जब फ्रांस पर कोई हमला नहीं करता तो होर्मुज में हम अपने सैनिक क्यों भेजें : मार्क गयोन
नई दिल्ली, 3 अप्रैल (आईएएनएस)। ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच भीषण संघर्ष की वजह से होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने का सीधा असर दूसरे देशों की अर्थव्यवस्था पर हो रहा है। कई देशों में तेल संकट और महंगाई की स्थिति देखने को मिल रही है। तमाम देशों का इस संघर्ष को लेकर अपना नजरिया है। इस बीच अमेरिका-ईरान संघर्ष पर फ्रांस के नजरिए को लेकर फ्रांसीसी काउंसलर मार्क गयोन ने आईएएनएस से खास बातचीत की।
सवाल : फ्रांस के नजरिए से, आप इस संघर्ष को कैसे देखते हैं?
जवाब : अब मैं चुनाव का उम्मीदवार हूं, मैं अपनी तरफ से बस इतना ही कह सकता हूं कि यह फ्रेंच अधिकारियों के बारे में नहीं है। मैं कोई डिप्लोमैट नहीं हूं, लेकिन मैं हांगकांग में एक फ्रेंच नागरिक के तौर पर अपनी व्यक्तिगत राय दे सकता हूं। मुझे लगता है कि यह एक बड़ी गड़बड़ है क्योंकि हर चीज, हर कोई इससे प्रभावित है। फ्यूल की कीमतों पर असर पड़ा है, ट्रैवलिंग कॉस्ट पर असर पड़ा है। मुझ पर भी असर पड़ा है। जंग तब शुरू हुई जब मैं दो हफ्ते पहले फ्रांस में था और मैंने अपनी रिटर्न टिकट बुक नहीं की थी। इसलिए इससे सबके लिए सब कुछ मुश्किल हो गया है। मैं बस उम्मीद करता हूं कि ऐसा न हो। तो, मेरे लिए, मेरी मिली-जुली भावनाएं हैं क्योंकि मैं पहले, मैं अब भी ट्रंप का बड़ा समर्थक हूं। लेकिन, अब जो हो रहा है, मुझे लगता है, वह कुछ ऐसा नहीं है, जिसकी मैंने उम्मीद की थी। मैं बस इतना ही कह सकता हूं।
सवाल : गल्फ रीजन में तनाव कम करने में डिप्लोमेसी का क्या रोल है?
जवाब : डिप्लोमेसी एक चीज है, लेकिन आजकल मुझे नहीं लगता कि डिप्लोमेसी इतनी जरूरी है क्योंकि बहुत से लोग पावर शो-ऑफ वगैरह पर ज्यादा फोकस करते हैं। एक बार फिर, मुझे लगता है कि एक फ्रेंच नागरिक के नजरिए से और हांगकांग और मकाऊ में चुने हुए फ्रेंच लोगों के तौर पर, मुझे मिडिल ईस्ट में रहने वाले फ्रेंच लोगों की ज्यादा चिंता है। ऊर्जा संकट वगैरह को लेकर मैं बस उम्मीद करता हूं कि जंग जल्द से जल्द खत्म हो जाए और इसका लोगों पर असर न पड़े। जैसे आपने मुझसे अभी मेरे चुनाव के बारे में इंटरव्यू के लिए पूछा, मेरा चुनाव लोगों के बारे में है, हांगकांग में रहने वाले फ्रेंच लोगों के बारे में, लेकिन बेशक, दुनिया में हर जगह, भारत में, मिडिल ईस्ट में वगैरह, तो यह असल में कोई भूराजनीतिक चुनाव नहीं है, यह फ्रेंच समुदाय के लिए कुछ प्रैक्टिकल, जानकारी और रोजमर्रा के मामलों के बारे में ज्यादा है।
सवाल : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आपके प्रेसिडेंट और उनकी पत्नी के बारे में एक व्यक्तिगत टिप्पणी की। आप इसे कैसे देखते हैं?
