गालिबाफ का आरोप, 'ईरानी प्रतिनिधियों के भरोसे को जीतने में नाकाम रहा अमेरिका'
इस्लामाबाद, 12 अप्रैल (आईएएनएस)। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने 'इस्लामाबाद टॉक्स' खत्म होने के बाद पहला आधिकारिक बयान जारी किया। उन्होंने दावा किया कि इस बेनतीजा वार्ता में अमेरिका नाकाम रहा।
गालिबाफ ने एक्स पर बताया कि बातचीत शुरू होने से पहले ही उन्होंने स्पष्ट कर दिया था कि ईरान की ओर से नीयत और इच्छा दोनों मौजूद हैं, लेकिन पिछले दो युद्धों के अनुभवों की वजह से उन्हें भरोसा नहीं है। गालिबाफ ने पाकिस्तान का भी धन्यवाद किया।
एक के बाद एक कई पोस्ट्स में, गालिबाफ ने कहा कि बातचीत शुरू होने से पहले उन्होंने इस बात पर जोर दिया था कि "हमारे पास जरूरी नीयत और इच्छाशक्ति है, लेकिन पिछले दो युद्धों के अनुभवों के कारण, हमें विरोधी पक्ष पर कोई भरोसा नहीं है।"
उन्होंने कहा, "विरोधी पक्ष इस दौर की बातचीत में ईरानी प्रतिनिधिमंडल मिनाब 168 का भरोसा जीतने में आखिरकार नाकाम रहा।"
उन्होंने आगे कहा, "मैं इन वार्ताओं की प्रक्रिया को सुगम बनाने में हमारे मित्र पाकिस्तान के प्रयासों का आभारी हूं, और मैं पाकिस्तान के लोगों का अभिवादन करता हूं।"
उन्होंने कहा कि, ईरान 9 करोड़ लोगों का एक शरीर है—ईरान के उन सभी वीर लोगों का, जिन्होंने सर्वोच्च नेता की सलाह मानते हुए और सड़कों पर उतरकर अपने बच्चों का साथ दिया, और अपने आशीर्वाद के साथ हमें इस राह पर आगे बढ़ाया—इसके लिए मैं उनका आभारी हूं; और इन 21 घंटों की गहन बातचीत में मेरे साथ रहे मेरे साथियों से मैं कहता हूं।
40 दिन के संघर्ष के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दो हफ्ते के सीजफायर का ऐलान किया। पाकिस्तान की अगुवाई में 9-10 अप्रैल को इस्लामाबाद टॉक्स का आयोजन किया गया। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उप राष्ट्रपति जेडी वेंस ने किया तो गालिबाफ ने ईरानी डेलीगेशन की कमान संभाली।
रविवार को जेडी वेंस ने डील सील न होने का ऐलान किया। उन्होंने अमेरिका रवाना होने से पहले एक प्रेस वार्ता में कहा कि बातचीत बेनतीजा रही। उन्होंने दावा किया कि ये ईरान के लिए ठीक नहीं है। साथ ही उन्होंने माना कि समझौते की संभावना पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। “हम फाइनल ऑफर देकर जा रहे हैं। अब देखना है कि ईरान इसे स्वीकारता है या नहीं।”
--आईएएनएस
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