आईआईटी दिल्ली के छात्र ऋषिकेश की मौत पर जांच समिति का गठन
नई दिल्ली, 25 अगस्त (आईएएनएस)। आईआईटी दिल्ली के एमएससी छात्र ऋषिकेश कुमार की मौत के मामले में एक एक्सटर्नल जांच समिति बनाने का फैसला लिया गया है। यह फैसला आईआईटी दिल्ली ने लिया है। संस्थान ने छात्र के निधन पर गहरा दुख जताया है और कहा है कि इस दुख की घड़ी में संस्थान छात्र के परिवार के साथ खड़ा है।
24 अगस्त को ऋषिकेश की याद में एक शोकसभा भी आयोजित की गई। आईआईटी दिल्ली ने कहा कि इस तरह की दुखद घटना की पूरी और निष्पक्ष जांच जरूरी है। इसलिए संस्थान एक बाहरी जांच समिति बनाने जा रहा है। यह समिति इस बात की जांच करेगी कि घटना किन परिस्थितियों में हुई और छात्रों को दी जा रही सहायता व्यवस्था में और क्या सुधार किए जा सकते हैं।
आईआईटी का कहना है कि ऋषिकेश के परिवार को आर्थिक मदद भी दी जा रही है। ऋषिकेश ने जुलाई 2025 में आईआईटी दिल्ली में दाखिला लिया था और वह परिसर के छात्रावास में रहते थे। संस्थान के अनुसार वह पढ़ाई में काफी अच्छे छात्र थे।
आईआईटी दिल्ली ने बताया कि इस साल होली के कुछ दिन बाद कुछ छात्रों ने ऋषिकेश की तबीयत को लेकर चिंता जताई थी। इसके बाद उन्हें संस्थान की एंबुलेंस से तुरंत आईआईटी दिल्ली अस्पताल ले जाया गया।
अस्पताल में संस्थान के मनोचिकित्सक ने उनकी जांच की और उन्हें जरूरी मदद दी। इसके बाद उनके परिवार ने एक अन्य अस्पताल में इलाज कराने का फैसला किया। ऋषिकेश वहां करीब एक महीने तक भर्ती रहे और इलाज के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई। इलाज के बाद ऋषिकेश ने जनवरी से मई 2026 वाले दूसरे सेमेस्टर से छुट्टी लेने का अनुरोध किया।
आईआईटी दिल्ली ने उनका अनुरोध मंजूर कर लिया। जुलाई 2026 में उनके स्वास्थ्य से जुड़े रिकॉर्ड की फिर से जांच की गई। डॉक्टरों ने सलाह दी कि उन्हें कुछ समय तक माता-पिता की निगरानी में रहना चाहिए। जुलाई और अगस्त में संस्थान के डॉक्टर और परामर्शदाता ने उन्हें इलाज और परामर्श की सुविधा दी। इसके बाद ऋषिकेश ने जुलाई से नवंबर 2026 वाले तीसरे सेमेस्टर से भी छुट्टी लेने का अनुरोध किया, जिसे संस्थान ने मंजूर कर लिया था।
आईआईटी दिल्ली का कहना है कि छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर संस्थान लगातार अपनी सुविधाएं बढ़ा रहा है।संस्थान में 15 परामर्शदाता हैं। एक पूर्णकालिक मनोचिकित्सक है व दो अंशकालिक मनोचिकित्सक हैं। इनमें एक एम्स और दूसरा विमहांस से आता है। संस्थान ने छात्रों की उन शिकायतों को सुनने के लिए बाहरी लोकपाल नियुक्त करने का भी प्रस्ताव रखा है, जिनका समाधान संस्थान की मौजूदा व्यवस्था से नहीं हो पाता।
आईआईटी दिल्ली ने छात्रों से कहा है कि वे अपनी समस्याएं और सुझाव खुलकर संस्थान के सामने रखें। संस्थान ने कहा कि छात्रों का कल्याण और उनका मानसिक स्वास्थ्य उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में है। आईआईटी दिल्ली ने भरोसा दिलाया है कि वह छात्रों को बेहतर और समय पर मदद देने के लिए अपनी व्यवस्था को लगातार मजबूत करता रहेगा।
--आईएएनएस
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