जवाब : मुझे सच में कोई फर्क नहीं पड़ता। ये कुछ मजेदार बातें हैं। मैं इन बातों से हैरान नहीं हूं। मुझे यह थोड़ा मजेदार लगता है, हालांकि यह कुछ बहुत अच्छा नहीं है। यह बहुत डिप्लोमैटिक नहीं है। मैं मैक्रों का समर्थक नहीं हूं, लेकिन मैं इस बात की इज्जत करता हूं कि वह फ्रांस के हितों की रक्षा करने की कोशिश कर रहे हैं। साथ ही, मुझे ट्रंप पसंद हैं, लेकिन मैं उनकी हर बात और उनके कहने के तरीके को 100 प्रतिशत समर्थन नहीं करता।
सवाल : आपके हिसाब से, फ्रांस और ब्रिटेन ने अमेरिका के कुछ सैन्य कार्रवाई में हिस्सा क्यों नहीं लिया?
जवाब : आप मेरे अपने नजरिए से सही कह रहे हैं। मैं कॉन्सुलेट नहीं हूं या मैं फ्रेंच सरकार की तरफ से नहीं बोल रहा हूं, लेकिन मेरा अपना नजरिया यह है कि यह हमारा काम नहीं है। फ्रांस में हमें कई समस्याओं का समाधान करना है और यह कुछ सैनिक भेजने और शायद मिडिल ईस्ट में कुछ फ्रेंच लोगों की जान जोखिम में डालने का सही समय नहीं है। यह हमारी लड़ाई नहीं है। मैं समझ सकता हूं कि ट्रंप ऐसा क्यों करते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि मैं इसका समर्थन करता हूं। इसका मतलब यह नहीं है कि मैं चाहता हूं कि इस लड़ाई के लिए फ्रेंच पैसे का इस्तेमाल हो और इसका मतलब यह नहीं है कि मैं चाहता हूं कि फ्रांसीसी सैनिक वहां भेजे जाएं और मरें। कोई फ्रांस पर अटैक नहीं करता, है न? मुझे नहीं लगता कि हमारे सैनिकों के लिए वहां कुछ करने को है।
सवाल : ब्रिटेन ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को देखते हुए हार्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने के बारे में बात करने के लिए 30 से ज्यादा देशों को बुलाया है। आप इसे अपने नजरिए से कैसे देखते हैं?
जवाब : मुझे नहीं पता। मैंने सच में नहीं देखा कि यूके ने क्या किया, लेकिन मैं बस इतना कह रहा हूं कि यूके भी ज्यादातर यूरोपीय देशों जैसी ही मुश्किल में है। तो हम बस जिंदा रहने की कोशिश कर रहे हैं और जो कुछ भी कर सकते हैं, कर रहे हैं, लेकिन इस लड़ाई में उन्हें और भी बहुत सी दिक्कतें सुलझानी हैं। इसलिए मैं इस बारे में और ज्यादा नहीं कह सकता।
सवाल : आपके नजरिए से, ईरान के साथ तनाव से वेस्ट एशिया में अमेरिका का दखल कितना प्रभावित हुआ है?
जवाब : मेरे लिए, मैं एक देशभक्त हूं और मैं संप्रभुता के पक्ष में हूं। इसलिए अमेरिका जितना ज्यादा अपने काम का ध्यान रखेगा, उतना ही अच्छा है।
सवाल : आप मिडिल ईस्ट, खाड़ी देशों में युद्ध की स्थिति और सभी देशों पर इसके असर को कैसे देखते हैं?
जवाब : यह एक बड़ी गड़बड़ है और इसे जल्द से जल्द रोकना होगा, क्योंकि हम, एशिया समेत दुनिया का कोई भी देश इस युद्ध का खर्च नहीं उठा सकता।
--आईएएनएस
केके/एबीएम
