ईयू ने इजरायल-लेबनान के बीच हुए शांति समझौते का स्वागत किया
ब्रसेल्स, 27 जून (आईएएनएस)। यूरोपीय संघ ने इजरायल और लेबनान के बीच हुए समझौते का स्वागत किया है और इसे तनाव कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। ईयू आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसे शांति की ओर बढ़ाया कदम करार दिया।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उन्होंने कहा कि मध्य पूर्व में तब तक शांति संभव नहीं है जब तक लेबनान में स्थिति अस्थिर बनी रहती है। समझौते में मध्यस्थता के लिए उन्होंने संयुक्त राज्य अमेरिका का आभार भी व्यक्त किया।
उर्सुला ने कहा, "आगे का मुख्य कदम गैर-राज्य समूहों के निरस्त्रीकरण और लेबनान की संप्रभुता तथा क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करना है। दीर्घकालिक क्षेत्रीय स्थिरता के लिए इस प्रक्रिया का हम समर्थन करने को तैयार हैं और विस्थापितों के लिए मानवीय सहायता जारी रखते हुए 100 मिलियन यूरो की अतिरिक्त सहायता भी जुटाई गई है।"
अमेरिका की मध्यस्थता में लेबनान और इजरायल के बीच 26 जून को एक नए त्रिपक्षीय फ्रेमवर्क समझौते पर वाशिंगटन में हस्ताक्षर हुए। इस शांति समझौते का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच स्थायी शांति की रूपरेखा तैयार करना और दक्षिणी लेबनान में धीरे-धीरे लेबनानी सेना की तैनाती करना है।
लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन ने शुक्रवार को वॉशिंगटन में हुए लेबनान-इजरायल फ्रेमवर्क समझौते को देश की पूर्ण संप्रभुता बहाल करने की दिशा में पहला महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि सरकार इस प्रक्रिया को पूरा होने तक निरंतर प्रयास करती रहेगी।
लेबनानी राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से जारी बयान में आउन ने कहा कि यह समझौता विस्थापित लेबनानी नागरिकों की अपने घरों और जमीन पर वापसी का मार्ग प्रशस्त करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि लेबनान अब किसी भी प्रकार के कब्जे को स्वीकार नहीं करेगा। आउन ने वार्ता की मेजबानी और मध्यस्थता के लिए अमेरिका का आभार जताया। उन्होंने उन अरब और मित्र देशों का भी धन्यवाद किया, जिन्होंने पूरी प्रक्रिया के दौरान लेबनान का समर्थन किया।
हालांकि, इस समझौते का हिज्बुल्लाह ने कड़ा विरोध किया है। संगठन के सांसद हसन फदलल्लाह ने कहा कि हिजबुल्लाह इस फ्रेमवर्क को लागू करने की किसी भी कोशिश का विरोध करेगा और अपने हथियार नहीं छोड़ेगा।
--आईएएनएस
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