और भगवान भी हर किसी को अपने स्नेह का एहसास कराते हैं। मैं काफी समय से यहां रहकर इस दिव्य अनुभव को महसूस कर रही हूं।"

उन्होंने कहा, "मैं सभी से कहना चाहती हूं कि हर किसी को यहां कम से कम एक बार जरूर आना चाहिए, खासकर रथ यात्रा के दौरान। वैसे तो श्रद्धालु मंदिर के भीतर जाकर भगवान के दर्शन कर सकते हैं, लेकिन जब रथ यात्रा में भगवान स्वयं बाहर निकलकर सभी भक्तों को दर्शन देते हैं, तो वह अनुभव बिल्कुल अलग होता है।"

राधिका लीला देवी ने बताया कि वे पुरी पांच-छह बार आ चुकी हैं, लेकिन यह उनकी दूसरी रथ यात्रा है। उन्होंने कहा, "जब मैं पहली बार रथ यात्रा में आई थी, तब मैंने भगवान से वादा किया था कि यदि उनकी इच्छा होगी तो मैं आगे कोई भी रथ यात्रा नहीं छोड़ूंगी। अब यदि भगवान बुलाएंगे तो मैं फिर जरूर आऊंगी।"

एक अन्य श्रद्धालु ने कहा, "जब मैं भगवान के दर्शन करती हूं तो लगता है कि जीवन का सारा दुख-दर्द समाप्त हो गया है। मैं भगवान से प्रार्थना करती हूं कि वे सभी को सद्बुद्धि दें, दुनिया में शांति बनाए रखें और हाल में चल रहे सभी संघर्ष समाप्त हों। भगवान सभी पर अपनी कृपा बनाए रखें।"

उन्होंने कहा कि प्रशासन की ओर से बेहतर प्रबंधन किया गया है। भारी भीड़ के बावजूद श्रद्धालुओं को अधिक कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़ा।

एक अन्य श्रद्धालु ने कहा, "मैं रथ यात्रा में शामिल होकर बहुत आनंदित हूं। भगवान सभी को बिना किसी भेदभाव के दर्शन दे रहे हैं, जिससे हर श्रद्धालु उनके दर्शन का सौभाग्य प्राप्त कर रहा है। यह अनुभव हम सभी के लिए बेहद विशेष और अविस्मरणीय है।"

--आईएएनएस

एनएस/एएस