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आईआईटी मद्रास ने जांजीबार में शुरू की प्रवेश प्रक्रिया, पिछले बैच को मिला था शत-प्रतिशत प्लेसमेंट

नई दिल्ली, 13 अप्रैल (आईएएनएस)। आईआईटी मद्रास के अफ्रीका स्थित जांजीबार परिसर में वर्ष 2026 के लिए प्रवेश की प्रक्रिया शुरू हो गई है। यह किसी भी भारतीय आईआईटी संस्थान का पहला अंतरराष्ट्रीय परिसर है, जो तंजानिया के जांजीबार में स्थापित किया गया है।
 
आईआईटी मद्रास ने जांजीबार में शुरू की प्रवेश प्रक्रिया, पिछले बैच को मिला था शत-प्रतिशत प्लेसमेंट

नई दिल्ली, 13 अप्रैल (आईएएनएस)। आईआईटी मद्रास के अफ्रीका स्थित जांजीबार परिसर में वर्ष 2026 के लिए प्रवेश की प्रक्रिया शुरू हो गई है। यह किसी भी भारतीय आईआईटी संस्थान का पहला अंतरराष्ट्रीय परिसर है, जो तंजानिया के जांजीबार में स्थापित किया गया है।

इसका लाभ तंजानिया के अलावा इथियोपिया, जाम्बिया और केन्या जैसे देशों के छात्रों को भी मिल रहा है। आईआईटी मद्रास यहां विदेशी छात्रों को इंजीनियरिंग, टेक्नोलॉजी, डेटा साइंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस समेत कई अंडरग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट पाठ्यक्रम ऑफर कर रहा है।

गौरतलब है कि 2025 में यहां एमटेक के पहले बैच का शत-प्रतिशत प्लेसमेंट हुआ है। आईआईटी मद्रास अपनी इस पहल से पूर्वी अफ्रीका में उच्च शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार तथा उद्यमिता को बढ़ावा दे रहा है। संस्थान द्वारा पूर्णकालिक ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट पाठ्यक्रमों के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। एमटेक पाठ्यक्रम के लिए स्क्रीनिंग परीक्षा 26 अप्रैल 2026 को आयोजित की जाएगी, जबकि बीएस पाठ्यक्रम की परीक्षा 6 जून 2026 को भारत और विदेशों में निर्धारित केंद्रों पर एक साथ होगी।

इच्छुक अभ्यर्थी पात्रता, अंतिम तिथि, परीक्षा तैयारी और परिसर से जुड़ी जानकारी के लिए आधिकारिक प्रवेश पोर्टल पर जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी. कामकोटी ने विदेश में संचालित इस कैंपस को लेकर कहा कि जांजीबार में इस परिसर की स्थापना संस्थान के लिए गर्व का विषय है।

उन्होंने बताया कि जांजीबार सरकार और वहां के लोगों से मिले सहयोग ने इस पहल को मजबूत बनाया है। उन्होंने विश्वभर के विद्यार्थियों को इस परिसर में उपलब्ध आधुनिक इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने के लिए आमंत्रित किया। यह परिसर वर्ष 2023 में भारत, तंजानिया और जांजीबार की सरकारों के संयुक्त प्रयास से स्थापित हुआ था। वर्तमान में यह ब्वेलियो स्थित अस्थायी परिसर से संचालित हो रहा है। प्रारंभ में यहां डाटा विज्ञान और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में बीएस तथा एमटेक पाठ्यक्रम शुरू किए गए थे। वर्ष 2025 में रासायनिक प्रक्रिया अभियंत्रण में बीएस पाठ्यक्रम भी जोड़ा गया। यह कदम इसलिए उठाया गया ताकि इससे अफ्रीका के औद्योगिक क्षेत्र के लिए कुशल मानव संसाधन तैयार किया जा सके।

वर्तमान में आईआईटी मद्रास के इस परिसर में 129 से अधिक छात्र विभिन्न पाठ्यक्रमों में अध्ययनरत हैं। गौरतलब है कि इन छात्रों में लगभग 51 प्रतिशत तंजानिया से ही हैं। इसके अलावा इथियोपिया, जाम्बिया और केन्या जैसे देशों के छात्र भी यहां अध्ययनरत हैं। संस्थान में छात्राओं की भागीदारी भी उल्लेखनीय है, जो इसकी समावेशी और वैश्विक पहचान को दर्शाती है। संस्थान की वैश्विक सहभागिता डीन प्रोफेसर प्रीति अघालयम के मुताबिक भारतीय और अंतरराष्ट्रीय औद्योगिक तथा शैक्षणिक संस्थानों के साथ सहयोग के कारण विद्यार्थियों को व्यापक अवसर मिल रहे हैं।

उन्होंने नए अभ्यर्थियों का स्वागत करते हुए कहा कि यह परिसर उन्हें वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करता है। जनवरी 2026 में प्रोफेसर प्रभु राजगोपाल ने परिसर के निदेशक-प्रभारी के रूप में कार्यभार संभाला। उनके नेतृत्व में संस्थान ने नई उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में एमटेक के पहले बैच का शत-प्रतिशत प्लेसमेंट हुआ और अब संस्थान अपने पहले शोधार्थियों का स्वागत करने की तैयारी कर रहा है।

संस्थान पूर्वी अफ्रीका में नवाचार और स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के उद्देश्य से नवाचार एवं उद्यमिता केंद्र और अनुप्रयुक्त अनुसंधान कार्यालय स्थापित कर रहा है। इसके अलावा विद्यार्थी विभिन्न कंपनियों में इंटर्नशिप कर रहे हैं और कई अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध प्रस्तुत कर चुके हैं। फुंबा प्रायद्वीप में स्थायी परिसर का निर्माण कार्य भी तेजी से जारी है। जनवरी 2026 में नए छात्रावास भवन का उद्घाटन किया गया। पूर्ण होने पर यह परिसर पूर्वी अफ्रीका में उच्च शिक्षा, अनुसंधान और उद्यमिता का प्रमुख केंद्र बनने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

--आईएएनएस

जीसीबी/डीएससी