'संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाना राहुल गांधी की आदत', इंडिया ब्लॉक के प्रदर्शन पर एनडीए नेताओं का पलटवार
नई दिल्ली, 13 अक्टूबर (आईएएनएस)। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को रद्द करने की मांग को लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में इंडिया ब्लॉक लगातार विरोध-प्रदर्शन कर रहा है। सोमवार को बाराखंभा रोड से सुप्रीम कोर्ट तक निकाले गए मार्च के दौरान कांग्रेस की ओर से दावा किया गया कि देश राहुल गांधी के साथ है। वहीं, इस मार्च को लेकर एनडीए नेताओं ने पलटवार करते हुए कहा कि संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाना राहुल गांधी की आदत बन गई है।
दिल्ली में विपक्ष के विरोध-प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी पर एक महिला पत्रकार को धक्का देकर जमीन पर गिराने के आरोपों को लेकर केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि जो दृश्य हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं। देश के नेता प्रतिपक्ष का व्यवहार इतना असंवेदनशील नहीं होना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि जब उन्होंने 'लड़की हूं, लड़ सकती हूं' का नारा दिया था, तो अब वह नारा कहां है?
अन्नपूर्णा देवी ने पूछा कि क्या प्रियंका गांधी अपने भाई को महिलाओं के साथ उचित व्यवहार करने की सलाह नहीं देतीं? उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने पहले दिल्ली पुलिस के कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार किया और अब सुप्रीम कोर्ट परिसर में एक महिला पत्रकार के साथ कथित तौर पर धक्का-मुक्की की घटना सामने आई है। नेता प्रतिपक्ष से इस तरह के व्यवहार की उम्मीद नहीं की जाती। राहुल गांधी अहंकार में हैं और उन्हें यह समझना चाहिए कि महिलाओं और पुरुषों के साथ किस तरह का व्यवहार किया जाना चाहिए।
केंद्रीय राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने इंडिया ब्लॉक के प्रदर्शन पर कहा कि यदि विपक्ष को कोई सुझाव देना है, तो उसे बेहतर तरीके से और शांतिपूर्वक रखा जा सकता है। लोकतंत्र में सभी को अपनी बात रखने और प्रदर्शन करने का अधिकार है, लेकिन विरोध के नाम पर अनावश्यक रूप से देश को गुमराह करना उचित नहीं है। विपक्ष देश को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में हो रहे प्रयासों में बाधा डालने की कोशिश कर रहा है।
सतीश चंद्र दुबे ने राहुल गांधी पर देश का माहौल खराब करने का आरोप लगाते हुए कहा कि ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति वर्ष 2025 में हुई थी। उन्होंने लोकसभा चुनावों और विभिन्न राज्यों के विधानसभा चुनावों का उल्लेख करते हुए कहा कि विपक्ष चुनाव हारने के बाद चुनाव आयोग पर सवाल उठाने लगता है। जिन राज्यों में विपक्ष जीतता है, वहां चुनाव आयोग की प्रशंसा की जाती है, जबकि हारने पर आयोग को जिम्मेदार ठहराया जाता है।
भाजपा नेता शाहनवाज हुसैन ने जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाए जाने के मुद्दे पर कहा कि जब प्रदर्शनकारी निर्धारित स्थलों पर प्रदर्शन करने के बजाय दूसरी जगहों पर फैल जाते हैं, तो इससे कानून-व्यवस्था प्रभावित होती है और आम लोगों को परेशानी होती है। दिल्ली पुलिस की ओर से प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थल तय किए गए हैं। प्रदर्शन करना है तो प्रदर्शनकारियों को बुराड़ी, कड़कड़डूमा या रामलीला मैदान जैसे निर्धारित स्थानों पर जाना चाहिए।
इंडिया ब्लॉक के मार्च पर शाहनवाज हुसैन ने कहा कि विपक्ष ने अपने लोगों को इकट्ठा किया, लेकिन वह कोई खास प्रभाव नहीं छोड़ सका। उन्होंने दावा किया कि पूरे इंडिया ब्लॉक के एकजुट होने के बावजूद सड़क पर जुटी भीड़ को जिस तरह से बड़ा प्रदर्शन बताया जा रहा है, वह वास्तविक स्थिति से अलग है। आम जनता चुनाव आयोग के मुद्दे पर विपक्ष के रुख को समझती है और चुनाव में जीत-हार के अनुसार आयोग को लेकर बदलने वाले बयानों पर भी नजर रखती है। संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाना राहुल गांधी की आदत बन गई है।
जदयू नेता राजीव रंजन ने कहा कि भारत के मुख्य न्यायाधीश ने मुलाकात की मांग को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि ऐसा करना संवैधानिक मर्यादाओं के अनुरूप नहीं होगा। मुख्य न्यायाधीश ने संबंधित पक्षों को याचिका दायर करने की सलाह दी थी। विपक्ष जिन मुद्दों को उठाना चाहता है, उनसे संबंधित मामले पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं।
बिहार सरकार में मंत्री प्रमोद कुमार ने कहा कि प्रदर्शन में शामिल लोग वामपंथी विचारधारा से प्रभावित हैं और उन्हें भारत के बजाय इस्लामाबाद से निर्देश मिल रहे हैं। कुछ लोग ऐसी परिस्थितियों में भी मानवाधिकारों के उल्लंघन का मुद्दा उठाते रहे हैं। प्रदर्शनकारी बेचैन हैं और तर्कहीन व्यवहार कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट विरोध-प्रदर्शन करने की जगह नहीं है। वहां प्रदर्शन करने जाने से विपक्ष की संवैधानिक समझ पर सवाल उठते हैं।
उन्होंने राहुल गांधी के व्यवहार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कभी वह अचानक लोगों को गले लगा लेते हैं, कभी सार्वजनिक स्थानों पर ऐसी हरकतें करते हैं, जिन पर सवाल उठते हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट परिसर में इस तरह के विरोध-प्रदर्शन के बारे में पहले कभी नहीं सुना। उन्होंने अपने छात्र आंदोलन के अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें विपक्ष के इस प्रदर्शन का उद्देश्य समझ नहीं आता।
--आईएएनएस
डीकेएम/एबीएम
