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भारतीय बैंकों का वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही में बढ़ेगा मुनाफा, मार्जिन स्थिर रहेगा

नई दिल्ली, 5 जनवरी (आईएएनएस)। भारतीय बैंकों का मुनाफा वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर अवधि) में सालाना आधार पर बढ़ने की उम्मीद है। साथ ही, मार्जिन स्थिर रहने का अनुमान है। यह जानकारी सोमवार को जारी रिपोर्ट में दी गई।
 
भारतीय बैंकों का वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही में बढ़ेगा मुनाफा, मार्जिन स्थिर रहेगा

नई दिल्ली, 5 जनवरी (आईएएनएस)। भारतीय बैंकों का मुनाफा वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर अवधि) में सालाना आधार पर बढ़ने की उम्मीद है। साथ ही, मार्जिन स्थिर रहने का अनुमान है। यह जानकारी सोमवार को जारी रिपोर्ट में दी गई।

सिस्टमैटिक्स इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की ओर से जारी रिपोर्ट में कहा गया कि लोन ग्रोथ के बने रहने, अधिक फीस आय और कम क्रेडिट लागत के कारण मुनाफे में सुधार होने की उम्मीद है।

ब्रोकरेज का अनुमान है कि आने वाले समय में लोन ग्रोथ में बढ़त जारी रहेगी। इसकी वजह ब्याज दरों में गिरावट और जीएसटी एवं इनकम टैक्स में कटौती से मांग में इजाफा होना है।

इसके अलावा, रिपोर्ट में अनुमान लगाया कि चौथी तिमाही में शुद्ध ब्याज मार्जिन में गिरावट आएगी, लेकिन उसके बाद इसमें सुधार होगा क्योंकि मौजूदा बुक में फिर से वृद्धि और असुरक्षित लोन सेगमेंट में होने वाली स्लीपेज के सामान्यीकरण के साथ जमा की लागत में कमी आने की उम्मीद है, जिसके परिणामस्वरूप क्रेडिट लागत कम होगी।

आरबीआई के डेटा के मुताबिक, 12 दिसंबर 2025 तक बैंकिंग सिस्टम में एडवांस तिमाही आधार पर 4.5 प्रतिशत और सालाना आधार पर 11.7 प्रतिशत बढ़ा है।

रिपोर्ट में कहा गया कि अधिकांश बैंकों ने अपने मार्जिन को सुरक्षित रखने के लिए शुरुआती दौर में ही बचत खातों और सावधि जमा दोनों पर ब्याज दरें कम कर दी हैं। बचत खातों की ब्याज दरों में कटौती का असर फंड की लागत पर तुरंत पड़ा, लेकिन मौजूदा निश्चित ब्याज दर जमाओं के विलंबित पुनर्मूल्यांकन के कारण सावधि जमा की ब्याज दरों में कमी से होने वाले लाभ मौजूदा तिमाही से अधिक स्पष्ट होने की उम्मीद है।

एक अन्य हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि मौसमी कृषि संबंधी कुछ उतार-चढ़ाव को छोड़कर, अधिकांश बैंकों के लिए परिसंपत्ति गुणवत्ता स्थिर रहने की उम्मीद है। ब्रोकरेज फर्म ने आगे कहा कि तीसरी तिमाही में स्थिर सुधार के रुझान देखने को मिलेंगे, जिससे ऋण लागत के प्रभाव को कम करने में मदद मिलेगी।

--आईएएनएस

एबीएस/