भारतीय शेयर बाजार लाल निशान में बंद, फार्मा और फाइनेंशियल सर्विसेज पर रहा दबाव
मुंबई, 14 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारतीय शेयर बाजार बुधवार के कारोबारी सत्र में लाल निशान में बंद हुआ। दिन के अंत में सेंसेक्स 251.89 अंक या 0.34 प्रतिशत की गिरावट के साथ 72,781.89 और निफ्टी 99.25 अंक या 0.44 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 22,622.70 पर था।
बाजार पर दबाव बनाने का काम फार्मा और फाइनेंशियल सर्विसेज स्टॉक्स ने किया। सूचकांकों में निफ्टी फार्मा, निफ्टी हेल्थकेयर और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज करीब एक प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट के साथ बंद हुए। इसके अलावा निफ्टी ऑटो, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी मेटल, निफ्टी प्राइवेट बैंक, निफ्टी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग और निफ्टी कंजप्शन लाल निशान में थे।
दूसरी तरफ निफ्टी एनर्जी, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी आईटी, निफ्टी ऑयल एंड गैस, निफ्टी पीएसई, निफ्टी कमोडिटीज, निफ्टी मीडिया और निफ्टी इंडिया डिफेंस हरे निशान में बंद हुए।
लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में भी गिरावट हुई। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 62.60 अंक या 0.32 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 19,384.80 और निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 50.10 अंक या 0.08 प्रतिशत की गिरावट के साथ 59,409.10 पर बंद हुआ।
सेंसेक्स पैक में इन्फोसिस, टेक महिंद्रा, टीसीएस, एचयूएल, एनटीपीसी, एचसीएल टेक, बीईएल, अल्ट्राटेक सीमेंट, आईटीसी और कोटक महिंद्रा बैंक हरे निशान में थे। बजाज फाइनेंस, एमएंडएम, बजाज फिनसर्व, इटरनल, आईसीआईसीआई बैंक, इंडिगो, सन फार्मा, एलएंडटी, टाइटन, ट्रेंट, एशियन पेंट्स, मारुति सुजुकी, एचडीएफसी बैंक, भारती एयरटेल, पावर ग्रिड, एक्सिस बैंक, टाटा स्टील और एसबीआई लाल निशान में थे।
जानकारों ने कहा कि हाल की बढ़त के बाद प्रॉफिट बुकिंग की वजह से भारतीय शेयर बाजार के लिए आज का सत्र उतार-चढ़ाव वाला रहा। इंट्राडे में कच्चे तेल की कीमतों में कमी, आरबीआई के विदेशी मुद्रा से जुड़े उपायों के बाद रुपए की मजबूती और एलटीसीजी टैक्स व एसटीटी की संभावित समीक्षा की उम्मीदों से बाजार को कुछ सहारा मिला।
हालांकि, उम्मीद से ज्यादा घरेलू थोक महंगाई आंकड़ों ने बॉन्ड यील्ड को बढ़ा दिया, जिससे सख्त मॉनेटरी पॉलिसी की आशंका फिर से बढ़ गई और ऑटोमोबाइल, प्राइवेट बैंकों और मेटल सेक्टर पर दबाव पड़ा। इस बीच, आईटी, एफएमसीजी और पीएसयू बैंकों से मिली अच्छी बिजनेस अपडेट्स ने मुश्किल व्यापक आर्थिक माहौल के बावजूद मजबूत कमाई की संभावना वाली और फंडामेंटल रूप से मजबूत कंपनियों में निवेशकों की दिलचस्पी को और बढ़ाया।
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