पिछले 12 वर्षों में भारत ने कई क्षेत्रों में की उल्लेखनीय प्रगति, 10 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनने के लिए अधिक प्रतिस्पर्धी बनने की जरूरत: सीआईआई अध्यक्ष
मुंबई, 23 जून (आईएएनएस)। भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के अध्यक्ष आर. मुकुंदन ने मंगलवार को कहा कि भारत को 10 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बनना होगा। उन्होंने कहा कि बदलते भू-राजनीतिक और तकनीकी परिदृश्य के बीच भारत को व्यापार, विनिर्माण, निवेश और नवाचार के क्षेत्र में अपनी गति बढ़ानी होगी। न्यूज एजेंसी आईएएनएस से एक खास बातचीत में मुकुंदन ने आर्थिक सुधारों, एफडीआई, मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए), हरित विकास, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और ऊर्जा सुरक्षा जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी राय रखी।
आईएएनएस से बात करते हुए सीआईआई अध्यक्ष ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारत ने कई क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने कहा कि बिजली, लॉजिस्टिक्स, रेलवे, पोर्ट और शिपिंग जैसे क्षेत्रों में बड़े सुधार देखने को मिले हैं। हालांकि, भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनने के लिए चीन और वियतनाम जैसे देशों से बेहतर प्रदर्शन करना होगा। उन्होंने कहा कि अब केवल 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' नहीं, बल्कि 'स्पीड ऑफ डूइंग बिजनेस' पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के मुद्दे पर मुकुंदन ने कहा कि भारतीय कंपनियां विदेशों में निवेश कर रही हैं, लेकिन भारत में अधिक विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए और सुधारों की जरूरत है। उनका कहना है कि निवेश प्रक्रिया को और सरल तथा तेज बनाकर देश में अधिक पूंजी लाई जा सकती है।
भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि भारत ने कई एफटीए पर हस्ताक्षर किए हैं, लेकिन उनका उपयोग अपेक्षित स्तर पर नहीं हो रहा है। उन्होंने 'फ्री ट्रेड यूटिलाइजेशन' (एफटीयू) बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उनके अनुसार रक्षा, एयरोस्पेस और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में भारत और अमेरिका के बीच सहयोग के बड़े अवसर मौजूद हैं।
भारत को 10 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य पर मुकुंदन ने कहा कि देश को शिपिंग, बंदरगाहों और रेलवे की क्षमता में बड़े पैमाने पर वृद्धि करनी होगी। साथ ही कई सरकारी और औद्योगिक प्रक्रियाओं को डिजिटल बनाकर दक्षता बढ़ाने की जरूरत है। उनका मानना है कि मजबूत बुनियादी ढांचा ही तेज आर्थिक विकास की नींव बनेगा।
उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना को लेकर उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में यह योजना बेहद सफल रही है और इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। हालांकि, फर्नीचर, खिलौना उद्योग और अन्य श्रम-प्रधान क्षेत्रों में भी पीएलआई योजनाओं का विस्तार किया जाना चाहिए, ताकि घरेलू विनिर्माण को और बढ़ावा मिल सके।
ग्रीन पॉलिसी और ऊर्जा परिवर्तन पर मुकुंदन ने कहा कि बिजली ट्रांसमिशन नेटवर्क विकसित करने में समय लगता है, इसलिए वितरण व्यवस्था को मजबूत करने पर अधिक ध्यान देना होगा। उन्होंने बताया कि उद्योग जगत ने इस संबंध में सरकार को कई सुझाव दिए हैं और इन पर काम भी चल रहा है।
सीआईआई अध्यक्ष ने आगे कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन इसका व्यापक स्तर पर उपयोग करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, बुनियादी ढांचे और प्रशासनिक कार्यों में एआई का प्रभावी उपयोग करके उत्पादकता और सेवा गुणवत्ता को बेहतर बनाया जा सकता है।
इथेनॉल ब्लेंडिंग पर मुकुंदन ने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना देश की प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि वर्ष 2020 के बाद निर्मित वाहनों पर इथेनॉल मिश्रण का कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता। साथ ही उन्होंने बेहतर वाहन स्क्रैपेज नीति और प्रोत्साहन योजनाएं लाने की जरूरत बताई, ताकि स्वच्छ ईंधन के उपयोग को बढ़ावा मिल सके।
इथेनॉल उत्पादन में पानी के उपयोग के सवाल पर उन्होंने आईएएनएस से कहा कि भारत को जल प्रबंधन के क्षेत्र में इजरायल से सीख लेने की आवश्यकता है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए शुरू किए गए 'पर ड्रॉप मोर क्रॉप' अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि पानी के बेहतर संरक्षण और कम जल उपयोग वाली फसलों को बढ़ावा देकर कृषि क्षेत्र को अधिक टिकाऊ बनाया जा सकता है।
पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और उसके महंगाई पर प्रभाव को लेकर मुकुंदन ने कहा कि सरकार और उद्योग जगत ने मिलकर अधिकांश क्षेत्रों में बढ़ती लागत का बोझ उपभोक्ताओं तक पहुंचने से रोका है। हालांकि कुछ क्षेत्रों में असर देखने को मिला है। उन्होंने कहा कि विभिन्न राज्यों में बिजली की लागत में बड़ा अंतर है और इस लागत को कम करने के उपायों पर ध्यान देना होगा, ताकि उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाई जा सके।
मुकुंदन ने आगे कहा कि भारत के पास मजबूत जनसांख्यिकीय लाभ, बढ़ता घरेलू बाजार और तेजी से विकसित हो रहा तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र है। यदि बुनियादी ढांचे, निवेश, डिजिटलाइजेशन, हरित ऊर्जा और नवाचार पर लगातार ध्यान दिया जाए, तो भारत आने वाले वर्षों में वैश्विक अर्थव्यवस्था में और मजबूत स्थिति हासिल कर सकता है।
--आईएएनएस
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