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इस बार जन्माष्टमी पर बन रहा द्वापर युग जैसा संयोग, कालकाजी मंदिर के पीठाधीश्वर ने दी जानकारी

नई दिल्ली, 3 सितंबर (आईएएनएस)। जन्माष्टमी के मौके पर कालकाजी मंदिर के पीठाधीश्वर महंत सुरेंद्रनाथ अवधूत ने इस बार के शुभ मुहूर्त को लेकर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस साल जन्माष्टमी पर ग्रह-नक्षत्रों का विशेष संयोग बन रहा है, जिससे उत्सव और भी शुभ हो गया है।
 

नई दिल्ली, 3 सितंबर (आईएएनएस)। जन्माष्टमी के मौके पर कालकाजी मंदिर के पीठाधीश्वर महंत सुरेंद्रनाथ अवधूत ने इस बार के शुभ मुहूर्त को लेकर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस साल जन्माष्टमी पर ग्रह-नक्षत्रों का विशेष संयोग बन रहा है, जिससे उत्सव और भी शुभ हो गया है।

महंत सुरेंद्रनाथ अवधूत ने गुरुवार को आईएएनएस से बात करते हुए बताया कि इस बार का योग द्वापर युग के उस समय के समान है जब भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था। उन्होंने कहा, "भाद्रपद कृष्ण अष्टमी के दिन कंस के कारागार में भगवान कृष्ण का अवतरण हुआ था। उस दिन रोहिणी नक्षत्र था और वृषभ राशि में चंद्रमा था, जिससे वह दिन बहुत शुभ बन गया था। इस बार जन्माष्टमी पर चंद्रमा वृषभ राशि में होगा और रोहिणी नक्षत्र भी होगा। ऐसे में इस बार कृष्ण जन्मोत्सव बहुत उत्साह के साथ मनाया जाएगा।"

महंत ने बताया कि इस बार कृष्ण जन्माष्टमी 4 सितंबर को पड़ रही है। इस दिन मंदिरों में विशेष तैयारियां की गई हैं। भक्त पूरे दिन व्रत करते हैं और मध्यरात्रि में भगवान कृष्ण का पूजन करके उनको भोग के रूप में चढ़ाए गए प्रसाद का सेवन कर व्रत का पारण करते हैं।

बता दें कि अष्टमी तिथि 3-4 सितंबर की मध्य रात्रि 2:30 बजे से शुरू होगी और 5 सितंबर को रात 12:30 बजे तक रहेगी। इसलिए जन्माष्टमी 4 सितंबर को मनाई जाएगी। इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त 11.05 बजे से प्रारंभ हो रहा है और 12.35 तक रहने वाला है। इस दौरान भक्त पूरे विधि-विधान से भगवान कृष्ण की पूजा कर सकते हैं।

दिल्ली के कालकाजी मंदिर सहित सभी कृष्ण मंदिरों में जन्माष्टमी की तैयारियां जोरों पर हैं। इस बार शुभ नक्षत्र और चंद्रमा की स्थिति के कारण भक्तों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। मंदिरों में मध्यरात्रि में होने वाले जन्मोत्सव के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं।

--आईएएनएस

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