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ईरान युद्ध में पाकिस्तान की भूमिका पर जयराम रमेश की तीखी टिप्पणी, भारत सरकार की विदेश नीति पर उठाए सवाल

नई दिल्ली, 29 मार्च (आईएएनएस)। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्य सभा सांसद जयराम रमेश ने ईरान युद्ध में मध्यस्थ के तौर पर पाकिस्तान का नाम सामने आने पर तीखी टिप्पणी की है। उन्होंने पाकिस्तान की कमियां गिनाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसा है।
 
ईरान युद्ध में पाकिस्तान की भूमिका पर जयराम रमेश की तीखी टिप्पणी, भारत सरकार की विदेश नीति पर उठाए सवाल

नई दिल्ली, 29 मार्च (आईएएनएस)। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्य सभा सांसद जयराम रमेश ने ईरान युद्ध में मध्यस्थ के तौर पर पाकिस्तान का नाम सामने आने पर तीखी टिप्पणी की है। उन्होंने पाकिस्तान की कमियां गिनाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसा है।

जय राम रमेश ने एक्स पर लिखा, "यह एक ऐसा देश (पाकिस्तान) है, जहां लोकतंत्र एक मजाक बनकर रह गया है। यह एक ऐसा देश है, जिसकी अर्थव्यवस्था बदहाल है और जो आईएमएफ तथा चीन और सऊदी अरब जैसे कुछ अन्य दाताओं से मिली जीवनरेखा पर निर्भर है। यह एक ऐसा देश है, जिसे दशकों से आतंकवादियों के पनाहगाह के रूप में जाना जाता रहा है, जो न केवल अपने पड़ोसियों पर बल्कि दुनिया के विभिन्न हिस्सों में हमले करते हैं। यह एक ऐसा देश है, जिसके साथ राष्ट्रपति क्लिंटन, बुश, ओबामा और बाइडेन ने बहुत सख्ती से व्यवहार किया था। अब, नवंबर 2008 में मुंबई में अपने आतंकी हमले के बाद अलग-थलग पड़ जाने के बावजूद, पाकिस्तान को एक नई स्वीकृति मिल गई है।"

जयराम रमेश ने आगे लिखा, "विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के शब्दों में पाकिस्तान का ‘दलाल’ बन जाना ऑपरेशन सिंदूर में भारत की शानदार सैन्य सफलता के बाद मोदी सरकार की विदेश नीति, कूटनीतिक सक्रियता और नैरेटिव प्रबंधन की भारी नाकामी को दिखाता है। निस्संदेह, राष्ट्रपति ट्रंप (जो पीएम मोदी के ‘अच्छे मित्र’ बताए जाते हैं) ने पाकिस्तान की वर्तमान स्वीकार्यता बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई है। लेकिन पीएम मोदी ने ऐसा क्यों और कैसे होने दिया, जबकि वे सितंबर 2019 में ह्यूस्टन के हावडी मोदी और फरवरी 2020 में अहमदाबाद के नमस्ते कार्यक्रम के जरिए व्हाइट हाउस से अपने खास रिश्तों का बखान करते रहे हैं?"

जयराम ने कहा, "प्रधानमंत्री ने अमेरिका को खुश करने के लिए कई तरीके अपनाए। यहां तक कि जिस ट्रेड डील ने भारतीय कृषि बाज़ारों में अमेरिका को अभूतपूर्व पहुंच दी और जिसे भारत के किसानों के साथ विश्वासघात माना गया, वह भी उन्हें अमेरिका से कोई कूटनीतिक लाभ दिलाने में मदद नहीं कर सका। उन्हें केवल एक झुकने वाले और दब्बू नेता के तौर पर देखा जाता है। प्रधानमंत्री दावा करते हैं कि वे दुनिया भर के नेताओं से लगातार फोन पर बात कर रहे हैं। यह निश्चित रूप से अच्छी बात है कि वे ऐसा कर रहे हैं। लेकिन उनकी अत्यधिक व्यक्तित्व-आधारित विदेश नीति के बिखरने ने स्वयंभू विश्वगुरु की विश्वफोनी के रूप में पोल खोल दी है।"

--आईएएनएस

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