आईआईटी दिल्ली बना रहा बिजली की बचत करने वाला स्मार्ट एयर कंडीशनर
नई दिल्ली, 26 फरवरी (आईएएनएस)। आईआईटी दिल्ली एक नया स्मार्ट एयर कंडीशनर तैयार कर रहा है। आईआईटी दिल्ली का यह स्मार्ट एयर कंडीशनर सामान्य एसी की तुलना में बहुत कम बिजली खर्च करेगा। फिलहाल इस एयर कंडीशनर पर प्रयोगशाला में परीक्षण किया जा रहा है।
लगातार बढ़ती गर्मी चिंता का कारण बन चुकी है। अधिक तापमान से लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है और कामकाज की क्षमता भी घटती है। सरकारी अनुमान है कि आने वाले वर्षों में ठंडक के लिए बिजली की मांग कई गुना बढ़ सकती है। इससे प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव बढ़ेगा और लोगों के बिजली बिल भी अधिक आएंगे। इसी समस्या का समाधान खोजने के लिए आईआईटी दिल्ली के शोधकर्ताओं नई तकनीक विकसित कर रहे हैं।
आईआईटी का कहना है कि सामान्य एयर कंडीशनर कमरे की हवा को जरूरत से ज्यादा ठंडा करके उसमें मौजूद नमी हटाते हैं। इस प्रक्रिया में अधिक बिजली खर्च होती है। वहीं, नई व्यवस्था में नमक के घोल का उपयोग किया गया है। यह घोल हवा में मौजूद नमी को सीधे सोख लेता है। हवा और घोल के बीच एक विशेष पतली झिल्ली लगाई गई है, जिससे नमक कमरे की हवा में नहीं मिल पाता। जब घोल नमी सोखकर पतला हो जाता है, तो उसे दोबारा सुखाना पड़ता है। इसके लिए अलग से कोई अतिरिक्त यंत्र नहीं लगाया गया है। मशीन के बाहरी हिस्से से निकलने वाली अतिरिक्त गर्मी का ही उपयोग करके घोल को फिर से उपयोग योग्य बना दिया जाता है। इस तरह ऊर्जा की बचत होती है।
आईआईटी दिल्ली के यांत्रिक इंजीनियरिंग विभाग के शोधार्थी इस प्रकार का हाई-एफिशियन्सी एयर कंडीशनर विकसित कर रहे हैं। इसमें बिजली की खपत को लगभग एक-तिहाई तक कम करने की क्षमता है। अभी इस पर प्रयोगशाला-स्तरीय प्रोटोटाइप का परीक्षण चल रहा है। इंडिया कूलिंग एक्शन प्लान, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार की रिपोर्ट के अनुसार तापमान में निरंतर वृद्धि और घरों तथा कार्यालयों में एयर कंडीशनरों के बढ़ते उपयोग के साथ कूलिंग के लिए बिजली की खपत 2037–38 तक तीन गुना होने का अनुमान है। बिजली की खपत में वृद्धि से प्राकृतिक संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा। वहीं, उपभोक्ताओं के बिजली बिल में भी बढ़ोतरी होगी।
इसी चुनौती से निपटने के लिए आईआईटी दिल्ली के शोधार्थी नए प्रकार का हाई-एफिशियन्सी एयर कंडीशनर विकसित कर रहे हैं। प्रो. अनुराग गोयल के नेतृत्व में यह शोध टीम काम कर रही है। इसमें यांत्रिक इंजीनियरिंग विभाग के पीएचडी. शोधार्थी अनंतकृष्णन भी शामिल हैं।
वर्तमान में उपयोग में आने वाले वेपर-कंप्रेशन सिस्टम आधारित एयर कंडीशनर नमी को हटाने के लिए हवा को आवश्यकता से अधिक ठंडा करते हैं ताकि नमी कन्डेन्स हो सके। यह प्रक्रिया अत्यधिक ऊर्जा खपत वाली होती है।
आईआईटी दिल्ली के यांत्रिक इंजीनियरिंग विभाग में प्रो. अनुराग गोयल के शोध समूह ने एक नई अवधारणा विकसित की है, जिसमें नमी को सीधे नियंत्रित करने के लिए एक कॉम्पैक्ट ऐड-ऑन मॉड्यूल का उपयोग किया है। यह प्रणाली इस प्रकार डिजाइन की गई है कि देश में विभिन्न बाहरी परिस्थितियों के दौरान वेपर कंप्रेशन और डेसिकेंट मॉड्यूल के बीच ऊर्जा अंतरण की दर का सटीक संतुलन सुनिश्चित किया जा सके।
प्रो. अनुराग गोयल का कहना है, ''प्रस्तावित प्रणाली का उपयोग करते हुए सामान्य परिस्थितियों में एक सामान्य कमरे के एयर कंडीशनर के लिए लगभग 1,200 वॉट की कुल बिजली खपत की तुलना में हाइब्रिड प्रणाली में बिजली की खपत घटकर लगभग 800 वॉट रह जाती है। इससे समान इनडोर कम्फर्ट स्टैंडर्ड्स को बनाए रखते हुए लगभग 33 प्रतिशत तक कम ऊर्जा खपत हुई।''
शोध टीम को उम्मीद है कि इस प्रकार की सतत कूलिंग तकनीक का व्यापक स्तर पर उपयोग होगा, विशेष रूप से भारतीय भवनों में। आईआईटी का यह हाई-एफिशियन्सी कूलिंग एक अध्ययन जर्नल ऑफ बिल्डिंग इंजीनियरिंग में प्रकाशित हुआ है।
--आईएएनएस
जीसीबी/एसके
