जब 'नेशन फर्स्ट' की भावना से काम होता है तो कोई निर्णय कठिन नहीं होता : पीएम मोदी
नई दिल्ली, 10 जून (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के नेताओं को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि आज विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं महत्वपूर्ण चुनौतियों का सामना कर रही हैं। इस वैश्विक मंदी के बावजूद, भारत ने 2025-26 में 7.7 प्रतिशत की उल्लेखनीय विकास दर हासिल की। 31 मार्च को समाप्त हुई पिछली तिमाही में भारत की विकास दर 7.8 प्रतिशत रही।
उन्होंने कहा कि पहले पूर्वोत्तर भारत में बम और बंदूक थमने का नाम नहीं लेते थे। हमने पूर्वोत्तर भारत में शांति भी लौटाई और स्थिरता भी लेकर आए। पहले भारत आतंकी हमलों के बाद चुपचाप दर्द सहता रहता था। हमने आतंकियों पर सर्जिकल स्ट्राइक और एयरस्ट्राइक की, और ऑपरेशन सिंदूर में भारत का सामर्थ्य दुनिया ने देखा। पूर्वोत्तर भारत में हिंसा चरम पर थी, लेकिन हमने इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल की है। पहले भारत चुपचाप आतंकवादी हमलों को सहन करता था। अब हमने आतंकवादियों के खिलाफ सटीक और हवाई हमले करके जवाब दिया है, जैसा कि ऑपरेशन सिंदूर में दिखाया गया है, जिससे भारत का संकल्प और शक्ति दुनिया के सामने प्रदर्शित हुई है।
उन्होंने कहा कि दल से बड़ा देश है और जब नेशन फर्स्ट की भावना से काम होता है, तो कोई भी निर्णय कठिन नहीं होता। ऐसे फैसले, जिन्हें पहले असंभव समझा गया और जो देश के सुरक्षित भविष्य के लिए अनिवार्य थे, हमने बहुत ही सधे हुए तरीके से उन फैसलों को भी लिया। पहले की सरकारें अनुच्छेद 370 की बात करने से डरती थीं, हमने अनुच्छेद 370 हटाकर पूरे देश में संविधान को समान रूप से लागू किया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि हम मध्यम वर्ग के सामने आने वाली चुनौतियों और बेहतर भविष्य की उनकी आकांक्षाओं को समझते हैं। उनकी सहायता के लिए, 12 लाख रुपए प्रति वर्ष तक की आय अब कर मुक्त है। आज देश एक सरल और पारदर्शी कर प्रणाली से लाभान्वित हो रहा है। बेहतर बुनियादी ढांचे ने दैनिक जीवन को आसान बना दिया है, और पिछले 12 वर्षों में मध्यम वर्ग के बच्चों के लिए नए अवसर सृजित हुए हैं।
उन्होंने कहा कि राष्ट्र किसी भी राजनीतिक दल से बड़ा है, और जब हम 'राष्ट्र सर्वोपरि' की भावना से काम करते हैं, तो कोई भी निर्णय कठिन नहीं होता। हमने उन निर्णयों पर साहसिक और विचारशील कदम उठाए हैं, जिन्हें कभी असंभव माना जाता था, लेकिन देश के सुरक्षित भविष्य के लिए आवश्यक थे। एनर्जी, मिनरल्स, चिप, बैटरी स्टोरेज, स्पेस, ड्रोन, डेटा सेंटर्स, क्वांटम कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस... ऐसे हर सेक्टर, हर तकनीक एक दूसरे से जुड़ी हुई है। ये एक दूसरे की पूरक हैं। भारत इनके लिए विदेशों पर निर्भर नहीं रह सकता क्योंकि ये भारत की आर्थिक और रणनीतिक, हर प्रकार की सुरक्षा से जुड़े विषय हैं। और तभी भारत सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम पर इतना फोकस कर रहा है, तभी क्रिटिकल मिनरल्स को लेकर मिशन मोड पर काम चल रहा है।
उन्होंने कहा कि ये 12 वर्ष सरकार और समाज की सहभागिता का उत्सव मनाने वाले रहे हैं। बीते 12 वर्षों में मैंने देशवासियों से जो भी सहयोग मांगा, देश ने दिल खोलकर साथ दिया। मैंने स्वच्छता का आग्रह किया, तो पूरा देश निकल पड़ा। मैंने डिजिटल पेमेंट अपनाने का आह्वान किया, तो भारत रियल टाइम ट्रांजैक्शन में दुनिया में आगे निकल गया। मैंने कोरोना महामारी के दौरान एकजुटता और संयम का आग्रह किया, तो देश ने मिलकर उस महामारी का सामना किया। जनता ने कभी हमें निराश नहीं किया। आने वाले समय में भी हमें इसी जनविश्वास और जनभागीदारी के साथ आगे बढ़ना है।
उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में, हमने ऊर्जा सुरक्षा में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की है। लाल किले की प्राचीर से, मैंने महत्वाकांक्षी समुद्र मंथन मिशन की घोषणा की, जो हमारे राष्ट्र की आकांक्षाओं को प्रतिबिंबित करता है। हाल के दिनों में, हमें तेल और गैस अन्वेषण के संबंध में उत्साहजनक समाचार प्राप्त हुए हैं, जो नई संभावनाओं से भरे भविष्य का संकेत देते हैं। यह आवश्यक है कि हम अपने सामने आने वाले प्रत्येक अवसर का लाभ उठाएं। अब, हमें 500 गीगावाट के लक्ष्य तक पहुंचने के अपने प्रयासों को तेज करना होगा। सौर ऊर्जा में प्रगति तेजी से हो रही है, लेकिन परमाणु ऊर्जा लक्ष्यों को प्राप्त करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। हाल ही में, हमने विश्व को दिखाया कि भारत ने फास्ट ब्रीडर रिएक्टर प्रौद्योगिकी में प्रगति की है, जो एक मील का पत्थर है, जो हमें परमाणु ऊर्जा में आत्मनिर्भरता की ओर ले जाएगा।
--आईएएनएस
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