जब चमचमाती रंग-बिरंगी रोशनी में नहाई दिखती है पृथ्वी, जानें क्या है 'एयरग्लो', 'ऑरोरा' से कैसे है अलग?
नई दिल्ली, 22 मई (आईएएनएस)। पृथ्वी के वायुमंडल में एक शानदार और रहस्यमयी चमक लगातार दिखती रहती है, जिसे वैज्ञानिक ‘एयरग्लो’ कहते हैं। हाल ही में इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (आईएसएस) से ली गई एक तस्वीर में पृथ्वी नारंगी रोशनी में नहाई हुई दिख रही है। यह खूबसूरत चमक एयरग्लो की ही देन है।
एयरग्लो सिर्फ सुंदर दृश्य ही नहीं है। वैज्ञानिकों के लिए यह बहुत उपयोगी है। इससे ऊपरी वायुमंडल का तापमान, घनत्व, संरचना और हवाओं की गति का पता चलता है। यह दिखाता है कि ऊंची हवाएं आयनमंडल में कैसे घूमती हैं और विभिन्न गैसों को पूरी पृथ्वी पर कैसे फैलाती हैं। 13 अप्रैल 2026 को नासा के अंतरिक्ष यात्री क्रिस विलियम्स ने स्पेसएक्स ड्रैगन यान से एक खूबसूरत तस्वीर खींची, जिसमें एयरग्लो के ऊपर मिल्की वे गैलेक्सी भी साफ दिख रही है। नासा ने ऑफिशियल इंस्टाग्राम पर तस्वीर को पोस्ट करते हुए एयरग्लो की खूबसूरती दिखाई।
अब समझते हैं कि एयरग्लो क्या है? जब सूर्य से आने वाली किरणें (रेडिएशन) पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल में मौजूद अणुओं और परमाणुओं से टकराती हैं, तो वे उत्तेजित हो जाते हैं। इनमें अतिरिक्त ऊर्जा भर जाती है। जैसे-जैसे ये अणु अपनी सामान्य शांत अवस्था में वापस लौटते हैं, वे उस अतिरिक्त ऊर्जा को प्रकाश के रूप में छोड़ देते हैं। यही प्रकाश एयरग्लो कहलाता है।
यह चमक लाल, हरा, बैंगनी और पीले रंग की हो सकती है। यह घटना दिन-रात लगातार होती रहती है, लेकिन इतनी हल्की होती है कि सामान्य आंखों से आसानी से नहीं दिखती। इसे देखने के लिए या तो अंतरिक्ष से देखना पड़ता है या फिर पृथ्वी पर बहुत अंधेरे स्थान पर संवेदनशील कैमरे की मदद लेनी पड़ती है।
एयरग्लो को अक्सर ऑरोरा प्रकाश से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन दोनों में बड़ा अंतर है। ऑरोरा तब बनता है जब सूर्य की हाई एनर्जी वाली सोलर वाइंड के कण पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से टकराकर वायुमंडल में उत्तेजना पैदा करते हैं।
वहीं, एयरग्लो सामान्य सूर्य की रोशनी से उत्पन्न होता है। यह रोजमर्रा की सौर विकिरण का नतीजा है। कभी-कभी सूर्य की रोशनी से आयनित हुए अणु मुक्त इलेक्ट्रॉनों से टकराकर भी प्रकाश छोड़ते हैं। दोनों ही स्थितियों में फोटॉन यानी प्रकाश कण निकलता है, जो देखने में बेहद सुंदर चमक दिखाता है।
--आईएएनएस
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