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वैश्विक अस्थिरता का भारत ने बेहतर ढंग से किया प्रबंधन, मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की ग्रोथ आजादी के बाद सबसे अधिक: अरविंद पनगढ़िया

नई दिल्ली, 3 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारत ने वैश्विक अस्थिरता का बहुत बेहतर ढंग से प्रबंधन किया है और महंगाई के स्थिर बने रहने के साथ अर्थव्यवस्था की गति भी बनी हुई है। यह बयान 16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया ने शनिवार को दिया।
 

नई दिल्ली, 3 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारत ने वैश्विक अस्थिरता का बहुत बेहतर ढंग से प्रबंधन किया है और महंगाई के स्थिर बने रहने के साथ अर्थव्यवस्था की गति भी बनी हुई है। यह बयान 16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया ने शनिवार को दिया।

राष्ट्रीय राजधानी में 5वें कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव (केईसी 2026) के साइडलाइन में समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में पनगढ़िया ने कहा, "मेरा लंबे समय से मानना है कि भारत की अर्थव्यवस्था 7-8 प्रतिशत की दर से बढ़ती रहेगी। मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने के बाद मुझे शुरुआत में लगा था कि इसका भारतीय अर्थव्यवस्था पर काफी खराब असर होगा, लेकिन अर्थव्यवस्था ने काफी अच्छा प्रदर्शन किया। महंगाई के स्थिर बने रहने के साथ अर्थव्यवस्था की गति भी बनी हुई है, जो दिखाता है कि भारत ने वैश्विक अस्थिरता का बहुत बेहतर ढंग से प्रबंधन किया है।"

देश की अर्थव्यवस्था के लिए सबसे अच्छी बात यह है कि अब मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है, बीते तीन वित्त वर्षों में इस सेक्टर की ग्रोथ 10 प्रतिशत से अधिक की रही है, जो कि आजादी से बाद सबसे बड़ा आंकड़ा है।

उन्होंने आगे कहा कि कारोबारी अकसर कुछ अनिश्चितताओं के लिए प्रावधान कर लेते हैं। अनिश्चितताएं एक या दो सेक्टर को प्रभावित कर सकती हैं, न कि पूरी अर्थव्यवस्था को। इस वजह से कुछ सेक्टर अच्छा करेंगे और इससे अर्थव्यवस्था को सहारा मिलेगा।

इससे पहले, इसी कार्यक्रम में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट के चलते पैदा हुई वैश्विक अनिश्चितता का भारत सफलतापूर्वक सामना करने में सक्षम रहा है और देश की आर्थिक बुनियाद मजबूत बनी हुई है।

वित्त मंत्री ने कहा, “वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में वास्तविक जीडीपी 7.8 प्रतिशत बढ़ी। अगस्त 2026 में सीपीआई मुद्रास्फीति करीब 4.8 प्रतिशत रही और पहली तिमाही में चालू खाते का घाटा जीडीपी का 0.5 प्रतिशत रहा।”

उन्होंने आगे कहा कि 2014 से सरकार ने उन क्षमताओं को मजबूत करने के लिए काम किया है, जिन पर सतत विकास निर्भर करता है जिसमें प्रतिक्रिया देने की राज्य की क्षमता, उत्पादन करने की अर्थव्यवस्था की क्षमता और नागरिकों एवं उद्यमों की विकास में भागीदारी की क्षमता शामिल हैं।

--आईएएनएस

एबीएस